संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत के विरोध मे नहीं बल्कि स्पॉट मे होना चाहिए खड़े, जानिए कैसे?

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23 जनवरी 2018 : शूटिंग के समय से ही विवादों मे घिरी इस फिल्म के प्रड्यूसर से लेकर इसके कलाकारों तक को विरोध, बैन, कोर्ट के फैसले के बावजूद हिंसक विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा है. हर दिन हजारों नए सवाल खड़े हो रहे है.

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत के विरोध मे नहीं बल्कि स्पॉट मे होना चाहिए खड़े, जानिए कैसे?
पद्मावत

और फिल्म को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही है हम आपको बता दे कि इस फिल्म को देखने के कुछ घंटों के बाद तक यह फिल्म न सिर्फ आंखों को जगमगाए रखती है बल्कि भंसाली की दिलचस्प कहानी कहने की कला दिल और दिमाग पर भी देर तक असर करती है. हम आपको बता दे कि फिल्म के इतने विरोध प्रदर्शन के बीच सवा तीन घंटे की फिल्म को काट कर कम किया गया है. लेकिन फिल्म में दिलचस्पी कहीं कम नहीं हुई.

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत के विरोध मे नहीं बल्कि स्पॉट मे होना चाहिए खड़े, जानिए कैसे?
पद्मावत  image source

हम आपको बता दे कि इस बात को भंसाली पहले ही लिखित में दे चुके हैं लेकिन एक बार हम भी सबसे बड़ी इस अफवाह को दूर करना चाहेंगे कि इस फिल्म में खिलजी और पद्मावती के बीच न तो कोई ड्रीम सीक्वेंस है और न ही कोई किसिंग सीन दर्शयाया गया है. बता दे कि दीपिका के सुन्दर चेहरे और राजपूती शान से भरी दमदार आंखों के सिवाय शायद ही उनके शरीर का कोई अंग हो, जिस पर दर्शकों का ध्यान जाए।

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत के विरोध मे नहीं बल्कि स्पॉट मे होना चाहिए खड़े, जानिए कैसे?
पद्मावत मे बदलाव image source

बता दे कि घूमर डांस में जो पहले कमर दिखाई दे रही थी उसे भी डिजिटली तरीके से ढक दिया गया है और मानिये आंखों को यह फर्क बिलकुल महसूस भी नहीं हो रहा है. अब जो रही बात पद्मावती के किरदार या इमेज को खराब दिखाने वाले आरोप की तो उन चुनिंदा पुरुषवादी लोगों को, जो शौर्य, बुद्धि और वीरता को हमेशा पुरुषों का गुण मानते हैं उन्हें ही इसका विरोध करना चाहिए.

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत के विरोध मे नहीं बल्कि स्पॉट मे होना चाहिए खड़े, जानिए कैसे?
पद्मावत image source

और बता दे जो इस समय महिला सम्मान के नाम पर इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें तो इसके सपॉर्ट में खड़े होना चाहिए. हम आपको बता दे कि सूफी शायर जायसी के फिक्शन पर ‘पद्मावती’ का किरदार बेस्ड है. और भंसाली इसमें महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश करते हैं, जिसे देखने के बाद पद्मावती का आत्मबलिदान मन में इज्जत का अहसास छोड़ता है. अगर ये फिल्म न बनती या बैन न की जाती तो पद्मावती के बारे में, राजपूती आन बान और शान के बारे में ज्यादा लोग नहीं जान पाते। जिन राज्यों ने इस पर टैक्स लगाया है उन्हें इसे टैक्स फ्री करने का आदेश दे दिया जाना चाहिए.

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