साहित्य अकादमी पुरस्कार 2018 : 24 भारतीय भाषाओं के लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार से किया गया सम्मानित

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नई दिल्ली : साहित्य अकादेमी अपने वार्षिक उत्सव ‘साहित्योत्सव 2019’ को मना रही है. इस समारोह के दुसरे दिन साहित्य अकादेमी पुरस्कार 2018 के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया. यह पुरस्कार अर्पण कमानी सभागार में आयोजित किया गया.

साहित्य अकादमी पुरस्कार 2018 : 24 भारतीय भाषाओं के लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार से किया गया सम्मानित
श्रीनिवास राव : साहित्य अकादमी के सचिव

इस मौके पर प्रख्यात ओड़िया लेखक और साहित्य अकादेमी के महत्तर सदस्य मनोज दास समारोह के मुख्य अतिथि रहे तथा प्रख्यात श्रीलंकाई लेखक और साहित्य अकादेमी के प्रेमचंद फेलोशिप से सम्मानित सांतन अय्यातुरै समारोह के विशिष्ट अतिथि रहे. ये पुरस्कार साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष चंद्रशेखर कबार द्वारा प्रदान किये गए.

साहित्य अकादमी पुरस्कार 2018 : 24 भारतीय भाषाओं के लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार से किया गया सम्मानित

पुरस्कृत लेखकों में सनंत तांति (असमिया), संजीव चट्टोपाध्याय (बाड़ला), रितुराज बसुमतारी, (बोडो), इंदरजीत केसर (डोगरी), शरीफा विजलीवाला (गुजराती), चित्र मुद्गल (हिंदी), के. जी. नागराजप्प (कन्नड़), मुस्ताक अहमद मुश्ताक (कश्मीरी), परेश नरेन्द्र कामत (कोंकणी), वीणा ठाकुर (मैथिलि), एम. रामेशन नायर (मलयालम), बुधिचंद्र हैस्नाम्बा (मणिपुरी), मधुकर सुदाम पाटिल (मराठी), लोकनाथ उपाध्याय चापागाई (नेपाली), मोहनजीत सिंह (पंजाबी), राजेश कुमार व्यास (राजस्थानी ), रमाकांत शुक्ल (संस्कृत), श्याम बेसरा (संताली), खीमन यू मूलाणी (सिन्धी), एस. रामकृष्णन (तमिल), कोलकलुरी इनाक, तेलुगु) एवं रहमान अब्बास (उर्दू) थे. 

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इस समारोह में अंग्रेजी एवं ओड़िया के पुरस्कृत लेखकों को छोड़कर सभी रचनाकारों को साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष द्वारा सम्मानित किया गया. सम्मान में ताम्रफल और एक लाख रूपये की राशि का चेक भेंट किया गया. अंग्रेजी एवं ओड़िया के लेखक अस्वस्थता के कारण समारोह में उपस्थित नहीं हो सके.

अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में साहित्य के अध्यक्ष चंद्रशेखर कम्बार ने कहा कि साहित्य अकादेमी पुरस्कारों ने जो प्रतिष्ठा प्राप्त की है वो हमारी परम्पराओं के प्रति वो निष्ठा है जो हमने वर्षों के परिश्रम से हासिल की है. भारत की सांस्कृतिक विविधता ही प्रेरक तत्व है जो हमें एक दुसरे के प्रति संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करती है. भूमंडलीकरण के इस समय में हमारी भाषाई विविधता को बचाई रखने के लिए साहित्य की आवश्यकता और उसका सम्मान किया जाना जरुरी है.

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चंद्रशेखर कम्बार

साहित्य अकादेमी के इस विविधता का सम्मान किया जाना जरुरी है. साहित्य अकादेमी ने इस विविधता का सम्मान अनुवाद के जरिये भी किया है. सहित्य अकादेमी बेहतर अनुवादों के लिए भी जानी जाती है. हमारी पहचान अपनी जड़ों में जुड़े रहने में ही है और मैं भी इसी पहचान का सम्मान करता हूँ.

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पुरस्कार अर्पण समारोह के मुख्य अतिथि मनोज दास ने कहा कि साहित्य अकादेमी हमारा गौरव है. अकादेमी पुरस्कार कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक का सम्मान है और यह हमारी पूरी संस्कृति परम्परा का सम्मान है जो रामायण, महाभारत, पंचतंत्र से लेकर, राजतरंगिणी और कालिदास तक की विरासत की वाहक है. विशिष्ट अतिथि संतान अय्यातुरै ने कहा कि श्रीलंका का साहित्य भारतीय साहित्य परम्परा से प्रभाव और प्रेरणा ग्रहण करता है तथा इस समारोह में उपस्थित होना मेरे लिए गौरव की बात है.

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धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अकादेमी के उपाध्यक्ष माधव कौशिक ने कहा कि पुरस्कृत सभी लेखकों की यह महत्वपूर्ण विशिष्टता है कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से आम जनता की आवाज को मुखर करते हैं. कार्यक्रम के आरम्भ में औपचारिक स्वागत करते हुए अकादेमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने अकादेमी की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए भारतीय साहित्य की व्यापकता और विविधता को रेखांकित किया. उन्होंने पुरस्कृत लेखकों की प्रशस्ति का पाठ भी किया.  समारोह के बाद पद्म विभूषण से अलंकृत प्रख्यात नृत्यांगना व विदुषी सोनल मानसिंह द्वारा नाट्य कथा : कृष्णा का मंचन किया गया.

–सागर कुमार 

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