आज से शुरू हो रही है चार धाम यात्रा, गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ के कपाट खुले

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May 9, 2016

chardham temple

देहरादून: गाजे बाजे के साथ चार पड़ाव पार करते हुए शिव की पालकी केदारनाथ पहुंच चुकी है और कपाट भी खुल चुका है. उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मौजूद केदारनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. अक्षय तृतीया के अवसर पर आज से गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट खुलने के साथ ही गढवाल हिमालय की प्रसिद्ध सालाना चारधाम यात्रा शुरू हो गई। आधिकारिक सूत्रों ने यहां बताया कि उत्तरकाशी जिले में दस हजार फीट से ज्यादा की उंचाई पर स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर तथा रूद्रप्रयाग जिले में 11 हजार फीट की उंचाई पर स्थित केदारनाथ मंदिर के कपाट आज से खुल गए। सर्दियों में छह माह तक बंद रहने के बाद इन धामों के कपाट श्रद्धालुओं के लिये खोले जायेंगे।

गढवाल हिमालय के चार धामों के नाम से प्रसिद्घ एक अन्य धाम चमोली जिले मे स्थित बदरीनाथ मंदिर के कपाट भी 11 मई को श्रद्धालुओं के लिये खुलेंगे। इन धामों के कपाट हर साल सर्दियों में क्षेत्र के भारी बर्फबारी की चपेट मे रहने के कारण श्रद्धालुओं के दर्शन के लिये बंद कर दिये जाते है जो गर्मियां आने पर दोबारा खोल दिये जाते हैं। छह माह के यात्रा सीजन के दौरान इन धामों के दर्शन के लिये देश विदेश से लाखों की संख्या श्रद्धालु आते हैं। चारधाम यात्रा को गढवाल हिमालय की आर्थिक रीढ माना जाता है।

तबाही के बाद से श्रद्धालुओं की तादाद में गिरावट

साल 2013 में मची तबाही ने यहां के हालात बदल दिए थे. यही वजह थी कि पिछले दो सालों से यहां श्रद्धालुओं की तादाद में भारी गिरावट आई थी लेकिन इस साल श्रद्धालु जोश में नजर आ रहे है.

उत्तराखंड के मशहूर चार धाम बडे और ऊंचे दुर्गम पहाडों से घिरे हुए हैं. जिसमें सबसे खास है केदारनाथ. केदारनाथ मंदिर समंदर के तल से करीब 3584 मीटर की ऊचाई पर बना है. उसी के पास एक औऱ खास धाम है बद्रीनाथ. इसके अलावा यमुनोत्री, गंगोत्री, गौरीकुंड और तमाम तीर्थ यहां पहाडों के बीच मौजूद है. जहां बहती है उफनती हुई पहाडी नदियां.

तीर्थ यात्रियों के लिए इस पूरे इलाके में जाने का मुख्य द्वार हरिद्वार है. हरिद्वार से ऋषिकेश होकर ही केदारनाथ पहुंचा जाता है. ऋषिकेश औऱ केदारनाथ के बीच 225 किलोमीटर का फासला है.

श्रद्धालुओँ की सुविधा के लिए इस बार प्रशासन ने यात्रा से पहले काफी काम किया है. किसी तरह के हादसे से निपटने के लिए पहली बार वैष्णो दैवी के दर्शन की तरह ही चार धाम यात्रा के लिए भी रजिस्ट्रेशन जरूरी किया गया है.

श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है लेकिन कल बादल फटने की घटना ने उन्हें चिंतित भी कर दिया. बादल फटने के बाद बाद पानी के तेज बहाव की वजह से कई रास्तों पर मलबा जमा हो गया. मलबे की वजह से कर्णप्रयाग के पास बद्रीनाथ हाइवे भी बंद हो गया. मलबे को हटाने का काम जोरशोर से चल रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही रास्ता साफ हो जाएगा. तीन धाम के कपाट तो आज खुल जाएंगे लेकिन बद्रीनाथ धाम का कपाट परसों यानी 11 मई को खुलेगा.

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