देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर लिया ये जबरदस्त फैसला…

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Keeping the security of the country in mind, the Modi government took this tremendous decision on Rohingya Muslims (नई दिल्ली) : केंद्र की ‘मोदी सरकार’ ने एक बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले के बाद भारत में जश्न का माहौल है. सूत्रों की माने तो भारत ‘रोहिंग्या मुसलमानों’ के एक परिवार को म्यांमार भेजेगा. सूत्रों की माने तो इस परिवार में पांच लोग हैं और एक बार पुलिस इन लोगों को बस से म्यांमार की सीमा तक लेकर गई. आपको याद दिला दें कि बीते चार महीने में यह दूसरा मामला है. जो भारत में अवैध तरीके से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार भेजा जाएगा.

देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर लिया ये जबरदस्त फैसला...
नरेंद्र मोदी

ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्तमान की एनडीए सरकार ‘रोहिंग्या मुसलमानों’ को अवैध प्रवासी मानती है. साथ ही देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा समझती है. सरकार ने आदेश देते हुए कहा है कि भारत में अवैध तरीके से रह रहे सभी रोहिंग्या समुदाय के लोगों की पहचान की जाए और वापस भेजा जाए.

गुरुवार 3 जनवरी को ‘एनडीए सरकार’ जिस परिवार को म्यांमार भेज रही है, उसमें पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे शामिल हैं. सूत्रों की माने तो उनको साल 2014 में असम में गिरफ्तार किया गया था और वैध दस्तावेज के बिना भारत में प्रवेश के लिए जेल भेज दिया गया था.

पुलिस महानिदेशक महंत ने मीडिया से कहा है कि ‘वे पांचों लोग पड़ोस के मणिपुर राज्य में सीमा के गेट पर मौजूद हैं. हम उन्हें औपचारिक रूप से सौंपने के लिए म्यांमार के अधिकारियों का इंतजार कर रहे हैं.’  

देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर लिया ये जबरदस्त फैसला...

असम के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ‘भास्कर ज्योति महंत’ ने आगे कहा है कि असम की जेलों में लगभग 20 और ऐसे म्यांमार के नागरिक हैं, जिनको भारत में अवैध तरीके से घुसने पर गिरफ्तार किया गया है. दरअसल इस बात की अभी पुष्टि नहीं हुई कि वे सभी लोग रोहिंग्या ही हैं या नहीं.

सूत्रों की माने तो रोहिंग्या बौद्ध बहुल ‘म्यांमार’ की ऐसा मुस्लिम समुदाय है जिसको म्यांमार भी अपना मानने को राजी नहीं हो रहा है. इस तरह से देखें तो वे देशहीन नागरिक हो चुके हैं.

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महानिदेशक महंत ने आगे कहा है कि ‘म्यांमार की तरफ से हमें एक बार इन सभी लोगो की यात्रा परमिट मिल जाए तो उनको वापस भेज दिया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा है कि इनमें से अधिकतर लोगो रोजगार की तलाश में भारत में घुस गए थे.  

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आपको याद दिला दें कि भारत ने अक्टूबर 2018 में भारत ने पहली बार सात रोहिंग्या मर्दों को म्यांमार भेजा था, जो शरणार्थी शिविरों में अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे. इस इस बात की कोई सूचना नहीं है कि म्यांमार भेजे गए लोग किस स्थिति में हैं. भारत सरकार की माने तो वर्तमान में यहां करीब 40,000 रोहिंग्या अलग-अलग जगहों पर रह रहे हैं.

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