नोटबंदी को ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाने वाली कांग्रेस पर करारा तमाचा! असली काला दिन तो वो था जब कांग्रेस

249

10 नवंबर, 2017 – नोटबंदी के दिन को कांग्रेस काले दिन के रूप मना रही है. यही नहीं इसके विरोध में काले रंग की DP में भी लगाई जा रही है. लेकिन शायद कांग्रेस अपने काले कारनामों को भूल चुकी है.  

नोटबंदी को 'ब्लैक डे' के रूप में मनाने वाली कांग्रेस पर करारा तमाचा! असली काला दिन तो वो था जब कांग्रेस

कांग्रेस ने अपने राज में तो देश को डूबो दिया लेकिन आज मोदी सरकार देश के कल्याण के लिए अच्छे फैसले ले रही है तो ये उसको काला दिवस, ब्लैक डे का नाम दे रही है. कांग्रेस के नेताओं ने इतना काला दिवस मनाया की हम भी सोच में पड़ गए की किस दिन को असल में काला दिन कहना चाहिए. क्योंकि इनके काले दिनों की तो गिनती है ही नहीं.

कांग्रेस राज में हर एक दिन काला दिन जैसा ही रहा. लेकिन हमें 1947 की याद आ गयी, उस समय 14 वोट पाने वाले सरदार पटेल की जगह 1 वोट पाने वाले जवाहर लाल नेहरू को देश के प्रधानमंत्री पद पर बैठा दिया था. मान लीजिये आप लोकतंत्र की बात करते है, और उस पर यकीन भी करते है, और 15 लोगों की वोट में आपको 14 वोट मिले और आपके प्रतिद्वंधी को 1 वोट मिला लेकिन विजेता उसे घोषित कर दिया जाये जिसे मात्र 1 वोट मिला हो और वो भी उसका खुद का. तो अगर आपके साथ ऐसा हो जाये तो आप कैसा महसूस करेंगे.

नोटबंदी को 'ब्लैक डे' के रूप में मनाने वाली कांग्रेस पर करारा तमाचा! असली काला दिन तो वो था जब कांग्रेस

कुछ ऐसा ही अन्याय इस देश में हुआ था. अंग्रेज भारत से भागना चाहते थे और इसके पीछे 2 मुख्य कारण थे, पहला तो ये कि हिटलर द्वारा दूसरे विश्वयुद्ध में ब्रिटैन की स्तिथि बड़ी ही दयनीय कर दी गयी थी, और दूसरा कारण था भारत में क्रांतिकारियों और आज़ाद हिन्द फ़ौज लगातार अंग्रेजी शासन को चुनौती दे रहे थे, इस स्थिति में अंग्रेजो का जीना हराम हो रहा था, इसके बाद उन्होंने कांग्रेस को सत्ता सौपने का मन बना लिया था.

बता दें कि आजादी से पहले देश में सिफ दो राजनीतिक दल थे.  एक कांग्रेस और दूसरा मुस्लिम लीग, भारत के बंटवारे के बाद मुस्लिम लीग तो पाकिस्तान चला गया, जिन्ना पाकिस्तान चला गया, भारत में बची कांग्रेस, देश भर में कांग्रेस की समितियां थी, हर जगह कोंग्रेसियों के आपस में ही चुनाव किया, राज्य की समितियों में भी सरदार पटेल को नेहरू के मुकाबले बहुत ज्यादा वोट मिले, उसी समय पटेल को प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए था, पर नेहरू ने गाँधी की चाटुकारिता इतनी कर रखी थी, और गाँधी खुद को सबका बापू समझता था, गाँधी ने कहा की नहीं राज्य की समितियों द्वारा नहीं होगा PM का फैसला, सिर्फ केंद्रीय कांग्रेस कमिटी ही तय करेगी कि कौन बनेगा प्रधानमंत्री.

नोटबंदी को 'ब्लैक डे' के रूप में मनाने वाली कांग्रेस पर करारा तमाचा! असली काला दिन तो वो था जब कांग्रेस
सरदार पटेल

गाँधी की इस धौंस के बाद कांग्रेस की केंद्रीय समिति में 15 लोगों के वोट से चुनाव हुआ, 14 वोट मिले की पटेल प्रधानमंत्री बने, 1 वोट मिला की नेहरू प्रधानमंत्री बने, और 14 वोट पाने वाले की जगह 1 वोट पाने वाले को प्रधानमंत्री बना दिया गया, अब आप खुद सोच सकते है की पटेल को कैसा महसूस हुआ होगा. उनके के मन, ह्रदय पर कितनी चोट लगी होगी. आज की कांग्रेस को जरूर बताना चाहिए की क्या वो काला दिन नहीं था जब 14 वोट पाने वाले पटेल की जगह 1 वोट पाने वाले नेहरू को देश का प्रधानमंत्री बना दिया गया.

कांग्रेस ने देश को सिर्फ लूटा है, जनता को धोखा दिया है. लेकिन आज कोई सरकार देश को सही मायने में आगे बढ़ाने में लगी है तो कांग्रेस को ये भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है.

loading...