कब, क्यों और कैसे मनाएं होली ? विभिन्न राशि वाले कैसे करें पूजा?

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12 मार्च 2017 को सूर्यास्त के बाद 1 घण्टा 52 मिनट तक होलिका दहन का मुहूर्त है. सायं 6 बजकर 31 से रात्रि 8 बजकर 23 मिनट तक होलिका का पूजन कर सकते हैं. इसी मुहर्त में अग्नि प्रज्ज्वलित करें. इसके पश्चात नरसिंह भगवान का स्मरण करते हुए उन्हें रोली, मौली, अक्षत, पुष्प अर्पित करें. इसी प्रकार भक्त प्रह्लाद को स्मरण करते हुए उन्हें रोली, मौली, अक्षत, पुष्प अर्पित करें.

इसके पश्चात् हाथ में असद, फूल, सुपारी, पैसा लेकर पूजन कर जल के साथ होलिका के पास छोड़ दें और अक्षत, चंदन, रोली, हल्दी, गुलाल, फूल तथा गूलरी की माला पहनाएं. विधि पंचोपचार की हो तो सबसे अच्छी है. पूजा में सप्तधान्य की पूजा की जाती है जो की गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर है. होलिका के समय नयी फसले आने लग जाती है अत: इन्हे भी पूजन में विशेष स्थान दिया जाता है. होलिका की लपटों से इसे सेक कर घर के सदस्य खाते हैं और धन एवं समृधि की विनती की जाती है. होलिका के चारो तरफ तीन या सात परिक्रमा करे और साथ में कच्चे सूत को लपेटे.

होलिका पूजन के समय निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:

“अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम:”

इस मंत्र का उच्चारण एक माला, तीन माला या फिर पांच माला विषम संख्या के रुप में करना चाहिए.

होलिका दहन मुहूर्त =18:31 से 20:23
अवधि = 1 घण्टा 52 मिनट्स
भद्रा पूँछ = 04:11 से 05:23
भद्रा मुख = 05:13 से 07:23
रंगवाली होली 13th, मार्च को
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ = 11/मार्च/2017 को 20:23 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त = 12/मार्च/2017 को 20:23 बजे

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