पटाखों को बैन करने के बाद जनता ने की ऐसी मांग कि SC को भी हो जायेगा अपने फैसले पर अफ़सोस

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9 अक्टूबर, 2017 – दिवाली हिन्दुओं का एक बड़ा त्यौहार है. जिसे धूमधाम से मनाया जाता है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसको प्रदूषण का कारण बताते हुए दिल्ली में दिवाली के मौके पर पटाखों को बैन कर दिया गया है.  

पटाखों को बैन करने के बाद जनता ने की ऐसी मांग कि SC को भी हो जायेगा अपने फैसले पर अफ़सोस
सर्वोच्च न्यायालय

देश में अब हिंदू त्योहारों को जमकर निशाना बनाया जा रहा है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी हिन्दुओं के खिलाफ फैसले देने शुरू कर दिए हैं. हमारे देश के वामपंथी सेक्युलर और विशेषकर जज तो बहुत पढ़े लिखे, मोटी डिग्री लिए, सभ्य लोग है.

इन जजों को तो सबसे पहले मिसाल कायम करनी चाहिए. जिससे कि जनता उसका अनुसरण कर सके. हिन्दुओं को ठेस पहुँचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली पर दिल्ली में पटाखों पर बैन लगा दिया, और इसका कारण प्रदूषण को बताया गया.

लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है क्योंकि प्रदूषण के कारण पटाखों पर बैन लगाया होता तो  सिर्फ 1 नवंबर तक ही थोड़ी रहता बल्कि पूरे साल पटाखों पर बैन रहता. जैसे क्रिसमस में, 31 दिसंबर पर, सभी पार्टियों में. लेकिन ये बैन तो सिर्फ दिवाली पर है मतलब सिर्फ दिवाली मनाने से ही प्रदूषण होता है.

पटाखों को बैन करने के बाद जनता ने की ऐसी मांग कि SC को भी हो जायेगा अपने फैसले पर अफ़सोस

दिवाली पर पटाखों के बैन के बाद देश की जनता अब भारत की सरकार से प्रदूषण पर बिलकुल सख्त होने की मांग कर रही है, और ये भी कह रही है कि प्रदूषण पर सख्त फैसले लिए जाने चाहिए. ताकि आम जनता में मिसाल भी कायम हो सके, और जनता के मन में रोष भी न हो.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जनता ने कर डाली ये मांग….

  1.  प्रदूषण को दूर करने के लिए सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट से शुरुवात होनी चाहिए, सुप्रीम कोर्ट के सभी AC को तुरंत हटा दिया जाये, AC के साथ फ्रिज भी हटाया जाए, क्योंकि इनसे ही ओजोन की ऐसी तैसी हो रही है.

2. कोर्ट के सभी जज जो अपनी गाड़ियाँ लेकर चलते हैं उन गाड़ियों को वापस ले लिया जाय तथा सभी जजों को उनके बंगलों से अदालत तक आने के लिए प्रदूषण रहित साइकिल दी जाये.

3. सभी जज अपने आलीशान बंगलों से एयर कंडीशन हटाएं, जिससे कि जनता को एक सन्देश जायेगा, ऐसा करके वे मिसाल कायम करे, इसके बाद एयर कंडीशन से ओजोन की ऐसी तैसी नहीं होगी.

4.  सुप्रीम कोर्ट से सभी फ्रिज भी हटाएं जाये, उस से भी ओजोन की ऐसी तैसी हो रही है. फ्रिज के ठंडे पानी की जगह कोर्ट में मिटटी के मटके का  पानी पीया जाय. इसके लिए मिट्टी के मटके रखे जाएँ.

5. प्रदूषण के खिलाफ और सख्ती करनी है तो, जजों के कमरों से पंखे भी हटाए जाएँ, उस से भी बिजली बर्बाद हो रही है.

प्रदुषण के खिलाफ इस अभियान की शुरुवात सभी सभ्य, अधिक पढ़े लिखे, बुद्धिजीवी है जजों और अदालतों से की जाये ताकि मिसाल कायम किया जा सके और जनता को प्रदूषण के खिलाफ लड़ने के लिए अच्छा सन्देश दिया जा सके. सिर्फ दिवाली पर पटाखे बैन करने से नहीं चलेगा. प्रदूषण फ़ैलाने के लिए जो जिम्मेदार हैं उन सभी को बैन करना होगा.

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