सावधान! बकरीद पर आतंकवादी संगठन ‘जैश-ए-मुहम्मद’ कर रहा है भारत में..

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इस समय जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रों में भयंकर दहशत का माहौल है,जिसकी वजह है आतंकवाद। खबरों के मुताबिक पता चला है कि “जैश-ए-मुहम्मद” के आतंकी ईद से पहले पुलवामा में किए गए हमले से भी घातक हमला कर सकते हैं। इससे पहले भी इस आतंकी गिरोह ने कई खतरनाक जानलेवा हमले किए है।

सावधान! बकरीद पर आतंकवादी संगठन 'जैश-ए-मुहम्मद' कर रहा है भारत में..

सूत्रों के अनुसार आतंकी ईद से पहले किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। दरअसल आतंकियों के एक मैसेज को सुरक्षाबलों ने इंटरसेप्ट किया है, जिसके आधार पर यह जानकारी मिली है कि, आतंकी सुरक्षाबलों के ठिकानों को निशाना बनाने की फिराक में हैं।

यह सूचना प्राप्त होने के बाद सुरक्षाबलों ने भी आतंकियों की इस नापाक साजिश को नाकाम करने के लिए अपनी तैयारियाँ शुरू कर दी है। खबरे आ रही है कि, सुरक्षाबलों ने एक मैसेज ट्रेस किया है जिसके अनुसार ईद के मौके पर सुरक्षाबलों की कुर्बानी देने की बात सामने आ रही है।

इस मैसेज के जरिए पता लगा है कि आतंकियों का पुलवामा पुलिस लाइन पर हमले की तरह फिर से हमला करने का प्लान है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही जैश-ए- मुहम्मद के आतंकियों का एक गिरोह फिदायीन दस्ता जिसमें लगभग एक दर्जन ‘फिदायीन आतंकी’ शामिल हैं, घुसपैठ करके कश्मीर पहुंच चुका है।

सावधान! बकरीद पर आतंकवादी संगठन 'जैश-ए-मुहम्मद' कर रहा है भारत में..

जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि ‘हिज्बुल मुजाहिदीन’ और ‘लश्कर-ए-तैयबा’ के टॉप कमांडरों को मार दिए जाने के बाद से ही आतंकवादियों के सरगना अब जैश-ए-मुहम्मद को आतंक फ़ैलाने के लिए आगे लाना चाहते है और ये आतंकी गिरोह हताशा में कश्मीर के कई इलाकों में आतंकी हमला कर रहे है।

आपको बता दे कि शनिवार को पुलवामा की जिला पुलिस लाइन में आतंकी हमलो के कारण पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के 9 लोग शहीद हुए थे। हमारे जवानो ने भी 3 आतंकवादियों को मौत के घाट पहुँचा दिया था। जैश-ए-मुहम्मद को आत्मघाती हमलों के नाम से जाना जाता है।

खबरों के मुताबिक यह गिरोह कुछ वर्षों में वह उत्तरी कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में ही सक्रिय रहा है। इस पर कश्मीर पुलिस “आईजी मुनीर खान” का कहना है कि हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा के लोकल कमांडर्स को ढेर कर देने के बाद आतंकवादी अब आतंकी गिरोह जैश की मदद ले रहे हैं।

 

मुनीर खान ने बताया कि साउथ कश्मीर, खासतौर से त्राल, पुलवामा और शोपियां इलाकों में जैश के सक्रिय आतंकवादियों की संख्या करीब 10 से 12 है। उनका कहना है कि इस प्रकार के आतंकी हमले 1990 के दशक से हो रहे हैं और इनसे सुरक्षाबलों पर कोई दबाव नहीं बन सकता।

वरिष्ट पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पुलवामा अटैक से सुरक्षा बलों पर कोई फर्क नही पड़ा है, क्योकि आतंकवादी अभी बैक फुट पर हैं। शोपियां जिले के एसएसपी एस.एस दिनकर का मानना है कि यह आतंकी हमला हताशा में हुआ है, क्योंकि हमारे जवानो के हाथो आतंकियो के कई कमांडर मारे जा चुके हैं।

इस तरह के आतंकी हमलो से जमीनी हकीकत नहीं बदली जा सकती है और ना ही इस तरह के हमलो से आतंकियो की संख्या में कोई कमी नही होगी। आतंकवाद विरोधी अभियानों के विशेषज्ञ ने दावा किया है कि हो सकता है कि पुलवामा में हमला अफजल गुरू के गिरोह ने किया हो, जिसे जैश ने 2013 में तिहाड़ में अफजल को फांसी दिए जाने के बाद बनाया था।

इस पर पुलवामा जिले के एसपी मुहम्मद असलम का कहना है कि पुलवामा अटैक में शामिल अबू साद, दाऊद और अबू बकर  कम से कम पिछले 45 दिनों से दक्षिण कश्मीर में उपस्थित थे।

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