चीन-भारत विवाद के बीच सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति कोविंद उठाएंगे ये कदम

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नई दिल्ली : “भारत” और ‘चीन’ दोनों देशों के बीच चल रहे विवाद को लेकर भारत के नए राष्‍ट्रपति ‘रामनाथ कोविंद’ सेना का उत्साह बढ़ाने के लिए 20 जुलाई को लद्दाख के दो दिन दौरे पर जाएंगे.

चीन-भारत विवाद के बीच सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति कोविंद उठाएंगे ये कदम

देश के नए राष्‍ट्रपति के तौर पर कोविंद का यह पहला आधिकारिक दौरा होगा. कोविंद ‘लद्दाख’ में सेना के ‘इन्फेन्ट्री रेजिमेंट लद्दाख स्काउट’ के कार्यक्रम में शामिल होंगे. इस रेजिमेंट के कुल 5 में से हर बटैलियन में 900 जवान हैं. कारगिल जंग में पराक्रम दिखाने के बाद 2001 में इसे नियमित आर्मी रेजिमेंट का दर्जा मिला था.

चीन ने की थी लद्दाख में घुसपैठ की कोशिश

अभी-अभी ‘चीनी सेना’ ने ‘लद्दाख’ इलाके में घुसपैठ करने का प्रयास किया था, जिसे भारतीय जवानों ने नाकाम कर दिया था. चीनी सेना ने लद्दाख क्षेत्र के ‘पेंगोंग झील’ के निकट की गई घुसपैठ का नाकाम प्रयास और उस समय की गई पत्थरबाजी के बाद ‘भारतीय सेना’ चौकन्नी हो गई है.

चीन-भारत विवाद के बीच सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति कोविंद उठाएंगे ये कदम

किसी भी प्रकार के हालातों को मात देने के लिए ‘भारत’ ने लद्दाख में ‘एलओएसी’ पर अपनी सेना की तैनाती बढ़ा दी है. घुसपैठ की नाकाम कोशिश के बाद ‘चीन’ और ‘भारत’ की सेना के बीच हुई बातचीत में चीन की तरफ से आश्वासन दिया गया था कि आगे से ये गलती नहीं दोहराई जाएगी.

राष्ट्रपति ‘रामनाथ कोविंद’ महीने के अंत में ‘लद्दाख’ के पहले आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे. वह ऐसे वक्त में इस इलाके में जा रहे हैं, जब ‘डोकलाम’ में ‘भारत’ और ‘चीन’ की सेनाओं के बीच तनातनी लगातार जारी है.

चीन-भारत विवाद के बीच सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति कोविंद उठाएंगे ये कदम

उधर, ‘लद्दाख’ के ‘पैन्गॉन्ग झील’ के क्षेत्र में भी दोनों देशों के सैनिकों के बीच पथराव की घटना हुई है. कोविंद के दौरे को भारतीय बलों का उत्साह बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है. खास बात यह है कि, 2014 में सत्ता संभालने के बाद पीएम ‘नरेंद्र मोदी’ ने भी इस क्षेत्र का दौरा किया था.

कोविंद यहां सेना के ‘इन्फेन्ट्री रेजिमेंट लद्दाख स्काउट’ के आयोजन में शामिल होंगे. इस रेजिमेंट के कुल 5 में से हर बटैलियन में 900 सैनिक हैं। ‘कारगिल जंग’ में पराक्रम दिखाने के बाद 2001 में इसे नियमित आर्मी रेजिमेंट का दर्जा मिला था.

राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों ने बताया है कि, कोविंद का दौरा एक दिवसीय होगा. जानकारी के अनुसार बता दें कि, अभी-अभी इस इलाके में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की कोशिश की थी. लेकिन भारतीय जवानों ने उन्हें वापस पीछे ढकेल दिया था.

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ध्यान देने वाली बात यह है कि, ‘भारत’ और चीनी सेना के बीच बीते दो महीने से ‘डोकलाम’ में तनातनी लगातार जारी है. चीनी सेना ने इस क्षेत्र में सड़क बनाने का प्रयास किया था. जिसके बाद ‘भारतीय सेना’ ने समय पर पहुंचकर उनका काम रुकवा दिया था. भारत डोकलाम मसले का शांतिपूर्ण समाधान की बात कह रहा है.

विदेश मंत्री ‘सुषमा स्वराज’ ने कहा था कि, इस मामले का समाधान बातचीत से ही हो सकता है. उधर, चीनी मीडिया और उसकी सेना के अधिकारी लगातार युद्ध की धमकी वाले बयान दे रहे हैं. इस बीच, जापान ने इस मुद्दे पर भारत को समर्थन देते हुए कहा है कि पूर्व की स्थिति को बदलने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए.

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