साहित्य अकादमी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर किया गया ‘बहुभाषी कवि सम्मलेन’ का आयोजन

124

नई दिल्ली, 22 फरवरी 2018 : साहित्य अकादमी द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर कल एक बहुभाषी कवि सम्मलेन आयोजित किया गया। बहुभाषी कवि सम्मिलेन में 23 भारतीय भाषाओं के कवियों को आमंत्रित किया गया था। प्रख्यात डोगरी कवयित्री पद्मा सचदेव ने इस सम्मिलन का उद्घाटन किया।

साहित्य अकादमी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर किया गया 'बहुभाषी कवि सम्मलेन' का आयोजन
बहुभाषी कवि सम्मलेन

अपने उद्घाटन वक्तव्य में उन्होंने मातृभाषा की सुरक्षा को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने इस बात पर दुख भी प्रकट किया कि आज की नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा को प्रयुक्त नहीं कर रही है, जिसके कारण उनके लुप्त होने का ख़तरा बढ़ता ही जा रहा है। डोगरी के प्रख्यात कवि दीनू भाई पंत की पंक्ति को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि डोगरी हमारी माँ है तो हिंदी हमारी दादी। उन्होंने डोगरी में अपनी कविताएँ प्रस्तुत कीं और कुछ डोगरी कविताओं के हिंदी अनुवाद भी प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के प्रारंभ में साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवास राव ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि मातृभाषा से हमारी सांस्कृतिक पहचान बनती है और वह ही हमारी संस्कृति और संस्काररों की संवाहक है। साहित्य अकादेमी 24 भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त अन्य वाचिक और क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहती है।

साहित्य अकादमी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर किया गया 'बहुभाषी कवि सम्मलेन' का आयोजन

बहुभाषी कवि सम्मलेन में सभी कवियों ने एक कविता अपनी मूल भाषा में प्रस्तुत कीं और अन्य कविताओं के हिंदी या अंग्रेज़ी अनुवाद प्रस्तुत किए। कविता-पाठ करने वाले कवि/कवयित्री थे – जीबन नारा (असमिया), देवकांत रामचियारी (बोडो), गणेश बिसपुते (मराठी), अनामिका (हिंदी), तहसीन मुनव्वर (उर्दू), सुजाता चैधरी (ओड़िया), मोहन हिमथाणी (सिंधी), प्रतिभा नंद कुमार (कन्नड), मालचंद तिवाड़ी (राजस्थानी), हरीश मीनाश्रु (गुजराती), अरिबम मेम्चोबी (मणिपुरी), फेलोमिना सेम्फ्रांसिस्को (कोंकड़ी), उत्तम कुमार क्षेत्री (नेपाली), वनीता (पंजाबी), याकूब (तेलुगु), अनीता थम्पी (मलयाळम्), रमन कुमार सिंह (मैथिली), रवि सुब्रमण्यन (तमिऴ), गोबिंद चंद्र माझी (संताली) और रमाकांत शुक्ल (संस्कृत)।

आपको बता दें कि कार्यक्रम का संचालन साहित्य अकादेमी के संपादक (हिंदी) अनुपम तिवारी ने किया। इस मौके पर पद्मा सचदेव ने मातृभाषा के सम्मान में कहा कि “मातृभाषा हमारी माँ के समान है और उसकी सुरक्षा करना हमारा कर्तव्य है”।

loading...