16 दिसंबर से शुरू हुआ खरमास! भगवान सूर्यदेव करते हैं ब्रह्मांड की परिक्रमा, नहीं करने चाहिए ये कार्य…

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Karmashas started from December 16th! Lord Sun God performs the orbiting of the universe, should not do this work (18 दिसंबर, 2018) : हिन्दू मान्यताओं के अनुसार 16 दिसंबर से ‘खरमास’ का महीना शुरू हो गया है. इस महीने को मलमास के नाम भी जाना जाता है. ज्योतिष की माने तो जब भी ‘भगवान सूर्यदेव’ गोचर करते हुए धनु और मीन राशि में जाते हैं तब उन महीनों को ‘मलमास’ कहा जाता है. ज्योतिष ने यह भी कहा है कि यह अवधि शुभ नहीं मानी जाती है. हालांकि इस समय सूर्य वृश्चिचक राशि को छोड़कर धनु राशि में प्रवेश करते हैं. मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की नवमी से मलमास शुरू हो जाएगा और 14 जनवरी 2019 पौष शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि तक रहेगा.

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भगवन सूर्यदेव

आपको बता दें कि इस अवधि में ‘भगवान सूर्यदेव’ सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ‘ब्रह्मांड’ की परिक्रमा करते हैं. कहा जाता है कि इस अवधि के दौरान एक बार उनके घोड़े लगातार चलने और विश्राम न मिलने की वजह से भूख-प्यास से बहुत थक गए थे. तब भगवान सूर्यदेव उन्हें एक तालाब के किनारे ले गये, परंतु उन्हें तभी यह भी आभास हुआ कि अगर रथ रूका तो अनर्थ हो जायेगा. लेकिन तालाब के किनारे दो गधे मौजूद थे.

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राशिफल

साथ ही यह भी कहा गया है. भगवान सूर्यदेव घोड़ों को पानी पीने व विश्राम देने के लिये छोड़ देते हैं और गधों को अपने रथ में जोड़ लेते हैं. उनके ऐसे करने के कारण रथ की गति धीमी हो जाती है फिर भी जैसे तैसे एक मास का चक्र पूरा होता है तब तक घोड़ों को भी विश्राम मिल चुका होता है इस तरह यह क्रम चलता रहता है और हर ‘सौर वर्ष’ में एक सौर मास खरमास कहलाता है.

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आगे कहा गया है कि इस महीने भगवान सूर्यदेव के रथ को घोड़ों की जगह गधे खिंचते हैं. रथ की गति धीमी होने की वजह ही इस मास में अत्यधिक सर्दी भी पड़ती है. शास्त्रों की माने तो इस दौरान कुछ कार्य नहीं करने चाहिए.

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मलमास में ये कार्य हैं वर्जित

1 – इस पूरे महीने तक विवाह, सगाई, ग्रह-प्रवेश जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए.

2 – वहीं दूसरी और नई चीजें जैसे नया घर, नई कार की खरीददारी भी नहीं करनी चाहिए.

3 – खरमास के समय किसी से विवाद करने से बचना चाहिए और अपने गुरुओं और बड़ों का आदर करना चाहिए.

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