बेहद गंभीर मुद्दा! आखिर क्यों संयुक्त राष्ट्र रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर मुस्लिम देशों पर…

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नई दिल्ली : “रोहिंग्या शरणार्थियों” को लेकर ‘भारत’ के फैसले पर ‘संयुक्त राष्ट्र’ के उच्चायुक्त ने चौंकाने वाला बयान दिया है. जिस बयान के बाद देश में खलबली मच गई है, उच्चायुक्त ने इस तरह का बयान पहली बार दिया है.

बेहद गंभीर मुद्दा! आखिर क्यों संयुक्त राष्ट्र रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर मुस्लिम देशों पर...

“भारत” में अपना जीवन जी रहे ‘रोहिंग्या मुसलमान’ अपने रुख और मानव अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को धमकी मिलने के आरोप को लेकर ‘संयुक्त राष्ट्र’ की निंदात्मक टिप्पणी का ‘भारत’ ने कड़ा विरोध जताया है.

देश के स्थायी प्रतिनिधि राजीव के. चंदर ने संयुक्त राष्ट्र संघ में कहा है कि, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन के उच्चायुक्त ‘जीद राद अल हुसैन’ द्वारा की गई टिप्पणियों को लेकर हम आहत हैं.

 

बेहद गंभीर मुद्दा! आखिर क्यों संयुक्त राष्ट्र रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर मुस्लिम देशों पर...

साथ ही उच्चायुक्त ‘जीद राद अल हुसैन’ ने यह भी कहा था कि, मैं ऐसी स्थिति में रोहिंग्या मुसलमानों को उनके देश वापस भेजने के लिए ‘भारत’ द्वारा लिए जा रहे इन फैसलों की कड़ी निंदा करता हूं, अल हुसैन ने कहा है कि, जब म्यांमार में उन लोगों पर अत्याचार हो रहे हो.

इसके साथ-साथ अल हुसैन ने कहा यह भी कहा है कि, ‘भारत ‘में 40 हज़ार ‘रोहिंग्या मुसलमान’ शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं, इन लोगों में से सिर्फ 16 हजार रोहिंग्या मुसलमानों ने संयुक्त राष्ट्र से शरणार्थी प्रमाण-पत्र ले लिए हैं.

 

“म्यांमार” में इन रोहिंग्या मुसलमानों ने सैंकडो हिन्दुआें की हत्या की है, म्यांमार सरकार ने भी इन सभी रोहिंग्या मुसलमाआें को ‘इस्लामिक आतंक’ की तरह ही बताया है, क्या इस बात को उच्चायुक्त अल हुसैन नहीं जानते?

इन परिस्थिति में रोहिंग्या मुसलमानों को पनाह देने का मतलब ‘आतंकवाद’ को बढ़ावा देने जैसा नहीं है? संयुक्त राष्ट्र को केवल ‘म्यांमार’ में रोहिंग्या शरणार्थियों पर किया जा रहे अत्याचार ही नज़र आ रहे हैं परंतु पहले से देश के हिस्सा कश्मीरी हिन्दुआें पर जब अत्याचार हुए तो इस बारे में संयुक्त राष्ट्र ने कभी इस प्रकार की कोई आवाज क्यों नही उठार्इ?

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रोहिंग्या मुसलमानों के लिए संयुक्त राष्ट्र को अगर इतनी हमदर्दी है तो वह विश्व में 50 से भी ज्यादा मुस्लिम राष्ट्र हैं, वहाँ पर इन ‘रोहिंग्या मुसलमानों’ को पनाह देने के लिए क्यों नहीं बोलते हैं.

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