पीएम मोदी, जेटली का फूटा गुस्सा! दे दी चेतावनी, वित्तीय गड़बड़ी करने वालो को..

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सरकार ने अपने संदेश में साफ़ कह दिया है कि वह वित्तीय घोटालो के मामलों में कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगी और इस संबंध में किसी को बक्शा नहीं जायेगा.  

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नरेंद्र मोदी image source

हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री ने खुद यह संदेश दिया है. इकनॉमिक टाइम्स ग्लोबल बिजनस समिट में वित्त मंत्री अरुण जेटली और उनके कैबिनेट सहयोगी पीयूष गोयल द्वारा भी यही बात कही गयी है.

नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे जूलर्स और कारोबारी विक्रम कोठारी से जुड़े कथित बैंक फ्रॉड के मद्देनजर ये चेतावनियां दी गईं. बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि आर्थिक मामलों से जुड़ी गड़बड़ियों के खिलाफ सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी. सार्वजनिक पैसे की चोरी सिस्टम स्वीकार नहीं करेगा. न्यू इकनॉमी, न्यू रूल्स की यह अहम बात है.

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वित्त मंत्री अरुण जेटली

इसी के साथ वित्त मंत्री ने भी चेतावनी दी कि आरोपी को कड़ी सजा दी जाएगी. जेटली ने कहा कि गड़बड़ी करने वालों को ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि इसका परिणाम उनके बिजनस के लिए केवल कमर्शल और सिविल डेथ ही नहीं होगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर तो कानून को और सख्त किया जाएगा जिससे पता चल सके कि वे कहां हैं और ऐसे लोगों के खिलाफ कौन सा बड़ा से बड़ा कदम कानून के तहत उठाया जा सकता है. 

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उन्होंने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग करने और टैक्स देनदारी से बचने के लिए शेल कंपनियां बनाने जैसी हरकतों से भारतीय कारोबारियों को बचना होगा. जेटली ने कहा कि यदि आप सबसे तेजी से बढ़ती इकनॉमी होने का दावा कर रहे हों और डिवेलप्ड इकनॉमी बनने के लिए कदम बढ़ाने की चाहत रखते हों तो बिजनस की दुनिया में ऐसी हरकतों के लिए जगह कहां है? 

जहां तक बैंड लोन की बात है तो असल में कारोबारी विफलता के चलते ऐसा होने के मुकाबले जानबूझकर लोन नहीं चुकाने के मामले ज्यादा हैं. जेटली ने कहा कि जिस प्रकार बैंक फ्रॉड सामने आए हैं उस तरह की घटनाएं यदि लगातार होती रहीं तो कारोबारी सहूलियत बढ़ाने की पूरे प्रयास पर पानी फिर जाएगा. यदि किसी बैंकिंग सिस्टम की कई शाखाओं में फ्रॉड हो रहा हो और एक भी कर्मचारी द्वारा सवाल न उठाया जाए तो क्या यह चिंता की बात नहीं है? 

हम आपको बता दें कि उनके द्वारा ऑडिट करने के सिस्टम और निगरानी क्षमता पर भी सवाल उठाये गए. जेटली ने कहा कि अंतत: रेग्युलेटर्स ही नियम तय करते हैं. उनके पास एक तीसरी आंख होनी चाहिए, जो खुली हो और इस सेक्टर पर नजर रख सके. दुर्भाग्य से भारत सिस्टम में हम राजनेता जवाबदेह हैं, न कि रेग्युलेटर। 

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पीएम मोदी का कहना है कि जब मई 2014 में उनकी सरकार बनी तो क्रोनी कैपिटलिज्म का बोलबाला था. तब उन्होंने कहा कि सरकार को बैलेंस शीट से जुड़ी जुड़वां समस्या विरासत में प्राप्त हुई थी. जिसमें बैंक बैड लोन से परेशान थे और कंपनियां लोन का भुगतान नहीं का भुगतान नहीं कर पा रही थीं. मोदी ने कहा कि हमने एक बड़ा रिफॉर्म इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड के रूप में किया जिससे इस समस्या से छुटकारा मिल सके. 

साथ ही जेटली ने कहा कि नई दिल्ली के अन्दर पॉलिटिकल करप्शन अगर खत्म नहीं हुआ है तो भी उसे तेजी से कम किया गया है. गोयल का कहना है कि पिछली सरकार का ग्रोथ मॉडल बैंकों की तरफ से बिना सोचे-विचारे कर्ज देने पर आधारित था, जिससे तेज आर्थिक वृद्धि का झूठा अहसास पैदा हुआ. 

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