पुलवामा हमले के बाद फिल्म अभिनेता कमल हसन ने पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए दिया ये देशद्रोही बयान…

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After the Pulwama attack film actor Kamal Hassan took the side of Pakistan and gave it a seditious statement (चेन्नई) : बीते 14 फ़रवरी को ‘जम्मू-कश्मीर’ के ‘पुलवामा आतंकी हमले’ में ‘भारतीय सेना’ के 40 जवान शहीद हुए हैं. जिसके बाद एक तरफ पूरे भारत में रोष बना हुआ है. वहीं फिल्मों से राजनीति में आए दक्षिण भारतीय सुपरस्टार ‘कमल हासन’ ने देशद्रोही बयान दिया है. उनके इस बयान के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया है. 

पुलवामा हमले के बाद फिल्म अभिनेता कमल हसन ने पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए दिया ये देशद्रोही बयान...
कमल हसन

उन्होंने अपने बयान में कहा कि कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की बात कर रहे हैं. इतना ही नहीं अपने बयान में उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को ‘आजाद कश्मीर’ बताया है.

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मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने देश की कश्मीर नीति को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा है कि सरकार कश्मीर में जनमत संग्रह कराने से क्यों कतरा रही है. आपको इस बात से अवगत करा दें कि कश्मीर की जनता भारत के साथ आनी चाहती है, पाकिस्तान या फिर अलग देश के रूप में रहना चाहते हैं, इस बारे में जनमत संग्रह की बात कई संगठन उठते रहते हैं.

पुलवामा हमले के बाद फिल्म अभिनेता कमल हसन ने पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए दिया ये देशद्रोही बयान...

इसके अलावा कमल हसन ने कहा है कि यदि भारत खुद को बेहतर देश के रूप में साबित करना चाहता है तो उसे इस तरह का आचरण नहीं करना चाहिए. हालांकि उनसे पुलवामा में ‘जैश-ए-मुहम्मद’ के आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले पर सवाल पूछा गया था, जिसमें 40 ‘सीआरपीएफ’ कर्मी शहीद हो गए थे.

इस दौरान दक्षिण भारतीय सुपरस्टार हसन ने कहा है कि मुझे बड़ा दुख होता है जब लोग कहते हैं कि सैनिक तो कश्मीर मरने के लिए जाते हैं. उन्होंने कहा, सेना भी एक पुराने फैशन की तरह है. जिस तरह से दुनिया बदल रही है, हम यह कैसे तय कर सकते हैं कि इंसान खाने के लिए दूसरे इंसान का कत्ल नहीं करेगा. लड़ाई खत्म करने का भी एक वक्त आएगा. क्या मानव सभ्यता ने पिछले 10 साल में यह सब नहीं सीखा.

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कमल हसन ने आगे कहा है कि ‘जब मैं मैयम मैग्जीन चलाता था, तो उस समय भी मैंने कश्मीर मामले को लेकर काफी कुछ लिखा था. आज मुझे इसलिए रोना आ रहा है क्योंकि मैंने जो भविष्यवाणी की थी वह हो रहा है. काश! मैंने कुछ और ही भविष्यवाणी की होती. कश्मीर में जनमत संग्रह कराएं, लोगों को बात करने की आजादी दें. वे जनमत संग्रह क्यों नहीं कराते? उन्हें किस बात का डर है. वे देश को बांटना चाहते हैं बस और कुछ नहीं.’

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