मिशन शक्ति को लेकर भारत के समर्थन में खड़ा हुआ अमेरिका! जिससे चीन-पाक में मचा हाहाकार…

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America stands in support of India on mission power (अमेरिका) : अभी-अभी ‘अमेरिका’ से ‘भारत’ के लिए बड़ी खबर आई है. जिसके बाद भारत को और भी शक्ति मिलेगी. सूत्रों की माने तो ‘व्हाइट हाउस’ द्वारा बनाए दबाव के बाद ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (नासा) ने फैसला लिया कि वह अपने भारतीय समकक्ष ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (इसरो) के साथ सहयोग को बरकरार रखेगा.

मिशन शक्ति को लेकर भारत के समर्थन में खड़ा हुआ अमेरिका! जिससे चीन-पाक में मचा हाहाकार...
व्हाइट हाउस

ध्यान देने वाली बात यह है कि कुछ समय पहले नासा ने ‘ऑर्बिटल डेबरिस’ (अतंरिक्ष में मौजूद मलबा) के कारण भारत के साथ सहयोग को निलंबित कर दिया था. यह मलबा 27 मार्च को भारत द्वारा ‘एंटी-सैटेलाइट परीक्षण’ के बाद पैदा हुआ था.

गुरुवार 4 अप्रैल को नासा अध्यक्ष ‘जेम्स ब्रिडेनस्टाइन’ ने भारत के परीक्षण को भयानक करार देते हुए कहा था कि उन्होंने इसरो अध्यक्ष ‘के सिवान’ को पत्र लिखा. जिसमे उन्होंने कहा कि ‘हमारी आपके साथ साझेदारी के तहत हमारा सहयोग बरकरार रहेगा. हम नासा-इसरो ह्यूमन स्पेस फ्लाइट्स वर्किंग ग्रुप, प्लेनेटरी साइंस वर्किंग ग्रुप, यूएस-इंडिया अर्थ साइंस वर्किंग ग्रुप और हेलियोफिजिक्स वर्किंग ग्रुप जैसी चीजों पर काम करते रहेंगे.’ 

साथ ही उन्होंने कहा कि आखिर उन्होंने अपना फैसले में बदलाव क्यों किया. उनका कहना है कि ‘व्हाइट हाउस से मिले मार्गदर्शन के आधार पर हम आपके साथ भविष्य में काम करना चाहते हैं.’

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जेम्स ब्रिडेनस्टाइन

इससे पहले इसरो अध्यक्ष को उन्होंने एक पत्र लिखा था. गुरुवार को इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा,नासा-इसरो ह्यूमन स्पेस फ्लाइट वर्किंग ग्रुप कार्यक्रम के तहत गतिविधियों को निलंबित किया जाता है.’

उनके इस पात्र को देखकर ऐसा लगता है कि ‘व्हाइट हाउस’ के हस्तक्षेप के बाद, दोनों संगठनों के बीच सहयोग बरकरार रहेगा. आपको बता दें कि नासा अध्यक्ष ने बैठक में भारत के उपग्रह भेदी मिसाइल परीक्षण की आलोचना की थी क्योंकि  भारत के इस परिक्षण से अंतरिक्ष में मलबा पैदा हो गया और इससे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को खतरा हो सकता है.

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जेम्स ब्रिडेनस्टाइन ने स्पष्ट करते हुए कहा कि जो मलबा अंतरिक्ष में जमा हुआ है वह अमेरिका के लिए एक गंभीर समस्या है और यह अंतरिक्ष में सक्रिय सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है. इसके आगे उन्होंने कहा कि ‘हम आपके मलबे की लगातार निगरानी करना जारी रखेंगे ताकि हमारे मानव अतंरिक्ष अभियानों खासतौर से अंतरराष्ट्रीय अतंरिक्ष स्टेशन की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके.’

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के. सिवान

सूत्रों की माने तो गुरुवार 4 अप्रैल को ‘पेंटागन’ ने नासा के उलट कहा था कि वह अपने पूर्ववर्ती आकलन पर खड़ा है कि भारत का एंटी-सैटेलाइट मलबा अतंरिक्ष में अपने आप जल जाएगा. वहीं 28 मार्च को अमेरिका के कार्यकारी रक्षा सचिव ‘पैट्रिक शनाहन’ ने मलबे से होने वाले खतरों को खारिज कर दिया था.

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