नियमित रूप से रामायण पढ़ने वाले बुंदेलखंड के इस गांव में लोगों ने बताया सबसे बड़ा राज!

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टीकमगढ : “हिन्दुत्व” को लेकर ‘बुंदेलखंड’ के ‘टीकमगढ़’ जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. इस खबर को जानने के बाद आप थोड़ा अचंभे में आ सकते हैं. जानकारी के अनुसार पता चला है कि टीकमगढ़ के नंदनपुर (गोर) में एक ऐसा गांव है, जहाँ न तो किसी पुलिस की आवश्यकता है और न ही किसी चोर का डर है. इन सब बातों का यही बड़ा कारण है कि इस गांव के लोग बाहर जाने पर भी अपने घरों में ताले लगाना जरुरी नहीं मानते.

नियमित रूप से रामायण पढ़ने वाले बुंदेलखंड के इस गांव में लोगों ने बताई सबसे सच्चीई
नंदनपुर गांव

रिसर्च तकनीक को लोगों ने अपना रखा है 

सूत्रों से जानकारी के अनुसार पता चला है कि टीकमगढ़ जिले के ‘मोहनगढ’ थाने के अनुसार इस गांव में लगभग 50 घर हैं और इनमें रहने वाले लोगों की संख्या लगभग 300 के आसपास है. यहां के हर एक घर में बोरवेल मौजूद है. इस गांव में रहने वाले लोगों नेरिसर्च तकनीक को अपना रखा है, जिससे वजह के जल को लेकर कोई भी परेशानी नहीं होती है. साथ ही इस गांव की फसल की पैदावार भी बहुत अच्छी है. यहां पर शराब और मांस पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है. पिछले कई सालों से इस गांव को किसी भी तरह से पुलिस की जरुरत नहीं पड़ी.

नंदनपुर गांव के ‘भागीरथी यादव’ (65) ने जानकारी देते हुए कहा है कि पूर्वजों से सुना और उन्होंने स्वयं खुद देखा है कि उनके गांव में कभी झगड़ा किसी बात को लेकर किसी तरह का कोई भी झगडा नहीं हुआ, यदि कभी छोटा-मोटा झगडा हो भी जाता है तो उसको गांव के लोग आपस में मिलकर सुलझा लेते हैं और गांव में कोई भी शराब नहीं पीता है, इतना ही नहीं यहां मुर्गी-मुर्गा पालने से लेकर अंडा का भी प्रयोग नहीं होता है. 

नियमित रूप से रामायण पढ़ने वाले बुंदेलखंड के इस गांव में लोगों ने बताई सबसे सच्चीई

यादव ने कहा है कि झगडे की सबसे बड़ी परेशानी शराब है.इस गांव में पीढियों से चली आ रही परंपरा यह है कि यहां कोई भी शराब नही पीता और आगे भी ऐसा ही चलता रहेगा और न ही मांस का सेवन करता. इस गांव के सभी लोगों का जोर खेती पर है. बुंदेलखंड सूखा ग्रस्त है, लेकिन फिर भी यहां पर पनी की परेशानी नहीं है, फसलों की खेती भी आसानी से हो रही है क्योंकि गांव के लोगों ने रिसर्च करने की तकनीक को अपनाया है.

नंदनपुर गांव की एक बुजुर्ग महिला ‘विमला देवी’ (60) ने भही जानकारी देते हुए कहा है कि इस गांव में न ही कोई शराब पीता है और न  ही कोई मांस खाता है. इस गांव में महिलाओं से साथ किसी तरह की कोई भी परेशानी नहीं होती और यहां का माहौल शांत बना रहता है. इस गांव में न तो कोई छेड़छाड़ और न ही कोई झगडा होता. नजदीक के गांव के भले ही ऐसा होता होगा परंतु यहां ऐसा नहीं होता. 

नियमित रूप से रामायण पढ़ने वाले बुंदेलखंड के इस गांव में लोगों ने बताई सबसे सच्चीई

विमला देवी ने कहा है कि यह गांव ऐसा है जहां पर पुलिस की जरुरत नहीं होती. जब भी लोग अपने घर से बाहर जाते हैं तो दरवाजे पर ताला लगाना जरुरी नहीं मानते. इसका बड़ा कारण यह है कि यहां पर कोई बदमाश प्रवृत्ति का है ही नहीं. इसलिए चोरी का कोई खतरा नहीं है. 

पूर्वजों द्वारा मिले संस्कारों का है यह असर

मोहनगढ थाने के प्रभारी ‘गिरिजा शंकर वाजपेयी’ ने जानकारी देते हुए कहा है कि हाल ही में मेरी यहां पर पदस्थापना हुई है, यह एकदम सच है कि इस गांव में विवाद कम होते हैं. लगभग 2 साल पहले 2016 में यहां केवल एक झगड़े का मामला सामने आया था.

नियमित रूप से रामायण पढ़ने वाले बुंदेलखंड के इस गांव में लोगों ने बताई सबसे सच्चीई

इसके आगे इस गांव के युवा ‘हरी सिंह (30) ने कहा है कि हमारे पूर्वजों द्वारा दिए गये संस्कारो का असर यहां के हर एक वर्ग पर है. इस गांव में लोग नियमित रुप से ‘रामायण’ पढते हैं. साथ ही पढ़ाई पर भी ध्यान दिया जाता है. यहां के लोगों में आपसी भाईचारा बना हुआ है. यहां न तो चोरी होती है और न ही आज तक डकैती हुई. आज के समय में ऐसा होता है कि लोग दूसरे को बताकर अपने घर में बगैर ताले लगाए बाहर चले जाते हैं.

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