सीआरपीएफ आतंकी हमला : 7 जवानों के हत्यारों को ऐसे बचाना चाहती थी अखिलेश सरकार

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नई दिल्ली : रामपुर में स्थित सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हमले (CRPF Terror Attack) के मामले में जिन आतंकवादियों को शनिवार को फांसी की सजा सुनाई गई है, उनका मुकदमा अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की अगुवाई वाली सपा सरकार में वापस लेने के प्रयास किए गए थे. इसके लिए पत्रचार भी हुआ था. इस पर प्रशासन ने आपत्ति जताई थी, जिसके चलते मुकदमा वापस नहीं हो सका था. इस आतंकियों में एक पाकिस्तानी भी शामिल था. इस आतंकी हमले 7 जवान शहीद हुए थे.

सीआरपीएफ आतंकी हमला : 7 जवानों के हत्यारों को ऐसे बचाना चाहती थी अखिलेश सरकार

मुकदमा वापसी का फैसला घोषणा पत्र में ऱखा था 
समाजवादी पार्टी ने 2012 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणा पत्र में यह घोषणा भी की थी कि बेगुनाहों को आतंकवादी मुकदमों से रिहा कराया जाएगा. उनके मुकदमे वापस लिए जाएंगे. इसके बाद सपा सत्ता में आई और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने. इसके बाद सरकार ने इस पर अमल करने का भी प्रयास किया. सरकार ने रामपुर का मुकदमा वापस लेने के लिए जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी. प्रशासन ने रिपोर्ट दी थी कि यह मुकदमा वापस लेना ठीक नहीं रहेगा. यह गंभीर मामला है और मुकदमा अदालत में विचाराधीन है. इस पर शासन ने मुकदमा वापस नहीं लिया था.

नहीं हो पाया प्रशासन के विरोध के चलते फैसला
उस दौरान कुछ लोगों ने मुकदमा वापसी की प्रक्रिया का विरोध भी किया था, जबकि कुछ लोग चाहते थे कि मुकदमे वापस हों. रामपुर में उन दिनों आइएसआइ के चार एजेंटों का मामला भी विचाराधीन था. यह मुकदमा भी वापस नहीं हो सका था. इनसे मुकदमा वापस लेने के लिए भी कुछ संगठनों ने मांग की थी लेकिन, अदालत ने इन्हें बरी कर दिया था. जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने बताया कि मामला हमारे संज्ञान में है. मुकदमा वापस लेने के लिए पत्रचार हुआ था लेकिन, प्रशासन ने मुकदमा वापसी पर आपत्ति जताई थी.

बता दें कि सीआरपीएफ कैंप (CRPF Camp) पर हुए आतंकी हमले (Terrorist attack) के मामले में शनिवार को कोर्ट (Court) ने अपना फैसला सुना दिया है. इस मामले में कोर्ट ने छह दोषियों में से चार को फांसी की सजा (Death Sentence) सुनाई है. जबकि दोषी जंग बहादुर को उम्र कैद तो वहीं फहीम को दस साल की सजा सुनाई है. ये सजा रामपुर (Rampur) के एडीजे-तृतीय की कोर्ट ने सुनाई है.

सीआरपीएफ आतंकी हमला : 7 जवानों के हत्यारों को ऐसे बचाना चाहती थी अखिलेश सरकार

इन लोगों को ठहराया गया था दोषी 
इमरान शहजाद उर्फ अबू ओसामा उर्फ अजय उर्फ असद उर्फ रमीज राजा उवैस निवासी समानी, थाना चौकी सिटी, जिला विम्बर, पाकिस्तान (पीओके).
मोहम्मद फारू उर्फ अबू जुल्कर नैन, उर्फ अबूजाद उर्फ अमर सिंह निवासी कंगड़ी, थाना सदर, जिला गुजरवाला, पंजाब, पाकिस्तान.
सबाउद्दीन उर्फ सहाबुद्दीन उर्फ सबाह उर्फ संजीव उर्फ फरहान उर्फ अबू अल कासिम उर्फ बाबर उर्फ मुवस्सिर उर्फ समीर उर्फ इफ्तिखार, निवासी गंधवार, वाया पंडौल, थाना सकरी, जिला मधुबनी, बिहार.
मोहम्मद शरीफ उर्फ सुहैल उर्फ साजिद उर्फ साजिद, उर्फ अनवर, उर्फ अली, निवासी बदनपुरी, थाना खजुरिया, जिला रामपुर, उत्तर प्रदेश.
जंगबहादुर खान उर्फ बाबा निवासी मिलक कामरू, थाना मूंढापांडे, जिला मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश.
फहीम अरशद अंसारी निवासी कमरा नंबर 240, चाल नंबर 303 मोतीलाल नगर, 2 एमजी रोड, गोरेगांव, वेस्ट मुम्बई, महाराष्ट्र.

सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हुआ था हमला
गौरतलब है कि सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर 31 दिसंबर 2007 की रात ढाई बजे आतंकियों ने हमला कर दिया था. आतंकी सेंटर के गेट नंबर एक से अंदर घुसे थे. यह गेट दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर है. आतंकियों ने गेट पर मौजूद जवानों पर गोलियां बरसाई और हैंड ग्रेनेड भी फेंके थे. इसके बाद एके-47 से गोलियां बरसाते हुए केंद्र परिसर में काफी अंदर तक घुस गए थे. हमले में सीआरपीएफ के सात जवान शहीद हो गए थे. इसके अलावा गेट के बाहर अपने रिक्शा पर सो रहे चालक की भी मौत हो गई थी.

हमले में 7 जवान हुए थे शहीद
पुलिस ने हमले के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था. इनमें गुलाम कश्मीर का इमरान शहजाद, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का मुहम्मद फारुख पुत्र बूटा बट्टी, बिहार का सबाउद्दीन पुत्र शब्बीर अहमद, महाराष्ट्र में गोरे गांव का फहीम अंसारी, यूपी के प्रतापगढ़ का मुहम्मद कौसर खां पुत्र कदीरुद्दीन, बरेली के थाना बहेड़ी का गुलाब खां पुत्र शमशेर खां, मुरादाबाद के ग्राम मिलक कामरू का जंग बहादुर बाबा पुत्र खान बहादुर और रामपुर का मुहम्मद शरीफ पुत्र मुहम्मद अय्यूब शामिल था. इस पूरी घटना में 7 जवान शहीद हुए थे. वहीं, हमले में एक रिक्शा चालक की भी मौत हो गई थी. मामले में जनवरी 2008 में केस दर्ज किया गया था. इसकी जांच यूपी एसटीएफ और पुलिस कर रही थी.

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