साहित्य अकादमी : ‘कथासंधि’ कार्यक्रम में उर्दू की कथालेखिका एवं कवयित्री डाॅ. तरन्नुम रियाज़ के कहानी-पाठ का हुआ आयोजन

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नई दिल्ली : साहित्य अकादमी द्वारा ‘कथासंधि’ कार्यक्रम के अंतर्गत उर्दू की लब्धप्रतिष्ठ कथालेखिका एवं कवयित्री डाॅ. तरन्नुम रियाज़ के कहानी-पाठ का आयोजन अकादमी सभागार में किया गया। आरंभ में अकादमी के सचिव डाॅ. के. श्रीनिवासराव ने पुस्तक भेंट देकर उनका अभिनंदन किया तथा विशेष कार्याधिकारी डाॅ. देवेंद्र कुमार देवेश ने उनका संक्षिप्त परिचय देते हुए सभी का स्वागत किया और डाॅ. रियाज़ को कहानी-पाठ के लिए आमंत्रित किया।

साहित्य अकादमी : ‘कथासंधि’ कार्यक्रम में उर्दू की कथालेखिका एवं कवयित्री डाॅ. तरन्नुम रियाज़ के कहानी-पाठ का हुआ आयोजन

डाॅ. तरन्नुम रियाज़ ने कहानी-पाठ के पूर्व अपनी रचना-यात्रा पर संक्षेप में प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कविता और कहानी लिखना उन्होंने लगभग एक साथ ही शुरू किया। लेकिन कहानी उनकी पहली मुहब्बत है। उन्होंने कहा कि उनकी पहली ही कहानी विवादास्पद हो गई थी, क्योंकि उसमें ज़ुल्मो-सितम सहती हुई एक औरत द्वारा वैवाहिक संबंध-विच्छेद के विषय को उठाया गया था।

कार्यक्रम में उन्होंने अपनी ताज़ा कहानी ‘रेश-ए सितम केश’ का पाठ किया, जिसमें स्त्री-पुरुष संबंधों की पड़ताल करते हुए उनके मन की अनुभूतियों को बारीकी से उकेरा गया था। एक प्रोफेसर की पत्नी यह नहीं चाहती कि उसके पति हसीनाओं के जाल में फँसें, इसलिए वह उन्हें दाढ़ी रखने की सलाह देती है, जो उन्हें बहुत नागवार गुजरती है।

साहित्य अकादमी : ‘कथासंधि’ कार्यक्रम में उर्दू की कथालेखिका एवं कवयित्री डाॅ. तरन्नुम रियाज़ के कहानी-पाठ का हुआ आयोजन
डाॅ. तरन्नुम रियाज़

लेकिन पहली बार अपने नए चेहरे को मजबूरी में ओढ़े हुए तमाम शंकाओं के साथ प्रोफेसर साहब काॅलेज पहुँचते हैं, तो जो वाकयात पेश आते हैं, उनके कारण उनके भीतर से एक नई शख्सियत उभरकर सामने आती है। कहानी को अपने मुकाम तक पहुँचाने में जिस भाषा-कौशल का परिचय डाॅ. तरन्नुम रियाज़ ने दिया, उसकी सभी ने मुक्त स्वर में प्रशंसा की।

कहानी-पाठ के डाॅ. तरन्नुम रियाज़ ने प्रबुद्ध श्रोताओं के सवालों के जवाब भी दिए। इस अवसर पर प्रो. रियाज़ पंजाबी, डाॅ. फरियाद आज़र, प्रो. शहज़ाद अंजुम, डाॅ. इफ्तिख़ार ज़मान, डाॅ. अबु ज़हीर रब्बानी, डाॅ. शहनाज़ रहमान, डाॅ. सुहैल अनवर, डाॅ. परवेज़ अनवर, सुश्री रेहाना सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

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