गंगा को प्रदुषणमुक्त बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने लिए ये शानदार फैसला! गंगा को गंदा करने वालों को मिलेगी ये भयंकर सजा….

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Uttarakhand government has made this splendid decision to make the Ganges free from pollution (देहरादून) : उत्तराखंड से ‘गंगा’ को लेकर एक बड़ी खबर आई है. जिसके बाद राज्य समेत देशभर के लोगो में ख़ुशी माहौल है. सूत्रों की माने तो देश में गंगा नदी को प्रदुषणमुक्त बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. इस कड़ी में ‘नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल’ (एनजीटी) के निर्देशों के क्रम में होटल, आश्रम व धर्मशालाओं पर शिकंजा कसा गया है.

गंगा को प्रदुषणमुक्त बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने लिए ये शानदार फैसला! गंगा को गंदा करने वालों को मिलेगी ये भयंकर सजा....
गंगा नदी

ध्यान देने वाली बात यह है कि इन जगहों से निकलने वाले सीवरेज अथवा गंदे पानी को गंगा और उसकी सहायक नदियों में बहाने पर संबंधित होटल, आश्रम व धर्मशाला पर रोजाना 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. इस मामले में शासन ने आदेश जारी कर दिए हैं. दूसरी तरफ ‘उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ (पीसीबी) ने इसकी निगरानी को रणनीति तैयार कर ली है।

सूत्रों की माने तो केंद्र की ‘भाजपा सरकार’ समेत ‘एनजीटी’ का भी गंगा की स्वच्छता और निर्मलता को लेकर खास ध्यान है. इस मुहीम में राज्य सरकार भी जुटी हुई है. अगर आंकड़ो पर नजर डाली जाये तो अपने उद्गम स्थल गोमुख से लेकर ऋषिकेश तक गंगा का पानी पीने योग्य है. अलबत्ता, हरिद्वार में गंगा की स्थिति कुछ बिगड़ी हुई है, गंगा और उसकी सहायक नदियों में किसी भी दशा में गंदगी न जाने पाए, इसके लिए नमामि ‘गंगे परियोजना’ के तहत ‘उत्तरकाशी’ से हरिद्वार तक नालों को टैप करने के साथ ही ‘सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट’ (एसटीपी) भी तैयार किये जा रहे है. 

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी)

इस मुहीम के चलते हाल ही में एनजीटी ने राज्य में होटल, आश्रम व धर्मशालाओं से निकलने वाले सीवरेज एवं गंदे पानी के निस्तारण के उपायों के बारे में जानकारी मांगी थी. सूत्रों की माने तो यह रिपोर्ट एनजीटी को भेजी जा चुकी है. इसमें पूरे राज्य में 20 या इससे अधिक कमरों वाले होटल, आश्रम व धर्मशालाओं की संख्या 1573 बताई गई है.

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ध्यान देने वाली बात यह है कि इस रिपोर्ट के बाद अब एनजीटी के निर्देशों के क्रम में शासन ने होटल, आश्रम व धर्मशालाओं पर शिंकजा कसा है. अपर मुख्य सचिव ‘रणवीर सिंह’ द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार जो भी होटल, आश्रम व धर्मशालाएं सीवरेज और गंदे पानी को गंगा एवं उसकी सहायक नदियों में बहा रहे हैं, उन पर प्रतिदिन 5 हजार रुपये के हिसाब से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति प्रत्यारोपित का जुर्माना लगाया जाएगा. इस मामले में पीसीबी को जरूरी कदम उठाने के लिए निर्देशित किया गया है.

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पीसीबी के सदस्य सचिव ‘एसपी सुबुद्धि’ की जानकारी देते हुए कहा है कि शासन के आदेश के क्रम में बोर्ड ने होटल, आश्रम व धर्मशालाओं की निगरानी के लिए रणनीति बना ली है. इसके आगे उन्होंने कहा है कि लगातार मॉनीटरिंग के साथ ही आकस्मिक जांच होगी. इसके लिए आदेश जरी किए गए हैं. दूसरी तरफ शहरी विकास मंत्री ‘मदन कौशिक’ ने जानकारी देते हुए कहा कि शासन ने उत्तरकाशी गंगा में कूड़ा डालने के आरोपित अधिशासी अधिकारी ‘सुशील कुमार कुरील’ को निलंबित किया गया.

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