PM मोदी के शानदार फैसले पर अब मीलॉर्ड ने मारा अड़ंगा! सवर्ण समुदाय के खिलाफ ये महागठबंधन पार्टी पहुंची कोर्ट

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नई दिल्ली : एक तरफ जहाँ पहली बार मोदी सरकार ने सवर्ण समुदाय को आरक्षण देने की बात कही, वही अब कुछ राजनीतिक पार्टियां इस फैसले से बौखला गयी हैं और अपने निजी स्वार्थ हेतु इस आरक्षण पर रोक लगवाने के लिए कोर्ट पहुंच गयी है.

PM मोदी के शानदार फैसले पर अब मीलॉर्ड ने मारा अड़ंगा! सवर्ण समुदाय के खिलाफ ये महागठबंधन पार्टी पहुंची कोर्ट
नरेन्द्र मोदी : प्रधानमंत्री

अभी मिल रही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार के अगड़ी जाति के आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के निर्णय के खिलाफ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है. इस याचिका में डीएमके ने केंद्र द्वार सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने को एससी-एसटी के खिलाफ बताया है. यह याचिका डीएमके पार्टी संगठन के सचिव आरएस भारती ने फाइल किया है.

जबकि बता दें मोदी सरकार में SC, ST OBC किसी के भी आरक्षण को छुआ तक नहीं गया है लेकिन फिर भी वामपंथी संगठन और वामपंथी पार्टियां स्वर्ण समुदाय को बराबरी का हक़ मिलता हुए देख नहीं पा रही हैं, पचा नहीं पा रही हैं. ये सब राजनीती से प्रेरित अड़चन लगाने की कोशिश हो रही है.

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एम के स्टालिन

तो वहीँ अब वामपंथी जज भी किसी और अहम् मुद्दे पर याचिका तुरंत ख़ारिज कर देते हैं लेकिन केंद्र सरकार के खिलाफ याचिका में वामपंथी जज भी दिलचस्पी दिखाते हैं. मद्रास हाई कोर्ट ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दिए जा रहे 10 प्रतिशत आरक्षण पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. इस नोटिस का जवाब केंद्र सरकार को 18 फरवरी से पहले देना होगा.

DMK महागठबंधन का हिस्सा है और राहुल गाँधी को पीएम बनवाना चाहती है. अभी हाल ही में इसके नेताओं ने राहुल का खुल के समर्थन किया था. तो वहीँ हाल ही में ममता बैनर्जी ने भी आरक्षण वाले कानून को लागू करने से मना कर दिया था और अभी तक एक भी कांग्रेस शासित राज्य ने आरक्षण के फैसले को लागू नहीं किया है. इससे स्वर्ण समाज को समझने की ज़रूरत है कि कौन उनके पक्ष में खड़ा है और कितनी सारी पार्टियां विरोध में खड़ी है.

बता दें कि संसद में आरक्षण बिल पर वोटिंग से पहले डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने इस आरक्षण बिल को सिरे से खारिज कर दिया था. अब डीएमके द्वारा मद्रास हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि केंद्र द्वारा बनाया गया यह कानून संविधान द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ है.

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मद्रास हाईकोर्ट

ये याचिका 22 पन्नों की थी. इसमें डीएमके ने 19 प्वाइंट में अपनी बात रखी. केवल डीएमके ही नहीं बल्कि दिल्ली के भी एक गैर सरकारी संगठन ने सामान्य वर्ग को दिए जा रहे आरक्षण की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी. एक एनजीओ यूथ फॉर इक्विलिटी ने सु्प्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसमें इस आरक्षण बिल के लिए संविधान संसोधन अधिनियम पर रोक लगाने की मांग की गई थी.

बता दें कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने फैसला किया है कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए. ये बिल लोकसभा और राज्यसभा में पास किया जा चुका है. यहां तक की भाजपा शासित कई राज्यों में इसे लागू करने की भी घोषणा कर दी गई है. हालांकि कई राज्य और पार्टियां अभी भी इसका विरोध कर रही हैं.

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