बसपा प्रमुख को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दिया ये बड़ा झटका! जिससे मुश्किलों में घिरी मायावती

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This major blow given by the Allahabad High Court to the BSP chief! Mayawati, in trouble (इलाहाबाद) : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ‘मायावती’ को बड़ा झटका दिया है. जिसके बाद मायावती की मुख्यमंत्री की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. सूत्रों की माने तो मायावती के कार्यकाल में बने स्मारक में घोटाले की सीबीआइ जांच की मांग को लेकर न्यायालय में याचिका दायर की गई है. इस याचिका पर न्यायालय ने माया सरकार से इस मामले में दर्ज केस की प्रगति रिपोर्ट एक हफ्ते में मांगी है. साथ ही कहा है कि न्यायालय ने कहा है कि इस घोटाले में शामिल कोई भी आरोपी बचना नहीं चाहिए.

बसपा प्रमुख को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दिया ये बड़ा झटका! जिससे मुश्किलों में घिरी मायावती
मायावती

बसपा प्रमुख मायावती एक बार फिर से मुश्किलों में फसती नजर आ रही है. मायावती के शासनकाल में बने स्मारकों के घोटाले की ‘सीबीआई’ जांच की मांग को लेकर आज जनहित याचिका दाखिल की गई है. जिसको लेकर ‘इलाहाबाद उच्च न्यायालय’ ने राज्य सरकार से इस मामले में दर्ज प्राथमिकी की जांच की एक हफ्ते में प्रगति रिपोर्ट मांगी है.

इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश ‘डीबी भोंसले’ और न्यायमूर्ति ‘यशवंत वर्मा’ की खण्डपीठ ने मिर्जापुर के शशिकान्त उर्फ भावेश पांडेय की जनहित याचिका पर आदेश जारी किया है. सूत्रों की माने तो सीबीआई द्वारा दायर इस याचिका में अम्बेडकर स्मारक परिवर्तन स्थल लखनऊ, मान्यवर कांसीराम स्मारक स्थल, गौतमबुद्ध उपवन, ईको पार्क, नोएडा अम्बेडकर पार्क, रामबाई अम्बेडकर मैदान स्मृति उपवन आदि के निर्माण में 14 अरब 10 करोड़ 83 लाख 43 हजार रुपये के घोटाले का आरोप है. लोकायुक्त ने जांच रिपोर्ट में खुलासा करते हुए कहा है कि इसमें सीबीआई या अन्य जांच एजेंसी से जांच कराने की संस्तुति है.

बसपा प्रमुख को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दिया ये बड़ा झटका! जिससे मुश्किलों में घिरी मायावती
इलाहाबाद उच्च न्यायालय

सूत्रों की माने तो राज्य में तत्कालीन मायावती सरकार ने लखनऊ के साथ नोएडा में भी दलित महापुरुषों के नाम पर पांच स्मारक पार्क बनाने के लिए लगभग 4,300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे. जानकारी के अनुसार इनको बनाने के लिए लगभग 4200 करोड़ रुपये खर्च भी हुए. लोकायुक्त ने अपनी जांच में अनुमान लगाया था कि इसमें से करीब एक तिहाई रकम भ्रष्टाचार में चली गई.

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मायावती पर आरोप है कि उन्होंने स्मारकों के निर्माण कार्य में उपयोग किये गए गुलाबी पत्थरों की सप्लाई मिर्जापुर से की गई, लेकिन इन पत्थरों की सप्लाई राजस्थान को दिखाकर पैसा लिया गया था. लोकायुक्त ने जांच में जिक्र करते हुए कहा है कि पत्थरों को तराशने के लिए लखनऊ में मशीनें मंगाई गईं थी, इसके बावजूद इन पत्थरों के तराशने में हुए खर्च में कोई कमी नहीं आई. साथ ही मायावती पर यह भी आरोप है कि भुगतान तय रकम से दस गुने दाम पर ही किया जाता रहा.

बसपा प्रमुख को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दिया ये बड़ा झटका! जिससे मुश्किलों में घिरी मायावती
मान्यवर कांसीराम स्मारक स्थल

सूत्रों की माने तो इस मामले में जनवरी 2017 में ‘अखिलेश यादव’ सरकार ने गोमतीनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था. आपको बता दें कि इस घोटाले की जांच सतर्कता विभाग द्वारा की जा रजी है. स्मारक घोटाले में यह भी आरोप है कि राजस्थान से पत्थर लदे 15 ट्रक रवाना होने के बाद मौके पर सात ट्रक ही पहुंचे. इस दौरान आठ ट्रक पत्थर हड़पे गए. इसको लेकर लोकायुक्त ने राजकीय निर्माण विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति की है. इसमें तत्कालीन कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के साथ नसीमुद्दीन तथा कई विधायकों पर घोटाले का आरोप है.

मामला 2007 से 2012 के बीच बसपा सरकार के दौरान नोएडा और लखनऊ में पार्कों और स्मारकों के निर्माण में घोटाले के आरोप का है. लोकायुक्त की जांच में 1400 करोड़ से ज्यादा का घोटाला सामने आया था.

बसपा प्रमुख को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दिया ये बड़ा झटका! जिससे मुश्किलों में घिरी मायावती
अखिलेश यादव

इसमें बसपा सुप्रीमो मायावती, पूर्व मंत्री नसीरुद्दीन सिद्दीकी, पूर्व मंत्री ‘बाबू राम कुशवाहा’ व 12 तत्कालीन विधायक इस मामले में आरोपी हैं। यही नहीं इस मामले में 100 से ज्यादा इंजीनियर और अन्य अधिकारी भी आरोपी बनाए गए हैं। केस में 2014 में सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। निर्माण निगम, पीडब्ल्यूडी, नोएडा डेवलपमेंट अथॉरिटी के इंजीनियर और अधिकारी आरोपी हैं.

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