कठुआ दुष्कर्म व हत्याकांड : जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने आरोपियों को सुनाई ये भयंकर सजा! जिससे आरोपियों की कांपी रुह

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Kathua misdeed and murder case: The Jammu and Kashmir High Court sentenced the culprits to this big punishment (जम्मू-कश्मीर) : साल 2018 जनवरी में हुए ‘कठुआ सामूहिक दुष्कर्म व हत्याकांड’ मामले को लेकर न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है. जिसके बाद आरोपियों की रुंह कांप गई. सूत्रों की माने तो इस मामले में छह लोगों को दोषी करार दिया गया  और एक को बरी कर दिया गया. फैसले की घोषणा के मद्देनजर अदालत और कठुआ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. 

कठुआ दुष्कर्म व हत्याकांड : जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने आरोपियों को सुनाई ये बड़ी सजा! जिससे आरोपियों की कांपी रुह

सोमवार 10 जून को न्यायाधीश ‘तेजविंदर सिंह’ ने सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की बात सुनी और मंदिर के संरक्षक व ग्राम प्रधान सांझी राम’, एसपीओ ‘सुरेन्द्र कुमार’, विशेष पुलिस अधिकारी ‘दीपक खजूरिया’, सब इंस्पेक्टर ‘आनंद दत्ता’, हेड कांस्टेबल ‘तिलक राज और प्रवेश कुमार’ को दोषी करार दे दिया. जबकि सांझी राम के बेटे विशाल को बरी कर दिया गया है.

सूत्रों की माने तो तिलक राज और आनंद दत्ता ने कथित रूप से सांझी राम से 4 लाख रुपये लिए और सबूत नष्ट कर दिए थे. फ़िलहाल किशोर आरोपी के खिलाफ मुकदमा शुरू होना बाकी है, क्योंकि उसकी उम्र का निर्धारण करने वाली याचिका ‘जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय’ के समक्ष विचाराधीन है.

ये है पूरा मामला

आपको याद दिला दें कि जम्मू के कठुआ में गांव रसाना की 8 साल की बच्ची ‘आसिफा’ 10 जनवरी 2018 को लापता हो गई थी. काफी तलाशने के बाद भी कोई जानकारी नहीं मिली तो पिता ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई. बच्ची की लापता होने के एक सप्ताह बाद 17 जनवरी को जंगल में बच्ची की लाश क्षत-विक्षत स्थिति में बरामद हुई थी.

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सूत्रों की माने तो बच्ची खानाबदोश मुस्लिम समुदाय से थी. उस बकरवाल समुदाय से जो कठुआ में अल्पसंख्यक है. बच्ची के साथ हुई हैवानियत के विरोध में परिजनों ने प्रदर्शन किया और हाईवे जाम कर दिया. फिर इस मामले में 18 जनवरी को एक आरोपी का सुराग लगा और उसे गिरफ्तार कर लिया.

22 जनवरी को पुलिस ने मामले की जांच ‘क्राइम ब्रांच’ को सौंप दी. इस मामले में कुछ लोग आरोपियों के समर्थन में खड़े हो गए. जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (जम्मू) भी इस आंदोलन में शरीक हो गया. जिसका परिणाम यह रहा कि 9 अप्रैल को चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई. इसके बाद क्राइम ब्रांच ने 10 अप्रैल को चार्जशीट दाखिल की.

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ध्यान देने वाली बात यह है कि वकीलों ने इसका विरोध करते हुए 11 अप्रैल और 12 अप्रैल को पूरे जम्मू-कश्मीर का बंद बुलाया और वे कठुआ जिला जेल के बाहर लगातार प्रदर्शन करते रहे. आपको बता दें की पीड़ित परिवार की याचिका पर ‘उच्चतम न्यायालय’ ने यह मामला कठुआ से पठानकोट की सेशन कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया.

कोर्ट में 15 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी और 8 जून 2018 को सात आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या के आरोप तय किए थे. ट्रायल 3 जून 2019 को पूरा हो गया था. इस मामले में कुल 221 गवाह बनाए गए हैं. 55वें गवाह के रूप में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पेश हुए.

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सूत्रों की माने तो 56वें गवाह के रूप में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के एक्सपर्ट को न्यायालय में पेश किया गया. जब से केस की सुनवाई शुरू हुई, तब से अब तक सभी तारीखों पर सुनवाई की वीडियोग्राफी की गई है. फ़िलहाल इस मामले के सातों आरोपियों को कठुआ से गुरदासपुर की जेल में भेज दिया गया था.

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