उत्तराखंड के रास्ते भारतीय सीमा में 400 मीटर अंदर घुसकर चीनी सैनिकों ने एक बार फिर की घुसपैठ

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Bardhoti: Chinese army infiltrated 400 meters into Indian territory (चमोली) : अभी-अभी ‘उत्तराखंड’ के ‘चमोली’ से सटे हुए ‘बाड़ाहोती’ इलाके से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. सूत्रों की माने तो ‘चीनी सैनिक’ बाड़ाहोती में चार किलोमीटर तक आ गए. इससे पहले चीनी सेना ने 6 अगस्त, 14 अगस्त और 15 अगस्त को चीन के सैनिक और उनके नागरिको ने बाड़ाहोती के रिमखिम पोस्ट के नज़दीक घुसपैठ की. ITBP सूत्रों के अनुसार चीनी सेना 400 मीटर से लेकर 3.5 किलोमीटर तक अंदर घुस गए. 

Baradoti: Chinese army infiltrated 400 meters into Indian territory
चीनी सैनिक

ध्यान देने वाली बात यह है कि इससे पहले भी चीन सैनिकों ने 26 जुलाई को भारतीय सीमा में आकर घुसपैठ की थी. जानकारी के अनुसार बाड़ाहोती इलाके में लगभग 150-200 की संख्या में चीनी सैनिक भारतीय सीमा में आ गए थे. सूत्रों की माने तो ‘आइटीबीपी की अग्रिम चौकी’ रिमखिम पर तैनात जवानों से नियमित गश्त के दौरान चीनी सैनिकों का सामना हुआ तो आइटीबीपी जवानों के चीनी सैनिकों को देखते ही वापस लौटा दिया था.

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Baradoti: Chinese army infiltrated 400 meters into Indian territory
आइटीबीपी जवान

जानकारी के अनुसार बता दें कि जोशीमठ से 105 किलोमीटर दूरी पर स्थित चमोली में चीन से जुड़ी भारतीय सीमा घुसपैठ की दृष्टि से संवेदनशील मानी जाती है. खासकर 80 वर्ग किलोमीटर में फैला ‘बाड़ाहोती चारागाह’ इलाका क्योंकि यहां के स्थानीय लोग अपने मवेश्यिों को लेकर आते हैं. आपको याद दिला दें कि जून में इस इलाके में दो चीनी हेलीकॉप्टर भी देखे गए थे. जिसके बाद प्रशासन का एक दल इस इलाके की जांच के लिए भी गया था. वहीं 18 जुलाई को प्रशासन का 17 सदस्यीय दल सीमावर्ती क्षेत्र का जायजा लेने निकला था, परंतु भारी बारिश के कारण रास्ते खराब होने ई वजह से टीम 18 जुलाई को वापस आना पड़ा. ध्यान देने वाली बात यह है कि 1 साल में चार बार प्रशासन की टीम बाड़ाहोती इलाके का जायजा लेने के लिए जाती है.
Baradoti: Chinese army infiltrated 400 meters into Indian territory

सूत्रों की माने तो इससे पहले साल 2014 में भी इस इलाके में चीन का विमान देखा गया था. जुलाई 2016 में इस इलाके में निरीक्षण को गई राजस्व टीम से चीनी सेना का सामना हुआ. सैनिकों ने टीम को लौटने को कहा. इस बात की सूचना ‘केंद्र सरकार’ को दी गई थी. ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्ष 2015 में चीनी सैनिकों द्वारा चरवाहों के खाद्यान्न को बर्बाद करने की घटना भी प्रकाश में आई थी.

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