मोदी सरकार ने आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ शुरू की धमाकेदार कार्रवाई! जिससे थर-थर कांपा पाकिस्तान…

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Modi government launches aggressive action against terrorism and separatism (जम्मू-कश्मीर) : बीते 14 फ़रवरी को ‘जम्मू-कश्मीर’ के ‘पुलवामा आतंकी हमले’ के बाद केंद्र की ‘मोदी सरकार’ ने राज्य समेत देश में आतंकवाद और अलगाववाद का सफाया करने के लिए अंतिम अध्याय लिखना शुरू कर दिया है. ‘मोदी सरकार’ के इस कदम के बाद इन लोगों में हडकंप मचा हुआ है.

मोदी सरकार ने आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ शुरू की धमाकेदार कार्रवाई! जिससे थर-थर कांपा पाकिस्तान...
नरेंद्र मोदी

ध्यान देने वाली बात यह है कि आतंकवाद का सफाया करने के लिए पाकिस्तान में जिहादी फैक्ट्रियों पर ‘भारतीय वायुसेना’ के हमले और कश्मीर में अलगाववादियों के घरों पर ‘राष्ट्रीय जांच एजेंसी’ (एनआईए) की छापेमारी यही संकेत दे रही है. इससे कश्मीर में अलगाववादियों और जिहादियों के समर्थकों में खलबली मची हुई है.

आपको बता दें कि जो लोग हिन्दुस्तान के खिलाफ जहर उगलते हैं उन अलगाववादियों ने कुछ दिनों से चुप्पी साध ली है और बयानबाजी में नपे तुले शब्दों का उपयोग कर कर रहे हैं, जिससे कोई बात उन पर भारी न पड़े. ध्यान देने वाली बात यह है कि मंगलवार 26 फ़रवरी की तड़के 3:30 बजे भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’ के एक बड़े ठिकाने को तबाह कर दिया है. इससे न सिर्फ आतंकी सरगना बल्कि ‘पाकिस्तानी सेना’ और उसकी खुफिया एजेंसी ‘आईएसआई’ से लेकर कश्मीर में सक्रिय अलगाववादी भी चौंक गए हैं.

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सूत्रों की माने तो अपने आका पाकिस्तान के घर में हुई कार्रवाई से सन्न अलगाववादी खेमा कुछ समझ पाता, उससे पहले एनआइए की टीम सात वरिष्ठ हुर्रियत नेताओं के घर पहुंच गई. जिनमें ‘मीरवाइज मौलवी उमर फारूक, अशरफ सहराई, यासीन मलिक, जफर अकबर फतेह, नसीम गिलानी, शब्बीर शाह और मसर्रत आलम’ शामिल हैं. दरअसल एनआइए ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया, लेकिन इन लोगों के घरों से जो साजो-सामान जब्त किया है, वह इन लोगों को ‘तिहाड़ जेल’ पहुंचा सकता है.

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आपको याद दिला दें कि शब्बीर शाह, नईम खान और कट्टरपंथी ‘सैयद अली शाह गिलानी’ के दामाद अल्ताफ फंतोश समेत एक दर्जन अलगाववादियों को एनआइए ने पहले ही डेढ़ साल से तिहाड़ जेल में डाल रखा है. आज तक इन लोगों की जमानत नहीं हुई है. मीरवाइज मौलवी उमर फारूक जैसे नेता भी कुछ ही शब्दों में कह रहे हैं कि यह छापे सिर्फ कश्मीरियों की आजादी की मांग दबाने के लिए है.

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आज स्थिति यह है कि कोई भी अलगाववादी नेता अब खुलकर आतंकियों के समर्थन करने की हिम्मत नहीं करता. कट्टरपंथी ‘सैयद अली शाह गिलानी’ और उनके सहयोगी ‘मोहम्मद अशरफ सहराई’ ने बीते चौबीस घंटों के दौरान अपने किसी भी बयान में हिंसा को सही नहीं ठहराया. सूत्रों की माने तो दोनों नेताओं के साथ-साथ मीरवाइज, जावेद मीर व बिलाल गनी लोन ने संयुक्तराष्ट्र की सिफारिशों का हवाला देते हुए कश्मीर मामले के समाधान पर जोर दिया है और प्रो. अब्दुल गनी बट ने आतंकी हिंसा के समर्थन में एक भी बयान नहीं दिया है.

जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के कपूर्व डिप्टी चीफ कमांडर ‘जावेद मीर’ भी कुछ नहीं बोले. इसके अलावा ‘यासमीन रजा’ और ‘फरीदा बहनजी’ जैसी महिला अलगाववादियों ने भी शांत हो गई हैं. इस मामले को लेकर फ्रेंडस ऑफ साउथ एशिया के चेयरमैन ‘सलीम रेशी’ ने कहा है कि पिछले कुछ दिनों की स्थिति को देखते हुए अंदाजा लगाया जा सकता है कि कश्मीर में अब केंद्र सरकार ‘आतंकवाद’ और ‘अलगाववाद ‘के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई कर रही है और अब रुकने के मूड में नहीं है.

मोदी सरकार ने आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ शुरू की धमाकेदार कार्रवाई! जिससे थर-थर कांपा पाकिस्तान...

मोदी सरकार की इस कार्रवाई को कुछ लोग कह रहे हैं कि यह सब ‘लोकसभा चुनाव’ को ध्यान में रखते हुए हो रहा है, परंतु मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं. कश्मीर और कश्मीरी जनता को लेकर केंद्र की सियासत को थोड़ा बहुत मैं अच्छी तरह समझता हूं.

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