राम मंदिर निर्माण को लेकर अमित शाह के इस बयान से विरोधियों में मची खलबली

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This statement by Amit Shah about the construction of Ram Temple (नई दिल्ली) : इस बात को हम भलिभांति जानते हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव होने से पहले भाजपा पर ‘राम मंदिर’ का निर्माण कराने को लेकर दबाव बना हुआ है. राम मंदिर को लेकर आरएसएस प्रमुख ‘मोहन भागवत’ ने भी हाल ही में कहा था कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए. इस स्थिति में भाजपा इस मामले को लेकर चाहकर भी दरकिनार नहीं कर सकती है. राम मंदिर को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ‘अमित शाह’ ने कहा है कि अयोध्या की विवादित जमीन के मालिकाना हक पर बातचीत करते समय राम मंदिर के निर्माण के तथ्य से किनारा नहीं किया जा सकता है.

राम मंदिर निर्माण को लेकर अमित शाह के इस बयान से विरोधियों में मची खलबली
राम मंदिर

गुरुवार 20 सितंबर को ‘अमित शाह’ ने कहा है कि इस पूरे विवाद में इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि अयोध्या में राम मंदिर ध्वस्त हुआ है. जब हम इसपर बातचीत करेंगे तो आप उस घटना से मुंह नहीं मोड़ सकते हैं जो 600 साल पहले घटी गई थी. भाजपा अध्यक्ष शाह ने यह बातें नई दिल्ली के डॉक्टर ‘अंबेडकर अतंरराष्ट्रीय केंद्र’ में दो किताबों- अयोध्या के चश्मदीद और युद्ध में अयोध्या की रिलीज के दौरान कही. इन किताबों के लेखक पत्रकार ‘हेमंत शर्मा’ हैं. इस कार्यक्रम में उनके साथ संघ प्रमुख ‘मोहन भागवत’ और गृहमंत्री ‘राजनाथ सिंह’ भी थे.

राम मंदिर निर्माण को लेकर अमित शाह के इस बयान से विरोधियों में मची खलबली
अमित शाह

यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब जब ‘उच्चतम न्यायालय’ इस मामले को लेकर विचार कर रही है कि इस मामले को पांच जजों की बेंच को हस्तांतरित किया जाए या नहीं. इस मामले का हल इसलिए नहीं हो पाया है क्योंकि मुख्य न्यायाधीश ‘दीपक मिश्रा’ 2 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो जाएंगे. जहां मंदिर बनवाने की चाह रखने वाले लोगों की मांग है कि विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर जल्द से जल्द फैसला दिया जाए. दूसरी तरफ उच्चतम न्यायालय अपने पुराने आदेश पर दोबारा विचार कर रही है. जिसमें उसने कहा था कि मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है.

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सुप्रीम कोर्ट

भाजपा के उस दृष्टिकोण को दोहराते हुए कि सभी संवैधानिक माध्यमों के द्वारा यह कोशिश की जाएगी कि अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर बने, इसके आगे अमित शाह ने कहा कि इस पूरे विवाद की जड़ यह है कि वहां पर एक मंदिर था. जिसको 16वीं शताब्दी में तोड़ दिया गया था. साथ ही शाह ने कहा है कि भगवान राम हिन्दू देवताओं में काफी श्रद्धेय हैं और यही कारण है कि भारत के गांवों में उनके मंदिर बने हुए हैं.

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि लेकिन एक ऐसा पल आया था जब लोगों ने अपना धैर्य खो दिया और स्वतंत्र भारत में जन्मभूमि पर ‘राम मंदिर’ निर्माण के लिए सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ. छह सदी पहले अयोध्या में मंदिर ध्वस्त होने के बाद से ही लोगों का आंदोलन लगातार चल रहा था और यह तब तक जारी रहेगा जब तक कि संस्कृति की जीत नहीं हो जाती. संघ प्रमुख ‘मोहन भागवत’ ने भी राम मंदिर के जल्द निर्माण पर जोर देते हुए कहा है कि समाज को जल्द न्याय दिए देने की आवश्यकता है.

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मोहन भागवत

इसके आगे उन्होंने कहा है कि मैं चाहता हूं कि एक भव्य राम मंदिर का निर्माण जल्द किया जाए. किसी भी तरीके से और किसी भी तरह इसे जितनी जल्दी हो सके इसका निर्माण किया जाना चाहिए. इस मामले पर किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए. अगर यह आपसी सहमति के जरिए होता है तो ‘हिन्दू’ और मुस्लिमों के बीच विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जायेगा. अगर यह सामंजस्यपूर्ण ढंग से किया जाता है तो मुस्लिमों पर बार-बार उठने वाली उंगली नहीं उठेगी.

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