देश की सुरक्षा को देखते हुए मोदी सरकार ने लिया ये ऐतिहासिक फैसला! जिससे दुश्मनों में मची खलबली

104

These powerful weapons will now buy India from Israel after Russia (नई दिल्ली) : सूत्रों की माने तो हाल ही में ‘भारत’ ने ‘रूस’ से ‘S-400 एयर डिफेंस’ सौदा किया है. जिसके बाद भारत ने अब इजरायल के आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स खरीदने के लिए एक बड़ा सौदा किया है. खबर मिली है कि इस सौदे के लिए इजरायल की ‘एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज’ (आईएआई) को 777 मिलियन डॉलर का अनुबंध मिला है.

देश की सुरक्षा को देखते हुए मोदी सरकार ने लिया ये ऐतिहासिक फैसला! जिससे दुश्मनों में मची खलबली
नरेंद्र मोदी

ध्यान देने वाली बात यह है कि इस अनुबंध के तहत इजरायली कंपनी ‘भारतीय नौसेना’ में शामिल 7 जहाजों को ‘एलआरएसएएम एयर’ और ‘मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स’ देगी. साथ ही आपको यह भी बताते चले कि इस सिस्टम का उपयोग इजरायली नौसेना के अलावा भारतीय नौसेना, वायु सेना और थल सेना करती हैं.

यह भी पढ़े : रूस देगा भारत को दुनिया का सबसे विनाशकारी हथियार!

आईएआई मुख्य कार्यकारी अधिकारी ‘निमरद शेफर’ ने इस सौदे को लेकर कहा है कि भारत के साथ हमारी साझेदारी सालों पुरानी है और हम अब संयक्त रूप से सिस्टम के विकास और उत्पादन पर काम कर रहे है.

देश की सुरक्षा को देखते हुए मोदी सरकार ने लिया ये ऐतिहासिक फैसला! जिससे दुश्मनों में मची खलबली
निमरद शेफर

इसके आगे शेफर ने कहा कि भारत आईएआई के लिए एक बहुत बड़ा बाजार है, यही कारण है कि हम भारत में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं.

ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले साल हमारी कंपनी ‘एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज’ (आईएआई) ने भारतीय थलसेना और नौसेना को मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति के लिए करीब 2 अरब डॉलर का सौदा किया था. जिसके बाद ‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड’ के साथ मिलकर 630 मिलियन डॉलर का अनुबंध ‘बराक 8’ की आपूर्ति के लिए किया सौदा हुआ था. जानकारी के अनुसार यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम है.

देश की सुरक्षा को देखते हुए मोदी सरकार ने लिया ये ऐतिहासिक फैसला! जिससे दुश्मनों में मची खलबली
एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई)

सूत्रों की माने तो बराक मिसाइल सतह से हवा में मार करने में सक्षम है. जहाज पर इस मिसाइल का उपयोग एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के रूप में किया जाता है. इसे आईएआई ने ‘इजरायल रक्षा मंत्रालय’ और ‘भारतीय रक्षा अनुसंधान’ ने मिलकर तैयार किया है. दोनों देशों की सेनाएं इसका उपयोग करती हैं. 

loading...