बहतु बड़ा खुलासा! ताजमहल असल में भगवान शिव का मंदिर ‘तेजोमहालय’ है! ये रहे इसके सबूत..

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26 अक्टूबर, 2017 – विश्व के सात अजूबों में शामिल ताजमहल एक हिंदू मंदिर है और अब इसके प्रमाण भी सामने आ चुके हैं. आईये, हम आपको बताते हैं इस हिंदू मंदिर का सच.

बहतु बड़ा खुलासा! ताजमहल असल में भगवान शिव का मंदिर 'तेजोमहालय' है! ये रहे इसके सबूत..

श्री पी.एन. ओक अपनी पुस्तक “Tajmahal is a Hindu Temple Palace” और “Taj Mahal: The True Story” में  आगरा के ताजमहल का सच पुरे विश्व के सामने रख दिया और 100 से भी अधिक प्रमाणों और तर्को का हवाला देकर साबित किया है कि ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर है जिसका असली नाम तेजोमहालय है.

प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी विसंगतियों को इंगित करते हैं जो शिव मंदिर के पक्ष में विश्वास का समर्थन करते हैं. प्रो. ओक के अनुसार ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है और शाहजहाँ के काल से आज भी ताजमहल के बहुत से कमरे बंद पड़े हैं, जो आम जनता की पहुँच से परे हैं और न ही इनकी कोई जाँच की गयी है.

बहतु बड़ा खुलासा! ताजमहल असल में भगवान शिव का मंदिर 'तेजोमहालय' है! ये रहे इसके सबूत..
ताजमहल के अन्दर पानी का कुआँ

प्रो. ओक. सच्चाई को सामने लाते हुए कहते हैं कि हिंदू मंदिरों में ही पूजा एवं धार्मिक संस्कारों के लिए भगवान् शिव की मूर्ति,त्रिशूल,कलश और ॐ आदि वस्तुएं प्रयोग की जाती हैं. ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी किभी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता,जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है,फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब? इस बात का तोड़ आज तक नहीं खोजा जा सका है.

उस समय लालची इंदिरा सरकार ने ओक की सभी पुस्तकें स्टोर्स से वापस ले लीं थीं और इन पुस्तकों के प्रथम संस्करण को छापने वाले संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां भी दी गईं थीं. प्रो. पी. एन. ओक के अनुसंधान को ग़लत या सिद्ध करने का केवल एक ही रास्ता है कि वर्तमान केन्द्र सरकार बंद कमरों को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण में खुलवाए, और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को छानबीन करने दे.

इस कथन को सिर्फ पी. एन. ओक. को छोड़ कर किसी ने कभी भी चुनौती नही दी कि “ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था” प्रो.ओक. अपनी पुस्तक “TAJ MAHAL – THE TRUE STORY” द्वारा इस बात में विश्वास रखते हैं कि सारा विश्व इस धोखे में है कि खूबसूरत इमारत ताजमहल को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था.

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ओक साफ़ तौर पर बताते हैं कि ताजमहल प्रारम्भ से ही बेगम मुमताज का मकबरा न होकर,एक हिंदू प्राचीन शिव मन्दिर है जिसे तब तेजो महालय कहा जाता था. अपने अनुसंधान के दौरान ओक ने खोजा कि इस शिव मन्दिर को शाहजहाँ ने जयपुर के महाराज जयसिंह से अवैध तरीके से छीन लिया था और इस पर अपना कब्ज़ा कर लिया था.

शाहजहाँ के समय में उनके दरबारी लेखक हुआ करते थे और इसी दरबारी लेखक “मुल्ला अब्दुल हमीद लाहौरी” ने अपने “बादशाहनामा” में मुग़ल शासक बादशाह का सम्पूर्ण वृतांत 1000 से ज़्यादा पृष्ठों मे लिखा है, जिसके खंड एक के पृष्ठ 402 और 403 पर इस बात का उल्लेख है कि, शाहजहाँ की बेगम मुमताज-उल-ज़मानी जिसे मृत्यु के बाद, बुरहानपुर मध्य प्रदेश में अस्थाई तौर पर दफना दिया गया था और इसके 6 माह बाद तारीख़ 15 ज़मदी-उल- अउवल दिन शुक्रवार,को अकबराबाद आगरा लाया गया फ़िर उसे महाराजा जयसिंह से लिए गए, आगरा में स्थित एक असाधारण रूप से सुंदर और शानदार भवन (इमारते आलीशान) मे पुनः दफनाया गया,लाहौरी के अनुसार राजा जयसिंह अपने पुरखों कि इस आली मंजिल से बेहद प्यार करते थे ,पर बादशाह के दबाव मे वह इसे देने के लिए तैयार हो गए थे.

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सदियों से बंद पड़े हैं ताजमहल के 22 रहस्यमयी दरवाजे

इस बात सबके सामने लेकर आने के लिए यहाँ ये बताना अत्यन्त आवश्यक है कि जयपुर के पूर्व महाराज के गुप्त संग्रह में वे दोनो आदेश अभी तक रक्खे हुए हैं जो शाहजहाँ द्वारा ताज भवन समर्पित करने के लिए राजा जयसिंह को दिए गए थे. शाहजहां की बेगम अर्जुमंद बानो (मुमताज) बुरहानपुर (म0प्र0) में 14वें बच्चे के जन्म के समय मरी. उसे वहीं दफना दिया गया था। फिर आगरा में उसकी कब्र कहां से आ गयी? और एक नहीं, दो कब्रें. एक ऊपर एक नीचे. एक को असली और दूसरी को नकली कहते हैं, जबकि वे दोनों ही नकली हैं.

मुस्लिम समाज में कब्र खोदना कुफ्र है, और शाहजहां यह काम कर अपनी बेगम को जहन्नुम में भेजना कैसे पसंद कर सकता था? इसी प्रकार ताजमहल का मूल नाम तेजोमहालय है, जो भगवान शंकर का मंदिर था. यह मुगलों के चाकर राजा जयसिंह के वीर पूर्वजों ने बनवाया था; पर शाहजहां ने दबाव डालकर जयसिंह से इसे ले लिया. फिर कुरान की आयतें खुदवा कर और नकली कब्रें बनाकर उसे प्रेम का प्रतीक घोषित कर दिया.

जहां शिवलिंग स्थापित था वहीं पर नकली कब्रें जानबूझ बनाई गयीं, ताकि भविष्य में भी उसे हटाकर कभी उसकी असलियत सामने न आ सके. ताजमहल में नीचे की ओर अनेक कमरे हैं, जो कि बरसों से बंद हैं और उन्हें खोला नहीं जाता. कहा जाता है कि वहां वे सब देव प्रतिमाएं रखी हैं, जिन्हें मंदिर से हटा दिया गया था. कार्बन डेटिंग के आधार पर इसे 1,400 साल पुराना बताया गया है, पर इस सच को सदा छिपाया जाता है. अब समय आ चुका है कि ताजमहल के अन्दर बंद कमरों में छानबीन शुरू की जाय और सच को उजागर किया जाय.

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