इतिहास में पहली बार नासा करने जा रहा है सूर्य अभियान! सूर्य पर जाने वाला होगा यह पहला यान

145

नई दिल्ली : अभी-अभी ‘अमेरिका’ की अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ से शानदार खबर आई है. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पता चला है कि नासा का सूर्य अभियान अपनी तैयारी के अंतिम चरणों पर है. जानकारी के अनुसार सूर्य अभियान के लिए जो यां तैयार किया जा रहा है उसका नाम ‘पार्कर सोलर प्रोब’ है.

इतिहास में पहली बार नासा करने जा रहा है सूर्य अभियान! यह सूर्य पर जाने वाला होगा पहला यान
पार्कर सोलर प्रोब

खबर मिली है कि नासा 31 जुलाई को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से अपने यान को लांच करेगा. इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब कोई सूर्य के वातावरण में प्रवेश करेगा.

सूत्रों से जानकारी के अनुसार यह यान सात सालों तक अपने अभियान में सूर्य के बाहरी वातावरण को खंगालने का कार्य करेगा और वैज्ञानिकों के उन सवालों के जवाब ढूंढने का प्रयास करेगा, जिनमें दशकों से वैज्ञानिक उलझे हुए हैं. साथ ही नासा ने उन लोगों के नाम की सूची मांगी है जो इस यान के साथ जायेंगे. जिससे उनका नाम सूर्य को छूकर आये.

इतिहास में पहली बार नासा करने जा रहा है सूर्य अभियान! यह सूर्य पर जाने वाला होगा पहला यान

अभियान का लक्ष्य बहुत ही खास है

– सौर आंधी के स्रोतों को लेकर उपस्थित चुंबकीय इलाके की बनावट और इनके डायनामिक्स की जाँच करना.

– यह यां सूर्य की सतह (कोरोना) को गर्म करने वाली और सौर तूफानों को गति देने वाली ऊर्जा के बहाव को भी           समझने का कार्य करेगा. 

– साथ ही इस यान का लक्ष्य यह जानना है कि सूर्य के वातावरण से उत्सर्जित होने वाले ऊर्जा कणों को कैसे गति         प्राप्त होती है. 

– इसके अलावा सूर्य के नजदीक मौजूद धूल प्लाज्मा को खंगालेगा और सौर आंधी और सौर ऊर्जा कणों को लेकर         उनके असर को समझेगा.

 

इतिहास में पहली बार नासा करने जा रहा है सूर्य अभियान! यह सूर्य पर जाने वाला होगा पहला यान
कोरोना

यान को लेकर सुरक्षा का पूरी तैयारी

सूत्रों से जानकारी के अनुसार यान के आगे कार्बन फाइबर और ग्रेफाइट (ठोस कार्बन) से बनाई गई ढाल लगी है. इस ढाल का नाम ‘थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम’ है और यह सूर्य की ऊर्जा से यान की रक्षा करेगी. जानकारी के अनुसार 11.4 सेमी मोटी है, जो यान के बाहर 1370 डिग्री सेल्सियस का तापमान झेल पाएगी. जानकारी के अनुसार सूर्य अभियान पर जाने वाले सभी वैज्ञानिक उपकरण और यान का संचालन तंत्र इस ढाल के पीछे छुपे रहेंगे, ताकि सूर्य का प्रकाश सीधा उन पर न पड़े. इसके अलावा इसमें थर्मल रेडिएटर नाम के खास ट्यूब लगी होंगी जो यान में आने वाली सूर्य की ऊष्मा को यान से निकालकर अंतरिक्ष में फेंक देंगे, जिससे ऊष्मा उपकरणों तक न पहुंच पाये. 

इतिहास में पहली बार नासा करने जा रहा है सूर्य अभियान! यह सूर्य पर जाने वाला होगा पहला यान

यान को डेल्टा-4 नाम के रॉकेट से प्रक्षेपित किया जायेगा

साथ ही सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा है कि यान को ‘डेल्टा-4 हेवी’ नाम के रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा. साथ ही खबर मिली है कि इस अभियान में 6 वर्ष 321 दिन का समय लगेगा. इसके आगे यह भी जानकारी दी है कि यान ‘बुध ग्रह’ की कक्षा में ही रहेगा जो सूर्य के वातावरण में आती है. इस यान में चार ऐसे उपकरण भेजे जाएंगे जो सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र, प्लाज्मा और ऊर्जा कणों का परीक्षण कर इनकी 3डी तस्वीर को बनाएगा. जानकारी के अनुसार पहले इस यां का नाम ‘सोलर प्रोब प्लस’ था, जिसको साल 2017 मई में बदलकर खगोलशास्त्री ‘इ्यूजीन पार्कर’ के नाम पर ‘पार्कर सोलर प्रोब’ कर दिया.

इतिहास में पहली बार नासा करने जा रहा है सूर्य अभियान! यह सूर्य पर जाने वाला होगा पहला यान
इ्यूजीन पार्कर

सूत्रों ने आगे की जनकारी देते हुए कहा है कि जब यान सूर्य के नजदीक पहुंच जायेगा तो इसकी रफ़्तार 192 किमी/ सेकंड हो जाएगी. ऐसा होने के बाद यह सर्वाधिक गति वाला मानव निर्मित उपकरण बन जाएगा. जो एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड होगा. दरअसल यह उपलब्धि ‘बृहस्पति’ की कक्षा में स्थापित नासा के शोधयान ‘जूनो’ के नाम है. 4 जुलाई 2016 को बृहस्पति की कक्षा के गुरुत्वाकर्षण से इसकी रफ्तार 2.65 लाख किमी/घंटा हो गई थी.

Loading...