राजस्थान : विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर उठा जाट आंदोलन का मुद्दा! जाट नेताओं ने सरकार को दे डाली ये धमकी

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Rajasthan: Issue of raising Jat movement once again before assembly elections (राजस्थान) : आपको याद दिला दें कि इसी साल ‘राजस्थान’ में ‘विधानसभा चुनाव’ होने वाले हैं. चुनाव को ध्यान में रखते हुए एक फिर से यहां जाट आरक्षण का मामला गरमा गया है. सूत्रों की माने तो शुक्रवार 4 अक्टूबर को राज्य के जाट नेताओं ने आंदोलन करने की धमकी दी है. उन्होंने कहा है कि सरकार से आज शाम को बातचीत का आश्वासन मिला है. अगर सरकार हमारी बात नहीं मानती है तो कल से ‘जाट आंदोलन’ होगा.

राजस्थान : विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर उठा जाट आंदोलन का मुद्दा! सरकार को दे डाली ये धमकी
जाट आंदोलन

राजस्थान के भरतपुर से जाट नेता और ‘कुम्हेर डीग’ से कांग्रेस विधायक ‘विश्वेंद्र सिंह’ ने राज्य सरकार को आज शाम तक का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि सरकार शाम तक हमारी मांगों को पूरा करने की तरफ सकारात्मक कदम नहीं उठाती है तो कल से जाट आंदोलन शुरू होगा. साथ ही इस बार का आंदोलन इतना बड़ा होगा, जिसको संभाला नहीं जा सकेगा. इसके आगे उन्होंने कहा है कि पिछले आंदोलनों में मैंने जनता को समझा दिया था परंतु इस बार जनता बिल्कुल नहीं मानेगी.

राजस्थान : विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर उठा जाट आंदोलन का मुद्दा! सरकार को दे डाली ये धमकी
विश्वेंद्र सिंह

सूत्रों के अनुसार जाट नेताओं अपनी मांग रखी है कि भरतपुर, धौलपुर के जाटों को केंद्र में आरक्षण दिया जाए. इसके अलावा पुराने आंदोलकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाए. जो लोग आंदोलन की धमकी दे रहे हैं उन्होंने कहा है कि इन दोनों मुद्दों को लेकर ‘राज्य सरकार’ पिछले एक वर्ष से आश्वासन दे रही है. आपको याद दिला दें कि पिछले साल विश्वेंद्र सिंह के नेतृत्व में हजारों समर्थकों ने जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर धरना देकर गिरफ्तारी दी थी.

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वसुंधरा राजे

इसके आगे उन्होंने कहा है कि यदि तीन दिनों के अंदर जाट आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए और जाटों को ओबीसी श्रेणी के अतंर्गत आरक्षण नहीं दिया गया तो 5 अक्टूर से आंदोलन होगा. आपको बता दें कि जाटों के इस अल्टीमेटम का आज आखिरी दिन है. दूसरी तरफ जिला प्रशासन और राज्य सरकार जाट नेताओं को समझाने की कोशिश कर रही है. अगर सरकार उनकी बातों को नहीं मानती है तो प्रदेश को एक बार फिर से आंदोलन की आग में जलना पड़ेगा.

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