कुम्भ में CM योगी की कड़ी मेहनत का दिखा असर! साधुओं की कृपा से सरकारी खजाने में झमाझम बरसा पैसा, विरोधियों के उड़े होश

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नई दिल्ली : पिछली अखिलेश सरकार में जहाँ साधुओं पर लाठियां बरसाई जाती थी और सैफई महोत्सव में करोड़ों रूपए बर्बाद किया जाते थे वहीँ सीएम योगी ने कुम्भ मेले पर ऐसी ज़बरदस्त मेहनत करी है कि अब खुद कुम्भ की कृपा योगी सरकार के खजाने में झमाझम बरसात के रूप में हुई है.

कुम्भ में CM योगी की कड़ी मेहनत का दिखा असर! साधुओं की कृपा से सरकारी खजाने में झमाझम बरसा पैसा, विरोधियों के उड़े होश

अभी मिल रही बहुत बड़ी खबर के मुताबिक इस बार नागा साधुओं का स्वागत हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा करके हुआ, सुरक्षा के शानदार इंतज़ाम, पहली बार NSG जैसे कमांडो भी सुरक्षा में तैनात हैं. अत्याधुनिक सुविधाएं , पूरे प्रयागराज को अध्यात्म के रंग में रंगा गया है जिससे दुनिया के इस सबसे बड़े मेले में विदेशी सैलानी खूब जमकर आ रहे हैं.

1,200 अरब रुपये का राजस्व
तो वहीँ अब उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रिपोर्ट दी है जिसके मुताबिक प्रयागराज में संगम की रेती पर बसे आस्था के कुंभ से उत्तर प्रदेश सरकार को 1,200 अरब रुपये का राजस्व मिलेगा. सीआईआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 15 जनवरी से 4 मार्च तक आयोजित होने वाला कुंभ मेला, हालांकि धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन है मगर इसके आयोजन से जुड़े कार्यों में छह लाख से ज्यादा कामगारों के लिए रोजगार उत्पन्न हो रहा है.

कुंभ मेले में करीब 15 करोड़ लोगों के आने की संभावना है। दुनिया का यह सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन पूरी दुनिया में अपनी आध्यात्मिकता और विलक्षणता के लिए प्रसिद्ध है. बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक ऑस्ट्रेलिया, यूके, कनाडा, मलयेशिया, सिंगापुर, साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, जिम्बावे और श्रीलंका जैसे देशों से आ रहे हैं.

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4,200 करोड़ रुपये आवंटित किए
उत्तर प्रदेश सरकार ने 50 दिन तक चलने वाले कुंभ मेले के लिए आयोजन के लिए 4,200 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं जो वर्ष 2013 में आयोजित महाकुंभ के बजट का तीन गुना है.

सीआईआई के अध्ययन के मुताबिक कुंभ मेला क्षेत्र में आतिथ्य क्षेत्र में करीब ढाई लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा एयरलाइंस और हवाई अड्डों के आसपास से करीब डेढ़ लाख लोगों को रोजी-रोटी मिलेगी। वहीं, करीब 45,000 टूर ऑपरेटरों को भी रोजगार मिलेगा। साथ ही इको टूरिज्म और मेडिकल टूरिज्म क्षेत्रों में भी लगभग 85,000 रोजगार के अवसर बनेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक इसके अलावा टूर गाइड टैक्सी चालक द्विभाषिये और स्वयंसेवकों के तौर पर रोजगार के 55 हजार नए अवसर भी सृजित होंगे। इससे सरकारी एजेंसियों तथा वैयक्तिक कारोबारियों की आय बढ़ेगी.

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पड़ोस के राज्यों को भी इसका फायदा होगा
सीआईआई के अनुमान के मुताबिक कुंभ मेले से उत्तर प्रदेश को करीब 12 सौ अरब रुपये का राजस्व मिलेगा। इसके अलावा पड़ोस के राज्यों राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को भी इसका फायदा होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुंभ में शामिल होने वाले पर्यटक इन राज्यों के पर्यटन स्थलों पर भी जा सकते हैं।

राज्य के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद में कुंभ के लिए 4,200 करोड़ रुपये की राशि दी है और यह अब तक का सबसे महंगा तीर्थ आयोजन बन गया है। पिछली सरकार ने 2013 में महाकुंभ मेले पर करीब 1,300 करोड़ रुपये की राशि खर्च की थी।’ कुंभ मेले का परिसर भी इस बार पिछली बार के मुकाबले करीब दोगुने वृद्धि के साथ 3,200 हेक्टेयर है। 2013 में इसका फैलाव 1,600 हेक्टेयर तक था।

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प्रयागराज में कुंभ मेले के दौरान सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने बताया ” लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक आधुनिक एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर बनाया गया है जो 1200 सीसीटीवी के जरिए कुंभ मेले पर 24 घंटे नजर रख रहा है। आतंकवादियों, अपराधियों और संदिग्ध तत्वों की निगरानी के लिए ”त्रिनेत्र ऐप” का इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल साइटों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।”

उन्होंने आगे बताया, ” तीन स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पहली कुंभ मेला क्षेत्र, दूसरी प्रयागराज नगर और तीसरी आसपास के जिले में। पूरे क्षेत्र को नौ जोन और 20 सेक्टरों में बांटा गया है। यहां बीस हजार से अधिक पुलिसकर्मी, छह हजार होमगार्ड, 40 थाने, 58 चौकियां, 40 दमकल स्टेशन, केन्द्रीय बलों की 80 कंपनियां और पीएसी की 20 कंपनियां तैनात की गयी हैं। किसी आतंकी गतिविधि से निपटने के लिए आतंकवाद रोधी स्क्वाड के कमांडो, बम निरोधक दस्ता ओर खुफिया एजेंसियों को मुस्तैद किया गया है।”

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