पत्रकार छत्रपति हत्याकांड : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम समेत 4 लोगों के खिलाफ सुनाया ये बड़ा फैसला…

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Journalist Chhatrapati massacre: Punjab and Haryana High Court pronounce a major verdict against 4 people including Ram Rahim (नई दिल्ली) : अभी-अभी ‘डेरा सच्चा सौदा’ प्रमुख ‘गुरमीत राम रहीम’ को पत्रकार छत्रपति हत्या मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला लिया है. जिसके बाद राम रहीम की मुश्किलें और भी बढ़ने वाली हैं. सूत्रों की माने तो न्यायालय में आखिरकार 16 साल बाद पत्रकार को इंसाफ मिल ही गया.

पत्रकार छत्रपति हत्याकांड : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम समेत 4 लोगों के खिलाफ सुनाया ये बड़ा फैसला...
गुरमीत राम रहीम

11 जनवरी को पत्रकार ‘रामचंद्र छत्रपति’ मामले में राम रहीम के अलावा 3 एनी लोगों (किशन लाल, निर्मल और कुलदीप) को दोषी करार दिया है. सूत्रों की माने तो इन लोगों को सजा का ऐलान 17 जनवरी को किया जाएगा. राम रहीम इस मामले में मुख्य अपराधी है. न्यायालय के फैसले के बाद तीन आरोपियों को अंबाला जेल भेज दिया गया.

सूत्रों की माने तो राम रहीम की पेशी ‘सुनारिया जेल’ से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा की गई. बल्कि एनी तीनों लोगों को न्यायालय में पेश किया गया. ‘साध्वी यौन शोषण केस’ में जिस न्यायधीश ‘जगदीप सिंह’ ने राम रहीम के खिलाफ फैसला सुनाया था, एक बार फिर से ही आज उन्होंने ही इस मर्डर केस में फैसला सुनाया.

इस हत्या के मामले को देखते हुए ‘पंचकूला न्यायालय’ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. परंतु एक व्यक्ति इन इंतजामों को चकमा देते हुए कोर्ट परिसर में घुस गया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. पकड़े गए व्यक्ति ने लाल पगड़ी पहन रखी थी.

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पत्रकार रामचंद्र छत्रपति

जिसको लेकर कहा जा रहा है कि शायद वह डेरा प्रेमी था. वह लगातार फोन पर कोर्ट परिसर की हलचल को आगे किसी को भेज रहा था. पुलिस ने घेराबंदी करके उसे पकड़ा और सीआईए स्टाफ भेज दिया.

आखिरकार पिता को मिला इंसाफ- पत्रकार का बेटा

न्यायालय के फैसले के बाद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे ‘अंशुल छत्रपति’ ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा है कि हमने एक शक्तिशाली दुश्मन के खिलाफ इंसाफ की लड़ाई लड़ी. परंतु इस बात से सुकून मिला है कि इस लड़ाई में हमारी जीत हुई और पिता को इंसाफ मिला. मामले में ‘केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ (सीबीआई) के वकीलों ने पूरी संजीदगी से पैरवी की है.

आपको याद दिला दें 24 अक्टूबर 2002 को सिरसा के पत्रकार छत्रपति पर अंधाधुंध गोलियों से हमला कर दिया था. जिसके बाद उनको अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था और 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के ‘अपोलो अस्पताल’ में उनकी मौत हो गई थी, लेकिन उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने हार नहीं मानी.

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अंशुल छत्रपति

सूत्रों की माने तो पत्रकार छत्रपति की हत्या लाइसेंसी बंदूक से की गई थी. आपको याद दिला दें कि मौके पर ही दोनों आरोपितों कुलदीप और निर्मल दबोच लिया था. ध्यान देने वाली बात यह है कि पत्रकार छत्रपति ने ही साध्वियों से दुष्कर्म के मामले का पर्दाफाश किया था. 

इसके बाद पत्रकार के बेटे अंशूल ने सीबीआई जांच की मांग के लिए ‘पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय’ में याचिका दायर की. नवंबर 2003 में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की. दरअसल 2004 में डेरा सच्चा सौदा ने यह जांच रुकवाने के लिए ‘उच्चतम न्यायालय’ में याचिका भी दाखिल की थी.

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लेकिन उच्चतम न्यायालय ने राम रहीम की यह याचिका खारिज कर दी. करीब 16 साल इस केस की सुनवाई पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चली. 31 जुलाई 2007 के मामले में चार्जशीट दाखिल की गई थी. 12 दिसंबर 2008 के सभी आरोपियों पर आरोप तय किए गए.

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पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय

सूत्रों की माने तो इस हत्या के मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से 46 गवाह न्यायालय में पेश किए गए. इसके अलावा बचाव पक्ष की तरफ से 21 गवाह पेश किए गए.इससे पहले 2 जनवरी 2019 को हुई सुनवाई के दौरान मामले में बहस पूरी हुई इसके बाद जज ने फैसला सुरक्षित रख लिया और 11 जनवरी को चार आरोपियों को दोषी करार दे दिया.

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