म्यांमार से आये इस्लामिक आतंकियों पर SC का फैसला आने से पहले प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इन्होंने की भारत को कमज़ोर करने की साजिश!

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नई दिल्ली : जहाँ ‘भारत सरकार’, संघ और अन्य सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं राष्ट्र हित में रोहिंग्या मुसलमानों को देश की एकता और अखंधता के लीये खतरा बता चुके है वही भारत में ही कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इन आतंकवादियों को भारत में शरण देने के पक्ष में है. आज संविधान और मानवता की आड़ लेकर ऐसे हो राष्ट्र द्रोह लोगों के एक संघटन के 51 लोगों ने भारत के प्रधानमंत्री को एक पत्र लिख कट इन ‘रोहिंग्या मुस्लिम’ आतंकवादियों को भारत में पनाह देने की सिफारिश की है.

म्यांमार से आये इस्लामिक आतंकियों पर SC का फैसला आने से पहले प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इन्हों ने की भारत को कमज़ोर करने की साजिश!
रोहिंग्या मुस्लमान

गौर तलब है की यह पत्र उस समाया सामने आया है जब भारत की सर्वोच्य अदालत ने इन मुस्लिम अतन्क्वदिओन के भारत में रहने पर बड़ा फैसला आना है. ‘म्यांमार’ से भागकर ‘भारत’ आये रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर उच्चतम न्यायालय आज अपना फैसला सुनाने वाली है. देश में पल रहे देशद्रोहियों ने इन लोगों को देश से बाहर करने वाले सरकार के फैसले के विरुद्ध प्रधानमंत्री ‘नरेंद्र मोदी’ को पत्र लिखा है. उन्होंने यह पत्र लिखकर पीएम मोदी से आग्रह किया है कि रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में ही शरण दी जाये.

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नरेंद्र मोदी

इस पत्र को लिखते हुए कहा है कि, ‘भारत सरकार’ को रोहिंग्याओं को भारत में शरण देकर पूरी दुनिया के सामने मानवता की मिसाल पेश करनी चाहिए. मिली जानकारी के अनुसार आपको बता दें कि, रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर आज ‘उच्चतम न्यायालय’ में सुनवाई की जाएगी.

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उच्चतम न्यायालय

विश्वशनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पत्र में यह भी बताया गया है कि, रखाइन से अपना घर छोड़कर आए हजारों ‘रोहिंग्या मुसलमानों’ के लिए केंद्र सरकार को सोच समझकर निर्णय लेना की जरुरत है. पीएम मोदी को भेजे गये पत्र पर देश की 51 बड़ी हस्तियों ने अपने हस्ताक्षर किये हैं.

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रोहिंग्या मुस्लिम

पीएम नरेंद्र मोदी को दिए गये इस पत्र को ‘ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन एम्नेस्टी इंटरनेशनल इंडिया’ ने बनाकर तैयार किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आपको बता दें कि, भारत सरकार ने याचिका दायर करते हुए बताया है कि, रोहिंग्या मुसलमानों का ‘इंटर सर्विसेज’ (ISI) और ‘इस्लामिक स्टेट’ (IS) के साथ संबंध बताए जाने के साथ-साथ इन लोगों को देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताने को लेकर रोहिंग्याओं ने ‘उच्चतम न्यायालय’ में हलफनामा दायर किया है.

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आतंकवादी

रोहिंग्या मुसलमानों द्वारा दायर किये गये हलफनामे में बताया गया है कि, उन लोगों के साथ भी तिब्बतियों और ‘श्रीलंका’ के शरणार्थियों के जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए. साथ ही यह भी बताया गया है कि, हम लोगों (रोहिंग्याओं) का आतंकी संगठन ‘आईएसआई’ और ‘इस्लामी स्टेट’ जैसे किसी भी संगठन से कोई लेना देना नहीं है. भारत में रह रहे रोहिंग्याओं में से ऐसा कोई भी रोहिंग्या नहीं है जो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में जुड़ा हुआ है.

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