कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने हिन्दुओं के त्यौहारों पर उगला जहर! बकरीद, मुहर्रम को बताया दिवाली से..

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12 अक्टूबर, 2017 –  पूरा देश जानता है कि कांग्रेस हिन्दुओं के प्रति क्या सोचती है. हिन्दुओं के त्योहारों को निशाना बनाने के बाद कांग्रेस नेता शशि थरूर ने फिर से हिन्दुओं पर विवादित बयान दिया है.

कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने हिन्दुओं के त्यौहारों पर उगला जहर! बकरीद, मुहर्रम को बताया दिवाली से..
कांग्रेसी नेता शशि थरूर

कांग्रेस के ये नेता है जो की केरल से आते है. करेल में ही कांग्रेस ने गाय को बेरहमी से काटा था. सुप्रीम कोर्ट के दिवाली पर पटाखों को बैन करने के बाद शशि थरूर बहुत खुश हैं. अपनी ख़ुशी को जाहिर करते हुए उन्होंने कई ट्वीट किये और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ख़ुशी जताई व हिन्दुओं के खिलाफ खूब जहर उगला.

शशि थरूर के हिन्दुओं के खिलाफ ट्वीट करने के बाद लोगों ने शशि थरूर को ट्विटर पर तरह-तरह के सवाल करने शुरू कर दिए, बहुत से लोगों ने पूछा कि आप दीपावली के पटाखों पर बैन चाहते हो, कभी मुहर्रम के खून को भी बैन पर चर्चा करो, बकरीद पर बेरहमी से मारे गए जानवरों के खिलाफ भी बात करो. फिर क्या था, शशि थरूर लोगों के इन सवालों से बुरी तरह चिढ़ गए और गुस्से में ये ट्वीट कर डाला..

शशि थरूर ने दीवाली से बेहतर मुहर्रम और बकरीद को बताया और कहा कि “बकरीद के मौके पर तो सिर्फ बकरियों पर काटा जाता है और इसका असर सिर्फ बकरियों पर होता है न कि किसी और पर.

रही बात मुहर्रम की तो इसमें तो दुःख मनाया जाता है और  उसका भी किसी दूसरे पर असर नहीं होता. सिर्फ दिवाली पर पटाखों से तो उन दूसरे लोगों पर असर होता है जो दिवाली नहीं मानते हैं.”

इस तरह के बयानों से शशि थरूर का ये कहना है कि, बकरीद पर जानवरों का कत्लेआम बिलकुल सही है या जायज है, उसका किस भी हालत में विरोध नहीं हो सकता, और मुहर्रम में तो दुःख मनाया जाता है उसका भी विरोध नहीं किया जा सकता.

विरोध तो सिर्फ हिन्दुओं के त्यौहार दिवाली के पटाखों का होगा क्योंकि इसका असर दुसरे लोगों पर होता है. आपको बता दें कि, बकरीद पर जानवरों खुलेआम मारने से परजीवी फैलते है, कैंसर जैसी भयंकर बीमारियां भी दूसरों को होती है, साथ ही पानी की बर्बादी, और जमीन के जरिये भूतल जल में खून का मिलना व पीने वाले पानी में भी खून ही मिलता है.

कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने हिन्दुओं के त्यौहारों पर उगला जहर! बकरीद, मुहर्रम को बताया दिवाली से..

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बकरीद एक ऐसा इस्लामी त्यौहार है जिससे भारी मात्र में प्रदूषण फैलता है. शशि थरूर जो खुद को पढ़ा लिखा बताते है, वो इस पर मौन रहते हैं. दही हांड़ी में हिन्दू बच्चे ऊपर चढ़े उनके पैर टूटे उस से दूसरों पर क्या असर पड़ता है?

लेकिन इसके बाद भी देश के सेक्युलर तत्व और कोर्ट दही हांड़ी को खतरनाक बताकर उसको बैन करने की सोचते हैं, लेकिन जब मुहर्रम में बच्चों का खुलेआम खून बहाया जाता है, ये सब देखकर भी देश के सेकुलर क्यों मौन रहते हैं? इस पर जब कोई कोई इनसे सवाल पूछे तो ये बुरी तरह भड़क जाते है, मुहर्रम, बकरीद जैसे खूनी त्यौहार को दीपावली से बेहतर बताने लगते है. इनके निशाने पर सिर्फ हिन्दुओं के ही त्यौहार रहते हैं.

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