देश के सबसे बड़े फर्जीवाड़े के साथ पीएनबी का एक और बड़ा खुलासा, 10 हजार कार्डधारकों की जानकारी..

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पंजाब नेशनल बैंक के करीब 10,000 डेबिट और क्रेडिट कार्डधारकों की संवेदनशील जानकारी लीक होने का मामला सामने आया है. बता दें कि हॉन्गकॉन्ग के अखबार..

देश के सबसे बड़े फर्जीवाड़े के साथ पीएनबी का एक और बड़ा खुलासा, 10,000 कार्डधारकों की जानकारी..
पंजाब नैशनल बैंक

एशिया टाइम्स के अनुसार एक्सपर्ट ने इस बात की आशंका जताई है कि ग्राहकों की बेहदम संवेदनशील जानकारी पिछले तीन महीनो से एक वेबसाइट पर खरीदी व बेची जा रही थी. हम आपको बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक को लेकर यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बैंक में बीते हफ्ते ही देश के सबसे बड़े बैंकिंग फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है.

देश के सबसे बड़े फर्जीवाड़े के साथ पीएनबी का एक और बड़ा खुलासा, 10,000 कार्डधारकों की जानकारी..
इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी image source

रिपोर्ट में इस बात का खुलासा भी हुआ है कि इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी कंपनी क्लाउडसेक की तरफ से बुधवार को बैंक को इसकी जानकारी दी गई थी. बता दें कि क्लाउडसेक, सिंगापुर में रजिस्टर्ड कंपनी है जिसका एक दफ्तर बेंगलुरू में भी है. इस कंपनी का कार्य डाटा ट्रांजेक्शंस पर नजर रखना है.

क्लाउडसेक के चीफ टेक्निकल ऑफिसर राहुल सासि ने एशिया टाइम्स को बताया कि कंपनी का एक क्रॉलर (प्रोग्राम) है जो डार्क/डीप वेबसाइट पर नजर रखता है. बता दें कि डार्क या डीप वेबसाइट वे साइट होती हैं जो गूगल या किसी अन्य सर्च इंजन पर इंडेक्स नहीं होती हैं. इन वेबसाइट्स पर गैर कानूनी तरीके से जानकारी को खरीदा और बेचा जाता है.

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सासि का कहना है कि क्रालर के माध्यम से हम डेटा को सर्च करके हमारे द्वारा बनाए गए मशीन लर्निंग प्रोग्राम पर भेजते हैं. यदि हमे इस बात का पता चलता है कि इस डेटा में ऐसा कुछ भी है जो या तो हमारे क्लाइंट के हित में है या संवेदनशील है तो हम इस पर तुरंत एक्शन लेते हैं. बता दें कि एक न्यूज एजेंसी के अनुसार पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (चीफ इंफॉर्मेशन सिक्युरिटी ऑफिसर) टीडी वीरवानी ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया है कि बैंक इस मामले में सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रही है. 

हम आपको बता दें कि बैंक के ग्राहकों की जो जानकारी वेबसाइट पर बिकने के लिए उपलब्ध थी उनमें कार्डधारक का नाम, कार्ड की एक्सपायरी डेट, पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर और कार्ड वेरिफिकेशन वैल्यु शामिल है. सासि ने यह भी बताया कि जानकारी के दो सेटो को इस वेबसाइट पर रिलीज किया जा रहा था. इसमें से एक सेट सीवीवी नंबर के साथ और दूसरा बिना सीवीवी नंबर के था. लीक हुए डाटा पर अंतिम तिथि 29 जनवरी 2018 की है, जो बात यह ज्ञात होता है कि अभी भी हजारों कार्डधारकों की जानकारी यहां मौजूद है।

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