आज की सबसे बड़ी खबर! हिंदुत्व की हुई एक और जीत, मालेगांव ब्लास्ट केस में शंकराचार्य अमृतानंद जी को..

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23 सितंबर, 2017 – 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में अभी तक की सबसे बड़ी खबर सामने आई है. शंकराचार्य अमृतानन्द को आज ATS की कोर्ट ने से 9 साल बाद जमानत मिल गई है.

आज की सबसे बड़ी खबर! हिंदुत्व की हुई एक और जीत, मालेगांव ब्लास्ट केस में शंकराचार्य अमृतानंद जी को..

कल पांच लाख रूपये देकर शंकराचार्य अमृतानन्द को जमानत मिल गयी थी. और आज सुबह 8 बजे वे मुंबई ATS की कोर्ट से बरी हो गए हैं.

भारत की जनता जानती है कि हिन्दूओं को बदनाम करने के लिए तत्कालीन सरकार ने “भगवा आतंकवाद” के नाम से कई हिंदुत्वनिष्ठों को झूठे आरोपों में फंसाया था और उनको अमानवीय प्रताड़नायें भी दी.

महाराष्ट्र में नासिक जिले के मालेगांव में 29 सितंबर, 2008 को हुए विस्फोट में सात लोगों की मौत हो गई थी और करीब 100 लोग घायल हुए थे.

इस बम धमाकों में हिन्दुओं को निशाना बनाया गया और झूठे आरोपों के तहत शंकराचार्य अमृतानन्द को भी गिरफ्तार कर लिया गया था.

आज की सबसे बड़ी खबर! हिंदुत्व की हुई एक और जीत, मालेगांव ब्लास्ट केस में शंकराचार्य अमृतानंद जी को..

इस मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, पुरोहित, सुधाकर चतुर्वेदी और सुधाकर द्विवेदी को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

सहित शंकराचार्य अमृतानन्द सभी को कांग्रेस सरकार के इशारे पर ATS ने इतनी भयंकर प्रताड़नायें दी जिससे आज भी अधिकतर हिन्दुस्तान की जनता अनभिज्ञ है.

जुलाई 2009 में विशेष न्यायालय ने इन सभी को मकोका लगा दिया था, जिसे जुलाई 2010 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी जारी रखा. इसके बाद अप्रेल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए मकोका हटा दिया कि आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं.

जैसे साध्वी प्रज्ञा ने जेल से चिट्ठी लिखी थी ऐसे ही जेल में बंद पीओके (कश्मीर) शारदा पीठ के शंकराचार्य अमृतानंद देव तीर्थ ने भी चिट्ठी लिखी थी लेकिन जनता तक पहुँच नही पाई.
आइये आज हम उस षड्यंत्र का खुलासा करते हुए उनकी चिट्ठी आपके सामने रखते हैं. जिसे पढ़कर आपका खून खोल उठेगा और ये भी साबित हो जायेगा कि हिंदू आतंकवाद का नाम देकर विरोधियों ने हिन्दुओं को फसाया…

पढ़िये पूरी चिट्ठी..

शंकराचार्य अमृतानंद देव तीर्थ जी ने लिखा कि “भारत दुनिया का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला एकमात्र हिंदू राष्ट्र है, फिर भी एक विभाजित भारत, धर्मनिरपेक्षता के वजन तले दबा हुआ है, एक हिंदू राष्ट्र होने के बाद भी दोषी महसूस करता है। पिछले 1200 सालों से, अपनी एकजुट ताकत से अनजान, इस समाज में सच्चाई की बात करने के लिए साहस का अभाव है और इतिहास के सबक से बचने में काफी अनुभव है, बहुत अपमान और आक्रामकता से पीड़ित, अब अपनी पहचान के लिए खोज कर रहा है। “
इस संम्बध में, मैं हिंदू समाज की पहचान और विश्वास का प्रतीक हूँ, वर्तमान परिस्थितियों में जगद्गुरु शंकराचार्य, अनंतश्री बिभुशित स्वामी अमृतानंद देव तीर्थ (जन्म से सुधाकर धर), शंकराचार्य, श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ, जम्मू कश्मीर (पीओके), हिन्दू समाज के बेकार, उदासीन, अविश्वास और आस्थाहीन नेतृत्व पर नाखुश होकर यह पत्र लिख रहा हूँ ।
आज की सबसे बड़ी खबर! हिंदुत्व की हुई एक और जीत, मालेगांव ब्लास्ट केस में शंकराचार्य अमृतानंद जी को..
क्योंकि, मुंबई आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) के माध्यम से, हिंदू समाज गुमराह किया जा रहा है और मेरे प्रति क्रूर और अमानवीय अत्याचारों जैसे  – मेरा असली नाम हटाकर दयानंद पांडेय किया जो कि एक फर्जी नाम है, जो कभी मेरा नाम नही था वो जबरदस्ती रखवाया इसी नाम की पहचान का प्रचार करने से लेकर, मुझे स्वयं घोषित संत , महंत या पुजारी कहने तक रोका गया और मुझे कुछ अपराधों के आयोग को स्वीकार करने के लिए जबरदस्ती मजबूर किया गया ।
1] “मेरे भगवा वस्त्रों को हटा दिया गया और तीन दिनों के लिए वातानुकूलित कमरे में गीला रखा गया और बिजली के भयंकर झटके दिए गए थे।”
2] “मेरे निजी पूजा के लिए इस्तेमाल किये गए श्री यंत्र और धार्मिक पुस्तकें (जपजी साहिब सहित) को नाले में फेंक दिया गया ।”
3] “तीन पुरुषों ने मेरे पैरों पर खड़े होकर मेरे पैरों के तलवों पर मुझे बेल्ट के साथ मारा,जब तक मैं बेहोश ना हुआ तब-तक मारते रहे ।”
4] “मांस मेरे मुंह में धकेल दिया गया था और मुझे बताया गया था कि यह गौ -मांस (बीफ) था।”
5] “मुझे कुछ लिपियों को पढ़ने के लिए मजबूर किया गया था, और फिर मेरी आवाज डब की गई, और ऑडियो-वीडियो टेप का उत्पादन किया गया।”
6]  “मुझे धमकी दी गई कि हिन्दू समाज में मुझे बदनाम करने के लिए , मेरी अश्लील सीडी बनाई जाएगी [यानी, कंप्यूटर सिमुलेशन द्वारा]”
“ये केवल कुछ उदाहरण हैं। मैं उनकी हिरासत में 17 दिनों तक था, और आप इस बारे में कल्पना कर सकते हैं कि उन्होंने मेरे साथ क्या-क्या किया होगा !”
“यदि एटीएस के पास मेरे खिलाफ कोई सबूत है, तो उन्हें मेरे खिलाफ फर्जी प्रमाण बनाने की आवश्यकता क्यों थी?
एटीएस ने कहा, ‘यहाँ हम तुम्हें मार देंगे, बाहर मुसलमान तुम्हें मार देंगे; तुम्हें किसी भी हालत में मरना है,  तो अपने अपराधों को स्वीकार करो ‘।
उन्होंने मुझे सवालों के जवाब रटवाए, और फिर एक नारको विश्लेषण किया ‘.
‘इन परिस्थितियों में, मुझे उम्मीद है कि हिंदू समाज इस पत्र को पढ़ेगा। और अपने धर्माचार्यों के सत्य के प्रमाण के रूप में स्वीकार करेगा।’
“यहां उल्लेख करना उचित होगा कि शंकराचार्य परंपरा  की मूल और प्राचीन सीट, श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ, ग्राम शारदी, तालुका अत्तुमकम, जिला नीलम, विभाजित भारत के उत्तरी राज्य जम्मू कश्मीर के पाकिस्तान द्वारा जब्त 48% इलाकों में निहित है।”
पाकिस्तानी जब्ती के कारण ना केवल इस सीट को खोना पड़ा, बल्कि पिछले 60 वर्षों में, उस क्षेत्र के लाखों हिंदुओं ने अपने मानव अधिकारों को खो दिया है, बुनियादी नागरिक सुविधाओं से वंचित रखा है, और वे सामाजिक या सरकारी सहायता के बिना दर दर की ठोकरें खा रहे हैं  ।”
“पाक-कब्जे वाले कश्मीर को वापस लेने के तीन प्रस्तावों में धूल जमा हो रही है । धर्मनिरपेक्ष सरकारों के इस दृष्टिकोण को इस्लामी राष्ट्र और इस्लामी नेतृत्व जानते हैं । जिसके परिणामस्वरूप उत्पीड़न की नीति का पालन किया जा रहा है, और भारत में, इस्लामिक परिवर्तन पाकिस्तान और अन्य इस्लामिक देशों के समर्थक हो रहे हैं।
नतीजा यह है कि 18-20 साल पहले, लाखों हिंदुओं को कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया; उन्होंने देश के अन्य हिंदू राज्यों में शरण पायी । लेकिन आज, सात तटीय राज्यों में, हिंदू 10% से कम के अल्पसंख्यक हैं।  अगर दूसरे राज्यों में भी हिंदुओं की इसी प्रकार की उड़ान हो जाती है,तो वे शरण कहाँ लेगे?”
“इस भय-ग्रस्त समाज के प्रमुख विचारकों, काशी विद्वत परिषद, दंडी सन्यासी सेवा समिति, काशी के विश्वास-प्रेमी और प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने हाथ मिलाकर एक सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया और फिर से श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ की लुप्त शंकराचार्य परंपरा को पुन: स्थापित किया ।”
पीओके के हिंदुओं के उत्पीड़न और उड़ान को रोकना, पीओके के निवासी हिंदुओं के कष्टों को साझा करना और उन्हें न्याय और उनके अधिकार प्राप्त करने में सहायता करना, कश्मीरी पंडितों को घाटी में वापस करने के लिए प्रोत्साहित करना, और पीओके को पुनः प्राप्त करने के लिए तीन संसदीय प्रस्तावों की सरकार को याद दिलाना, यह एक चुनौती थी।
“इस प्रकार, 16 मई 2003 को, मुझे शंकराचार्य नियुक्त किया गया और मुझे इन  जिम्मेदारियों का #उत्तरदायित्व दिया गया। तब से आज तक, सभी प्रकार के खतरों और खतरों से निपटते हुए,  मैं अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा हूँ । इस पर एक विशेष रिपोर्ट आरएसएस मुखपत्र, आयोजक की 17 फरवरी 2008 संस्करण में पढ़ी जा सकती है। “
“धर्म के आधार पर विभाजित भारत का जम्मू क्षेत्र, स्वतंत्रता के समय से, धर्मनिरपेक्षता की कसौटी बन गया है। वहां शंकराचार्य की नियुक्ति आधिकारिक धर्मनिरपेक्षता का पर्दाफाश कर सकती है। इस डर से प्रेरित, तत्कालीन केंद्रीय और राज्य सरकारों ने अभिनव भारत कार्यक्रमों का इस्तेमाल करने की मांग की है और कश्मीर शंकराचार्य के रूप में मेरी आधिकारिक क्षमता में, साक्ष्यों को बनाने और मुझे अपमानित करने के लिए एटीएस का इस्तेमाल किया
“इसलिए, हिंदू समाज के माध्यम से, मैं आत्महत्या करने की अनुमति लेने के लिए सम्मानित राष्ट्रपति और सम्मानित न्यायपालिका से अपील करता हूं, क्योंकि इस तरह के अपमान के बाद मैं हर-दूसरे क्षण धीमे मौत मर रहा हूँ। । और, उन घटनाओं की वजह से, जिनका  मुझे सामना करना पड़ा था, जिसे मैं समाज के सामने आने वाले भारी खतरों के संकेत के रूप में लेता हूँ, मुझे उम्मीद है कि हिंदू समाज और उसके नेतृत्व करने वाले सतर्क और जाग्रत होंगे ।”
स्वामी अमृतानन्द देव तीर्थ जी के उपरोक्त पत्र से स्पष्ट है कि हिंदुओं के दमन के लिए तत्कालीन सरकार ने खूब प्रयास किये लेकिन वे सफल नही हो पाई और उनको जनता ने उखाड़कर फेंक दिया लेकिन अभी वर्तमान सरकार का भी हिंदुओं के प्रति उदासीन चेहरा देखकर हिंदुत्व खतरे में ही लग रहा है।
अब स्वामी अमृतानन्द देव की रिहाई हो गयी है और वो फिर से  जनता में जागृति लायेगें तभी हिन्दू संस्कृति टिक पाएगी अन्यथा राष्ट्रविरोधी ताकतों से हिन्दू संस्कृति खतरे में है।
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