यूपी-गुजरात के बाद अब इस BJP शासित राज्य ने PM मोदी के ऐतिहासिक फैसले पर दी मंज़ूरी, अब पछता रहे हैं कांग्रेस राज्य वाले

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नई दिल्ली : अभी तक जात-पात और वोटबैंक के लालच के लिए तो कई बार आरक्षण दिया गया था लेकिन आज़ादी के बाद पहली बार पीएम मोदी ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के लिए भी आरक्षण लागू किया. अभी तक गुजरात,झारखडं, यूपी बीजेपी शासित राज्यों ने इसे लागू किया है लेकिन एक भी कांग्रेस शासित राज्य ने इसे लागू नहीं किया है. और वहीँ आज एक ओर बीजेपी शासित राज्य ने इस फैसले पर मुहर लगा दी है.

यूपी-गुजरात के बाद अब इस BJP शासित राज्य ने PM मोदी के ऐतिहासिक फैसले पर दी मंज़ूरी, अब पछता रहे हैं कांग्रेस राज्य वाले
जयराम ठाकुर : हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री

अभी मिल रही खबर के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण के लिए अध्यादेश से संबंधित प्रस्ताव पर राज्य कैबिनेट ने मुहर लगा दी है. ऐसा करने वाला यह चौथा राज्य बन गया है. हालांकि इसका क्राइटेरिया क्या होगा, इस पर बाद में फैसला लिया जाएगा. इससे पहले गुजरात, झारखंड और उत्तर प्रदेश में इस कानून को मंजूरी दी जा चुकी है.

NOTA दबाने वाले अब पछता रहे
कांग्रेस शासित राज्य इसे अभी लागू नहीं कर रहे हैं इसके पीछे बड़ी वजह लोकसभा चुनाव भी बताया जा रहा है क्यूंकि अगर वे इसे लागू करेंगे तो सीधा बीजेपी मोदी को बड़ा फायदा मिल जायेगा. इसीलिए सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस शासित राज्य ये तिकड़म लगा रहे हैं ओर भुगतना अब उस राज्य के स्वर्ण वर्ग को पड़ रहा है जिन्होंने बीजेपी मोदी को हराने के लिए NOTA दबाया था.

यूपी-गुजरात के बाद अब इस BJP शासित राज्य ने PM मोदी के ऐतिहासिक फैसले पर दी मंज़ूरी, अब पछता रहे हैं कांग्रेस राज्य वाले

सवर्ण वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकारी नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों में 10% आरक्षण देने के फैसले पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 जनवरी को मुहर लगाई थी. इसके बाद 8 जनवरी को लोकसभा में संविधान का 124वां संशोधन विधेयक 2019 पेश किया गया जहां लंबी बहस के बाद यह विधेयक लोकसभा में पास हो गया.

इसके अगले दिन यानी 9 जनवरी को राज्यसभा में इस संशोधन विधेयक को पेश किया गया और यहां भी यह विधेयक पास हो गया. संसद के दोनों सदनों से बिल पास होने के बाद इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भेजा गया जहां से भी इसे मंजूरी मिल गई.

बता दें कि यह 10% आरक्षण अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोगों को मिलने वाले 49.5 फीसदी आरक्षण से अलग होगा. आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को नौकरी और शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण देने वाले इस अधिनियम के तहत 8 लाख रुपये तक की वार्षिक आमदनी वालों को इस आरक्षण का लाभ प्राप्त होगा.

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इसके साथ ही इस आरक्षण का लाभ उन्हीं गरीब सवर्णों को मिलेगा जिनके पास 5 एकड़ से ज्यादा कृषि योग्य भूमि नहीं होगी. साथ ही इच्छुक व्यक्ति या उसके परिवार के पास 1 हजार स्क्वायर फीट से बड़ा घर नहीं होना चाहिए.

वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस व्यवस्था को लागू करने से इनकार कर चुकी हैं. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी सवर्ण गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए आए संविधान संशोधन विधेयक का खुले तौर पर विरोध करते हुए कहा था कि यह आरक्षण दलित, पिछड़ों और आदिवासियों को मिलने वाले आरक्षण को खत्म करने की साजिश है.

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