चंद्रमा पर पहुंचकर भारत रचेगा इतिहास! अगले साल चांद की सतह पर उतारेगा चंद्रयान-2 रोवर

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Chandrayaan-2 rover will land on moon surface next year (नई दिल्ली) : भारत अब एक और कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है, जिसके बाद दुनियाभर में भारत का वर्चस्व और भी बढ़ेगा. जानकारी के अनुसार आपको याद दिला दें कि ‘इसरो’ ने चांद पर ‘चंद्रयान-1’ भेजा था. जिसके बाद एक बाद फिर से इसरो यही दोहराने वाला है. खबर मिली है कि ‘चंद्रयान-2’ को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भेजने की तिथि तय कर दी है.

Chandrayaan-2 rover will land on moon surface next year
चंद्रयान-1

भारत इस मिशन को करने के बाद चांद पर पहुंचने वाला चौथा दैश बन जाएगा. हालांकि सबसे महत्वाकांक्षी ‘चंद्रयान-2’ मिशन की तारीख तय हो गई है. इस मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो पहली बार अपने यान को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने का प्रयास करेगा. भारत के चंद्रयान-1 अभियान ने ही पहली बार चांद पर पानी की खोज की थी. ध्यान देने वाली बात यह है कि चंद्रयान-2 इसी अभियान का विस्तार है.

Chandrayaan-2 rover will land on moon surface next year
चंद्रयान-2 रोवर

सूत्रों की माने तो इस मिशन की लांच तारीख इससे पहले भी कई बात स्थगित कर दी गई है परंतु अब अगले साल जनवरी में इसे लांच करने की पूरी तैयारी कर ली है. आपको बता दें कि इससे पहले ‘चंद्रयान-2’ को अक्टूबर के पहले सप्ताह में  लांच किया जाना था, लेकिन फिर उसे दिसंबर, 2018 तक स्थगित कर दिया गया. 

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चांद पर पहुंचने वाला चौथा देश बनेगा भारत

सूत्रों की माने तो अब तक अमेरिका, रूस और चीन पहले ही चांद पर पहुंच चुके हैं. जिसके बाद अब भारत और इजराइल के बीच चांद पर पहुंचने की रेस है. ऐसे में यह देखना होगा कि भारत और इजरायल में से कौन सा देश चांद पर पहुंचने वाला चौथा देश बनेगा.

 

Chandrayaan-2 rover will land on moon surface next year
नरेंद्र मोदी

भारत की चांद पर यह दूसरी यात्रा

भारत चांद पर पहले भी जा चुका है, जिसके बाद भारत की चांद पर यह दूसरी यात्रा होगी. चंद्रयान-2 मिशन के द्वारा भारत दक्षिण ध्रुव के करीब सॉफ्ट लैंडिंग कर, छह पहियों वाले रोवर को स्थापित करने की तैयारी में है, जिससे कि चांद की सतह से जुड़ी जानकारियां प्राप्त की जा सके. इस मिशन के लिए भारत अपने सबसे भारी रॉकेट ‘बाहुबली’ का उपयोग कर रहा है. 

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इस यान का वजन 3,290 किलो है और यह यान चंद्रमा के चारों दिशाओं में चक्कर लगाएगा और उसका अध्ययन करेगा. आपको बता दें कि यह यान चांद की सतह से वैज्ञानिक सूचनाएं और नमूने एकत्र करेगा. यह पेलोड चांद के खनिज, तत्वों की संरचना, चांद के वातावरण और वाटर आइस का भी अध्ययन करेगा. इसरो ने अपना पहला चंद्र अभियान ‘चंद्रयान-1’ वर्ष 2008 में लांच किया था. जिसके बाद अब ‘चंद्रयान-2’ को चांद पर भेजने की तैयारी की है. 

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चंद्रयान-2 ऐसे रचेगा इतिहास

चंद्रयान-2 के चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने के बाद, लैंडर अपने ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा
चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास लैंडिंग करेगा।
लैंडर के अंदर लगे 6-पहिए वाले रोवर अलग हो जाएंगे और चंद्रमा की सतह पर आगे बढ़ेंगे।
यह चंद्रमा की सतह पर 14 दिन तक रह पाएगा।
चंद्रयान-2 150-200 किमी तक चलने में सक्षम होगा।
रोवर 15 मिनट के भीतर चंद्रमा की सतह के आंकड़े और छवियों को पृथ्वी पर भेज देगा।
14 दिनों के बाद रोवर स्लीप मोड में जाएगा।

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