भव्य राम मंदिर निर्माण को लेकर जंतर-मंतर पर जुटे मुस्लिम समुदाय के लोग! कर डाली ये बड़ी मांग…

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People of Muslim community engaged in Jantar-Mantar for building Ram temple! This great demand of the temple (नई दिल्ली) : आपको याद दिला दें कि ‘अयोध्या’ में भव्य ‘राम मंदिर’ निर्माण को लेकर मामला गरमाया हुआ है. अब यह मामला ‘उच्चतम न्यायालय’ में भी पहुंच चुका है. जिसको लेकर पिछले काफी समय से विवाद लगातार जारी है.रविवार 16 दिसंबर को भव्य राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर देशभर से जुटे ‘मुस्लिम’ समुदाय के लोगों ने जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया.

भव्य राम मंदिर निर्माण को लेकर जंतर-मंतर पर जुटे मुस्लिम समुदाय के लोग! कर डाली ये बड़ी मांग...
राम मंदिर

इस दौरान उन्होंने कहा है कि राम मंदिर को तोड़कर उस स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया गया था. यही वजह है कि वह जगह इस्लाम के अनुसार पूजा स्थल नहीं था. इस मामले पर सियासत करना गलत है. इसे लेकर उन्होंने सभी दलों से राममंदिर के निर्माण की अपील भी की. आपको बता दें कि ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ के बैनर तले आयोजित धरना-प्रदर्शन के बाद ‘केंद्र सरकार’ को ज्ञापन भी सौंपा गया. 

इस मामले में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक ‘इंद्रेश कुमार’ का कहना है कि देश का आम मुस्लिम भी राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में है. मुस्लिम समुदाय के लोग वे ‘भगवान श्रीराम’ को ‘इमाम-ए-हिंद’ के नाम से जानते हैं. लोकप्रिय गीत ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा’ लिखनेवाले प्रसिद्ध उर्दू कवि ‘अल्लामा इकबाल’, जो विभाजन के बाद पाकिस्तान गए, वह भी भगवान राम को ‘इमाम-ए-हिंद’ के रूप में गौरवान्वित करते हुए लिखते हैं- ‘है राम के वजूद पे हिन्दोस्तां को नाज, अहले नजर समझते हैं उसको इमामे हिंद.’

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इंद्रेश कुमार

सूत्रों की माने तो पवित्र ‘कुरान’ में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि ‘अल्लाह’ ने एक लाख चौबीस हजार नबियों को अलग-अलग समय पर और अलग-अलग देशों और मानव समूहों में मार्गदर्शन करने के लिए भेजा था और ‘पैगंबर मोहम्मद’ उनमें से आखिरी नबी माने जाते हैं. आपको यह भी बता दें कि कुरान में लगभग 20-25 नबियों का नाम भी दिया गया है.

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आज से 1400 साल पहले आए पैगंबर ने भी इस बात को माना है कि भगवान श्रीराम इस धरती पर उनसे कई सदी पहले आए थे. पैगंबर और उनके सच्चे अनुयायियों की आंखों में श्रीराम स्वयं ही एक नबी हैं. वे सब भी यही मानते हैं कि श्रीराम का जन्मस्थान अयोध्या ही है. परंतु 1526 ईसवी में ‘बाबर’ व उसके सरदार ‘मीर बांकी’ ने राममंदिर को नष्ट कर दिया था. जिस बाबर के सरदार ने इस मंदिर का विध्वंस कर मस्जिद बनवाई, उस बाबर से भारत के मुसलमानों का कोई वास्ता नहीं हैं.

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पैगंबर मोहम्मद’

विवादित जगह के बिना भी नमाज के लिए बेहतर 

राम मंदिर निर्माण को लेकर मौलाना ‘कौकब मुज्तबा’ ने कहा है कि इस्लाम के अनुसार पूरी भूमि ही नमाज अदा करने के लिए पाक और पवित्र मानी गई है. नमाज के समय एक सच्चा मुसलमान कभी भी कहीं भी रहकर अपनी नमाज अदा कर सकता है. किसी पवित्र ये विवादित स्थल के बिना भी भूमि पर बनी मस्जिद नमाज के लिए बेहतर स्थान है.

इस्लाम की माने तो पवित्र भूमि वह है जो ‘वक्फ’ में दी जाती है, या किसी के द्वारा दान की जाती है या सच्ची मेहनत की कमाई से खरीदी जाती है. परंतु हर स्थिति में बुनियादी नियम यही है कि उस भूमि पर किसी अन्य धर्म की कोई भी संरचना नहीं होनी चाहिए. यदि उस संरचना को नष्ट करना जरूरी हो तो उसके लिए उचित मुआवजे का भुगतान किया जाना चाहिए.

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ध्यान देने वाली बात यह है कि इस प्रदर्शन में मौलाना शोएब काशमी, मौलाना कोकब मुज्तबा, मौलाना ‘रजा रिजवी’ के अलावा जेएनयू के प्रोफेसर ‘डा शाहिद अख्तर’ समेत कश्मीर से नजीर मीर, हरियाणा से ‘खुर्शीद राजका’, दिल्ली से यासिर जिलानी, गुजरात से जहीर भाई कुरैशी, उत्तर प्रदेश से जहीर अहमद, राजस्थान से आसिफा अली, बिहार से अल्तमस बिहारी समेत अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

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