मोदी सरकार में भारतीय नौसेना को मिली ये बड़ी शक्ति! जिससे दुश्मनों में फैली सनसनी…

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This great power of the Indian Navy received in Modi Raj! Sensation spread by enemies (नई दिल्ली) : अभी-अभी भारत के लिए एक अच्छी खबर आई है. जिसके बाद दुश्मनों में हलचल पैदा हो गई है. सूत्रों की मानर तो ‘भारतीय नौसेना’ ने मध्‍यम दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली ‘मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल’ (एमआरएसएएम) का सफल परीक्षण किया.

मोदी राज में भारतीय नौसेना को मिली ये बड़ी शक्ति! जिससे दुश्मनों में फैली सनसनी...

इस परिक्षण के बाद भारतीय नौसेना उन देशों में शामिल हो गया है जिसके पास यह विशिष्‍ट क्षमता मौजूद है. यह मिसाइल 70 किमी के दायरे में आने वाली मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोन, निगरानी विमानों और अवाक्स (हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली) को निशाना बना सकती है. यह हवा से एकसाथ आने वाले कई दुश्मनों पर 360 डिग्री में घूमकर एकसाथ हमला करने में सक्षम है.

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सूत्रों की माने तो इसका परिक्षण ‘आईएनएस कोच्चि’ और ‘आईएनएस चेन्‍नई’ ने पश्चिमी समुद्र तट पर किया. इस दौरान विभिन्‍न हवाई टारगेट को तबाह कर दिया. नौसेना के लिए इस मिसाइल को ‘इजरायल एयरोस्‍पेस इंडस्‍ट्रीज’ और ‘डीआरडीएल’ हैदराबाद और ‘डीआरडीओ’ ने संयुक्‍त रूप से नौसेना के लिए विकसित किया है. भारत डायनामिक्‍स लिमिटेड ने एमआरएसएएम का निर्माण किया है. जमीन से हवा में मार करने वाले इन मिसाइलों को कोलकाता क्लास के विध्‍वंसक युद्धपोत में लगाया जा सकता है. भविष्‍य में भारतीय नौसेना के सभी युद्धपोतों में भी इसका इस्‍तेमाल हो सकता है.

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एमआरएसएएम मिसाइल की ये है विशेषता

1- 360 डिग्री पर घूमकर विभिन्न तरह के खतरों के समय आसानी से निपट सकती है.

2- इस मिसाइल लम्बाई 14.76 फीट और 276 किलोग्राम वजन है .

3- 2469.6 किमी प्रति घंटे की गति से दुश्मन पर कर सकती है हमला.

4- 70 किमी के दायरे में आने वाली मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोनों, निगरानी विमानों और अवाक्स (हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली) को मार गिराएगी.

200 मिसाइलों का इजरायल से हुआ समझौता

ध्यान देने वाली बात यह है कि एमआरएसएएम का मौजूदा संस्करण ‘भारतीय वायुसेना’ और ‘भारतीय नौसेना’ में है. डीआरडीओ ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ‘इजरायल एयरोस्‍पेस इंडस्‍ट्रीज’ (आईएआई) के साथ 17 हजार करोड़ रुपये का समझौता हुआ है. इसके तहत 40 लॉन्चर्स और 200 मिसाइलों का निर्माण किया जाएगा. साल 2020 तक मिसाइल प्रणाली का पहला सेट विकसित हो जाएगा. 2023 तक इन मिसाइलों की तैनात कर दिया जाएगा. आईएआई ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच यह सबसे बड़ा सिंगल समझौता है. एमआरएसएएम को ‘आईएनएस विक्रांत’ औरनौसेना के कोलकाता-क्लास डेस्ट्रॉयर्स पर इंस्टॉल किया जाएगा. अमेरिका और रूस के साथ अब इजरायल भी भारत के लिए हथियारों का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है.

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भारत का रूस से साथ हुआ था घातक मिसाइलों का सौदा

सूत्रों की आमने तो इससे पहले भारत ने रूस के साथ ‘एस-400’ डिफेंस मिसाइल सिस्टम का सौदा किया था, जो देश को होस्टाइल जेट, बम, ड्रोन और मिसाइलों से खतरे से बचाने में सक्षम है. भारत में इन मिसाइलों को पाकिस्तान और चीन से लगी सीमा पर तैनात कर सकता है. यह सौदा इसी महीने के पहले हफ्ते में रूस के राष्ट्रपति ‘व्लादिमीर पुतिन’ की भारत यात्रा के दौरान साफ हुआ. यह एक साथ 36 जगह टारगेट बना सकती है. साथ ही एक साथ 72 मिसाइल लॉन्च कर सकती है.

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