पेड़ों की छांव तले रचना पाठ की 49वीं गोष्ठी के अंतर्गत “ कवयित्री रचना पाठ 2018” हुआ संपन्न

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गाज़ियाबाद : मनोरम “सेंट्रल पार्क” सेक्टर-4 वैशाली में पेड़ों की छांव तले रचना पाठ की 49वीं गोष्ठी के अंतर्गत “ कवयित्री रचना पाठ 2018” संपन्न हुआ व फाउंडेशन दिवस मनाया गया। महिला रचनाकारों की रचनाधर्मिता में नारी विमर्श व ममत्व के भाव को दर्शाती “नारी अस्मिता व शक्ति स्वरूपा” विषय को समेटती हुई गजल दोहे गीत कविताओं का दौर देर शाम तक अनवरत चला ।

पेड़ों की छांव तले रचना पाठ की 49वीं गोष्ठी के अंतर्गत “ कवयित्री रचना पाठ 2018” हुआ संपन्न

मुख्य अतिथि के रूप में हिन्दी के वरिष्ठ कवियत्री मृदुला प्रधान रहीं उन्होने अपनी कविता में आज के नफरत को खारिज करते हुए कहा “ बहरहाल..मैं एहसासों को लिखती हूँ, अनुभूतियों को लिखती हूँ, भावनाओं को लिखती हूँ, न कोई धमाका, न सनसनी, न विस्फोट, सहज-सरल बातें, यहाँ-वहाँ से उठाकर, रस-गंध से सजाकर, फूल-पत्तों पर रख देती हूँ ..”

गोष्ठी का भाव पूर्ण सफल संचालन कवियत्री लेखिका आरती स्मित ने किया और माँ शीर्षक पर पढ़ा “माँ जानती है सबकुछ!  मेरे हँसने- रोने, उदास होने, खिलखिलाने और मौन के गर्भ में समा जाने का राज़! माँ जानती है सबकुछ!…..। काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवयित्री डॉ भावना शुक्ला ने दोहों मे अपनी बात कही “अपने सभ्य समाज में  फ़ैल गया है रोग। नारी की चिंता नहीं, चिंतन करते लोग  व लड़की ने जीवन जिया, ज्यों जीता खरगोश। आशंका की आहटें , उड़ा गई है होश और वाहवाही लूटी ।

पेड़ों की छांव तले रचना पाठ की 49वीं गोष्ठी के अंतर्गत “ कवयित्री रचना पाठ 2018” हुआ संपन्न
कवयित्री डॉ भावना शुक्ला

दोहों की सशक्त कवियत्री डॉ अंजूसुमन साधक ने तंज़ कसते हुए पढ़ा “बिछा रही हैं ख़ुदी को, जैसे हों कालीन। नहीं दीखतीं मंच पे, कवयित्री शालीन।। व किसने जानी है यहाँ , भावुक मन की टीस। मनोचिकित्सक माँगते, पहले अपनी फ़ीस । वहीं डॉ गीता गंगोत्री ने अपनी पीड़ा व्यक्त की “कैसे जीऊँ मैं बिन उसके अब, या रब्बा पिंजरे मे है सारी हवाऐं, या रब्बा । जिसने दिल के टुकड़े का ,टुकड़ा है किया, बेखौफ शहर में घूम रहे रहे क्यों, या रब्बा । अंगिका की चर्चित सुप्रिया सिंह वीणा ने साहस बढ़ाया “हर एक कदम साधती हुशियार लड़कियां हर मुश्किलों को काटती हथियार लड़कियां” गजल से माहोल को मजबूत किया ।

इसी क्रम में कवियत्री पूनम कुमारी ने अपनी कविता माँ को व्यक्त किया “सम्पूर्ण मानवता को माँ तुझपे है अभिमान ,जगत ये जीवंत, जीवन तुमसे ही गतिमान.. व अनीता सिंह ने मिताली वर्मा द्वारा लिखी व्यंग रचना बात को पढ़ा “रूढ़िवादी सोच रखते है पर हम महिला सशक्तिकरण की बात करते है, झूठ के पुलिन्दे है फिर भी सच्चाई की बात करते हैं. हम सुबह शाम सिफॆ बात ही करते है, खुद की खबर नही पर देश- दुनिया की बात करते है … इसके अतिरिक्त नवोदित रचनाकारा सविता भण्डारी ने मोहब्बत के बदले ताजमहल को नफरत और नृशंशता का अजूबा कहा ।

पेड़ों की छांव तले रचना पाठ की 49वीं गोष्ठी के अंतर्गत “ कवयित्री रचना पाठ 2018” हुआ संपन्न

इस अवसर पर अक्तूबर 2014 से प्रारम्भ हुए इस कार्यक्रम का स्थापना दिवस व सुप्रिया सिंह वीणा की पुस्तक “ अंगिका के रो लोकोत्ति “ का लोकार्पण भी सम्पन्न हुआ जिसमें कहानी कार शशिकांत सुशांत , कवि सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा , कवि देवेन्द्र कुमार देवेश , अनीता पंडित , रजदेव प्रसाद , सत्य सनातन आदि ने अपनी भूमिका निभाई । देर शाम तक चली गोष्ठी में गीतों, कविताओं और गजलों ने कविता को नयी बुलंदियों से स्पर्श कराया। सभी प्रतिभागियों को साहित्य के लिए मिशन प्रकृति [ मिशन नेचर टु लिटरेचर ] से जुडने का प्रमाण पत्र भी दिया गया जिसका संचालन कवि संयोजक अवधेश सिंह ने किया ।

इस अवसर पर प्रकाशक शिवानंद तिवारी , उपेंद्र भण्डारी , भीष्म दत्त शर्मा , संगीता अरोड़ा ,नरेंद्र मिश्रा , एस के कपूर , उमाशंकर , अविनाश गुप्ता , एस पी त्यागी , एल एस राघव , बल किशन आदि आदि प्रबुध श्रोताओं ने रचनाकारों के उत्साह को बढ़ाया ।

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