सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! बैंक खातों व मोबाइल नंबरों को 31 मार्च तक..

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बैंकिंग और मोबाइल फोन जैसी कई प्रकार की सुविधाओं से आधार को जोड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निश्चित की गई अंतिम तिथि को 31 मार्च 2018 से आगे बढ़ाने की अपील खारिज कर दी है.

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! बैंक खातों व मोबाइल नंबरों को 31 मार्च तक..
सुप्रीम कोर्ट

हम आपको बता दें कि अपील में यह दलील दी गई थी कि 12 अंकों वाले यूनीक आइडेंटिटी नंबर से अहम सर्विसेज को जोड़ने की अनिवार्यता के खिलाफ दाखिल सभी याचिकाओं पर सुनवाई अगले महीने के अंत तक पूरी नहीं हो पाएगी.

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! बैंक खातों व मोबाइल नंबरों को 31 मार्च तक..
दीपक मिश्रा image source

बता दें कि दीपक मिश्रा(चीफ जस्टिस) की अगुआई वाली पांच जजों की बेंच ने दिन गुरुवार को आधार के विपक्ष कानूनी लड़ाई की अगुवाई कर रहे वरिष्ठ ऐडवोकेट श्याम दीवान की अपील को खारिज कर दिया. हालांकि आधार ऐक्ट 2016 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की एक पखवाड़े से सुनवाई कर रही बेंच ने यह भी संकेत दिया कि सुनवाई पूरी करते समय सभी संबंधित पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाएगा. 

बेंच द्वारा मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया है. अभी तक केवल आधार ऐक्ट को खत्म किए जाने की मांग रहे लोगों ने ही अदालत के सामने अपनी बात रखी है. इनकी दलीलें जब पूरी हो जाएँगी उसके बाद सरकार और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को आधार के पक्ष अपनी बात रखने का अवसर प्राप्त होगा. 

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आधार कार्ड का नमूना image source

हम आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे दिन चली सुनवाई के दौरान यह भी जानना चाहा कि क्या आधार ऑथेंटिकेशन में स्वयंभू मददगार एजेंसियां और आधार डेटाबेस का एक्सेस पाने वाली प्राइवेट एजेंसियां व्यावसायिक लाभ के लिए थर्ड पार्टी को ये सूचनाएं मुहैया करा रही हैं? आधार के विरोधी अरसे से यह आरोप लगाते रहे हैं.

 

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बायोमीट्रिक्स image source

बता दें कि अदालत में आधार का विरोध करनेवालों का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मण्यन ने अपनी दलील में कहा कि किसी आपराधिक मामले में जरूरत को छोड़ दें तो सरकार किसी भी मामले में बायोमीट्रिक्स करने के लिए किसी व्यक्ति पर जोर नहीं दे सकती क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही ये ऑर्डर जारी कर दिया था कि किसी को भी ऐसी सूचनाएं देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता यदि उन पर किसी प्रकार के अपराध में शामिल होने का आरोप नहीं लगा हुआ है. 

इस संदर्भ में उन्होंने सरकार की उन दो अधिसूचनाओं की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया, जिसके जरिए उसने संभवत: मतदाता सूची के ‘शुद्धिकरण’ के लिए वोटर आइडेंटिटी कार्ड को भी आधार सीडिंग अनिवार्य कर दी थी. उन्होंने कहा कि ऐसे तो किसी को मताधिकार देने और किसी को उससे वंचित करने में त्रुटिपूर्ण आधार का इस्तेमाल हो सकता है.  उन्होंने 10 जनवरी 2018 को जारी उस अधिसूचना का भी जिक्र किया, जिससे बायोमीट्रिक में फेशियल रिकग्निशन को भी शामिल कर दिया गया था। 

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