लोकसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी को लगा अब तक सबसे जोरदार झटका! जिसके बाद टीएमसी में पसरा मातम…

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Mamata Banerjee suffered the most shock before the Lok Sabha elections (पश्चिम बंगाल) : इस बात को हम भलीभांति जानते हैं कि इसी साल ‘लोकसभा चुनाव’ होने वाले हैं जिसको लेकर सभी राजनितिक पार्टियां जोर लगा रही है. इसी बीच ‘भाजपा’ के खिलाफ विरोध का झंडा उठाने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ‘ममता बनर्जी’ को लेकर एक बड़ी खबर आई है. इस खबर के बाद ममता की पार्टी में हलचल पैदा हो गई है.

लोकसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी को लगा अब तक सबसे जोरदार झटका! जिसके बाद टीएमसी में पसरा मातम...
ममता बनर्जी

ध्यान देने वाली बात यह है कि बुधवार 9 जनवरी को मुख्यमंत्री ममता को पहला झटका बिष्णुपुर के सांसद ‘सौमित्र खान’ को लेकर लगा. उन्होंने अपनी पार्टी को छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है.

सूत्रों की माने तो बोलपुर से सांसद ‘अनुपम हजारे’ भी अपनी पार्टी को छोड़ भाजपा नमे शामिल हो सकते हैं. इसी बिच भाजपा के एक नेता ने कहा है कि सौमित्र खान के अलावा टीएमसी के करीब नेता हमारी पार्टी में शालिम होने के लिए तैयार हैं. लेकिन भाजपा ने अभी उन नामों को सामने लेन से मना कर दिया है, जो ऐसा करने के लिए तैयार हैं. खबर मिली है कि ‘अर्पिता घोष’ और ‘सताब्दी रॉय’ भी टीएमसी छोड़ सकते हैं.

इसके अलावा यह भी खबर मिली है कि पार्टी में पूर्व में नंबर दो की हैसियत रखने वाले ‘मुकुल रॉय’ के करीबी और पार्टी से असंतुष्ट दो सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं.

लोकसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी को लगा अब तक सबसे जोरदार झटका! जिसके बाद टीएमसी में पसरा मातम...

चौंका देने वाली बात यह है कि करीब 10 दिनों से टीएमसी में यह हलचल जारी है. इस हलचल के बीच 19 जनवरी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता में भाजपा विरोधी एक रैली करने वाली हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि ममता की पार्टी ने खान और हजारे को पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से पार्टी से बर्खास्त कर दिया है. इसके अलावा उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं. दोनों सांसदों द्वारा भाजपा में शामिल होने की बात पिछले साल मानसून सत्र से ही जारी थी क्योंकि यह साफ हो गया था कि पार्टी उन्हें लोकसभा चुनाव में दोबारा नामांकित नहीं करेगी.

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भाजपा में शामिल हुए सौमित्र खान ने मुख्यमंत्री ममता पर हमला करते हुए कहा है कि ‘आज के समय में टीएमसी पार्टी नहीं रही बल्कि ममता और उसके भतीजे अभिषेक की निजी कंपनी बन गई है. चौंका देने वाली बात यह है कि बंगाल में सिंडिकेट और पुलिस राज साथ-साथ चल रहा है।’ बांकुरा के पर्यवेक्षक ‘अभिषेक’ का कहना है कि ‘वर्ष 2011 में सौमित्र कांग्रेस और तृणमूल के उम्मीदवार थे. वह तृणमूल में शामिल हो गए और 2014 में सांसद चुने गए. उन्हें अपने सांसद निधि कोष के खर्चों के खाते प्रदान करने चाहिए। वह लोगों के प्रति जवाबदेह हैं.

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अभिषेक

सूत्रों की माने तो सौमित्र खान में टीएमसी छोड़ने का फैसला तब लिया जब बांकुरा के एसडीपीओ ‘सुकोमल दास’ ने उनके खिलाफ प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में किए भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमा दर्ज किया. आपको बता दें कि एक दिन पहले ही उनके असिस्टेंट ‘सुशांत दास’ को पुलिस ने गिरफ्तार किया. 

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