गुजरात चुनाव 2017: आखिर कांग्रेस फिर क्यों हारी गुजरात? जानिए कांग्रेस की ये 5 बड़ी गलतियाँ..

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19 दिसंबर, 2017 – गुजरात में अपनी पूरी ताकत झोंकने के बाद भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा. वजह हैं वो पांच गलतियाँ, जो कांग्रेस ने चुनाव से पहले की थी.

गुजरात चुनाव 2017: आखिर कांग्रेस फिर क्यों हारी गुजरात? जानिए कांग्रेस की ये 5 बड़ी गलतियाँ..
राहुल गाँधी

22 साल से कांग्रेस को गुजरात नसीब नहीं हुआ और वो एक बार फिर से असफल हो गयी है. हालांकि इस बार कांग्रेस की स्थिति में थोडा सुधार देखा गया है. 182 सीटों में से कांग्रेस को 77 सीटें प्राप्त हुई हैं. जबकि 99 सीटों पर भाजपा का कब्ज़ा है. चुनावी तारीखों का ऐलान होने से लेकर चुनाव ख़त्म होने तक कांग्रेस ने ऐसी भारी गलतियाँ कर दी, जिसका परिणाम उसको भुगतना पड़ा है. आएये जानते हैं उन पांच बड़ी गलतियों के बारे में..

मणिशंकर अय्यर का बयान : कांग्रेस के नेता ने चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के के खिलाफ जहर उगलते हुए उनको ‘नीच आदमी’ कहा था. यह मुद्दा बहुत ज्यादा उछला और इस मुद्दे का जिक्र मोदी ने अपनी चुनावी रैलियों में भी किया. जिससे कांग्रेस की राजनीतिक छवि बिगड़ने लगी और उसका वोट बैंक गिर गया.

गुजरात चुनाव 2017: आखिर कांग्रेस फिर क्यों हारी गुजरात? जानिए कांग्रेस की ये 5 बड़ी गलतियाँ..
मणिशंकर अय्यर : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता

जनेऊधारी और हिन्दू-गैर हिन्दू विवाद : गुजरात चुनाव के दौरान राहुल गाँधी करीब 30 मंदिरों में गए. लेकिन सोमनाथ में उनके गैर हिन्दू होने पर विवाद खड़ा हो गया. राहुल गाँधी ने खुद को जनेऊधारी हिन्दू और शिवभक्त बताया. इसके बाद राहुल गाँधी पर कई आरोप लगे. भाजपा के दिग्गज नेताओं ने राहुल गाँधी पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने धर्म को छुपाया और वे सिर्फ वोट बैंक के लिए मंदिरों में घूम रहे हैं. राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने राहुल के रोमन कैथोलिक होने के सबूत भी दे डाले. इस हिन्दू गैर-हिन्दू विवाद से कांग्रेस को नुकसान हुआ.

हार्दिक पटेल और पाटीदार आंदोलन : पटेल सुमदाय की लड़ाई का दम भरने वाले हार्दिक पटेल ने पटेल समुदाय और आरक्षण देने वाले मुद्दे की आड़ में कांग्रेस से सौदा कर लिया. इसके बाद कांग्रेस का वोट बैंक तो बढ़ गया लेकिन पाटीदार नेताओं के बीच में दरार आ गयी और वे भाजपा में शामिल हो गए. इसके बाद कांग्रेस की सेक्स सीडी भी वायरल हो गयी. जिससे हार्दिक पटेल की लोकप्रियता में कमी आ गयी. दूसरी ओर भाजपा ने साबित कर दिया की कांग्रेस हार्दिक पटेल के साथ मिलकर हिन्दुओं को जातियों में तोड़कर अपना वोट बैंक मजबूत बनाना चाहती है.

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अडाणी-अंबानी पर आरोप : गुजरात में अपनी चुनावी रैलियों में राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जमकर हल्ला बोला. इस दौरान राहुल गाँधी ने अडानी और अंबानी जैसे उद्योगपतियों को लेकर मोदी पर आरोप लगाये कि वे इनको आर्थिक लाभ पहुंचा रहे हैं. ये दोनों उद्योगपति गुजरात के ही हैं. राहुल गाँधी के इस आरोप का गुजरात के व्यापारियों पर गहरा असर पड़ा और उन्हें ये बात पसंद नहीं आई.

प्रचार और दिग्गजों की कमी : गुजरात चुनाव के शुरूआत में कांग्रेस और उसकी सोशल मीडिया विंग ने बड़े ही जोर-शोर से प्रचार किया. लेकिन जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मियां बढ़ने लगी तो कांग्रेस का सोशल मीडिया विंग कमजोर पड़ता गया. साथ ही कांग्रेस का ‘विकास पागल हुआ’ का स्लोगन भी फ्लॉप हो गया. लेकिन भाजपा की लोकप्रियता और आक्रामकता चुनाव के अंत तक रही. इसके अलावा कांग्रेस में राहुल गाँधी के आलावा कोई भी बड़ा चेहरा नहीं दिखा जबकि भाजपा में मोदी और अमित शाह के आलावा कई मुख्यमंत्री और तमाम केन्द्रीय मंत्री चुनाव की जिम्मेदारी बड़ी ही कुशलता से संभाल रहे थे.

 

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