दुश्मनों को नेस्तानाबूद करने के लिए मोदी सरकार ने भारतीय वायुसेना को लेकर लिया ये धमाकेदार फैसला…

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Modi Government took this blatant decision about the Indian Air Force to put an end to the enemies (नई दिल्ली) :  केंद्र की ‘मोदी सरकार’ ने ‘भारतीय वायुसेना’ की शक्ति में इजाफा करने के लिए अहम फैसला लिया है. जिसके बाद दुश्मनों में हडकंप मच गया है. सूत्रों की माने तो भारत बालाकोट जैसे हमलों को अंजाम देने के लिए हल्के ‘ड्रोन विमान’ तैयार कर रहा है.

दुश्मनों को नेस्तानाबूद करने के लिए मोदी सरकार ने भारतीय वायुसेना को लेकर लिया ये धमाकेदार फैसला...

ध्यान देने वाली बात यह है कि अगली पीढ़ी की विमानन तकनीक को सामने लाने की कोशिश के तहत ‘हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड’ (एचएएल) और बंगलूरू स्थित ‘स्टार्टअप न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी’ में मौजूद इंजीनियरों और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों की टीम इस कार्य में जुटी हुई है. कहा जा रहा है कि आने वाले दो सालों में ये ड्रोन विमान ‘भारतीय वायुसेना’ में शामिल हो सकते है. 

मानवरहित ड्रोन विमान दुश्मक के इलाके में घुसकर उनके ठिकानों को तबाह कर सकते हैं. ड्रोन विमानों का झुंड दुश्मन के इलाके में प्रवेश करेगा और निशाने तक उड़कर पहुंचेगा. फिर अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहायता से बालाकोट में आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’ के ठिकानों की भांति हमले करेगा.

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सूत्रों की माने तो आतंकी ठिकानो को तबाह करने के लिए दर्जनों ड्रोन विमान होंगे. यदि ड्रोन विमान’ को दुश्मन लेख लेता है तो वह कुछ ड्रोन मार गिरा सकता है परंतु झुंड में मौजूद विमानों की संख्या इतनी ज़्यादा होगी कि सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों वाले दुश्मन के रक्षा कवच के पलटवार के बावजूद कुछ विमान चकमा देकर मिशन को पूरा कर लेंगे. 

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इन ड्रोन विमानों को इतनी ऊंचाई से छोड़ा जाएगा जहां से इनको छोड़ने वाला विमान दुश्मन विमानों तथा मिसाइलों से सुरक्षित हो. इन विमानों में बैटरी का उपयोग किया गया है जो इन्हें 100 किलोमीटर प्रति घंटे से भी तेज रफ्तार दे सकते हैं. यह बैटरी दो घंटे तक चलेगी और इतने वक्त में ड्रोन विमानों का झुंड निशाने तक पहुंच जाएगा.

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प्रोजेक्ट मैनेजर ने जानकारी देते हुए कहा कि सभी ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक डेटा-लिंक्स द्वारा एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े रहते हैं. अपने इन्फ्रारेड तथा इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसरों का उपयोग कर दुश्मन की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, दुश्मन के रडार और सतह पर खड़े दुश्मन विमानों जैसे अपने निशानों को तलाश लेते हैं.

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