विधानसभा चुनाव परिणाम 2018 : राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार के ये थे बड़े कारण…

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Assembly election results 2018: Rajasthan, Madhya Pradesh and Chhattisgarh were the major reasons for BJP’s defeat (नई दिल्ली) : जैसा कि हम इस बात को भलीभांति जानते हैं कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में हुए ‘विधानसभा चुनाव’ के नतीजे बीते 11 दिसंबर को आ गए हैं. पूर्व सीएम ‘अशोक गहलोत’ और प्रदेश अध्यक्ष ‘सचिन पायलट’ की अगुवाई में कांग्रेस ने पांच साल बाद सत्ता में वापसी की है. रुझान बता रहे हैं कि कांग्रेस ने भाजपा को काफी पीछे छोड़ दिया है. आइये जानते हैं इन चुनावों में भाजपा की हार के मुख्य कारण क्या रहे.

विधानसभा चुनाव परिणाम 2018 : राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार के ये थे बड़े कारण...

राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजे का हाल

हर बार की तरह राजस्थान में पांच साल में सत्ता परिवर्तन की परिपाटी जारी रही. यहां ‘भाजपा’ को हराकर ‘कांग्रेस’ नई सरकार बनाने को तैयार है. जिस प्रकार के नतीजों का अनुमान लगाया जा रहा था वैसा नहीं रहा. जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, कांटे की टक्कर साफ दिखाई देने लगी. अंतत: वहां कांग्रेस को निर्णायक बढ़त मिली है. आपको बता दें कि कुल 199 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से सत्ता हासिल करने के लिए 99 सीटों का आंकड़ा छू लिया. दूसरी तरफ सूबे में भाजपा को 73 सीटें ही मिली हैं.

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम

सूत्रों की माने तो इस चुनाव में मतदाताओं ने मध्यप्रदेश में पहली बार खंडित जनादेश दिया है. यहां कांटे के मुकाबले में फंसी दोनों पार्टियों कांग्रेस और भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. आपको बता दें कि कांग्रेस 114 सीटों के साथ पहले नंबर पर है. वहीं भाजपा 109 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है. बसपा को 2, सपा को 1 और 4 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई हैं. 230 विधानसभा सीटों वाली राज्य विधानसभा में बहुमत के लिए 116 सीटों की जरूरत होती है. ऐसे में अगली सरकार कौन बनाएगा इस पर पेंच फंस गया है.

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के परिणाम 

यहां कांग्रेस द्वारा किसानों की ऋण माफी समेत फसलों के उचित मूल्य के वादे का दांव सफल परिणाम देखने को मिला. यहां भाजपा को 90 में से 15 सीटें मिलीं हैं, जबकि कांग्रेस को 68 सीटों के साथ पहली बार दो तिहाई बहुमत से जीत मिली है. इसी के साथ कांग्रेस की इस ऐतिहासिक जीत ने 15 साल से चल रहे ‘रमन सिंह’ के शासन का अंत कर दिया है. वहीं, बीएसपी को 2 और जनता कांग्रेस को 5 सीटों पर जीत मिली है.

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वसुंधरा राजे के खिलाड़ भारी नाराजगी 

कई मामलों पर वसुंधरा राजे के रुख ने लोगों को नाराज किया. फसलों का पूरा मुआवजा न मिलने, खाद वितरण में पुलिस बल का प्रयोग, किसानों की आत्महत्या, अपराधों में बढ़ोतरी, रोजगार की समस्या, डीजल-पेट्रोल-गैस के बढ़ते दाम, बिजली और जलापूर्ति जैसे मुद्दों की वजह से लोगों में भाजपा और मुख्यमंत्री ‘वसुंधरा राजे’ के प्रति रोष दिखा. इसके अलावा राजपूत भी इस बार वसुंधरा सरकार से बेहद नाराज थे. इसका असर अब नतीजों में भी दिख रहा है. जमीनी हालात की बात करें तो अधिकतर लोगों का कहना था कि वसुंधरा राजे उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं. दरअसल लोगों को पीएम ‘नरेंद्र मोदी’ से शिकायत नहीं थी, वह पहली पसंद बनकर उभरे। लेकिन वसुंधरा राजे से लोग नाराज दिखे।

टिकट बंटवारा को लेकर विवाद

सूत्रों की माने तो विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा में टिकट बंटवारे को लेकर संग्राम छिड़ गया था. बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट काटे गए. इसके अलावा कुछ मंत्रियों को भी टिकट नहीं दिया गया. इससे नाराज नेताओं ने बगावत का रुख अख्तियार कर लिया. दरअसल मतदान से पहले कुछ बड़े नेता मान गए लेकिन समर्थकों में पहले ही निराशा घर कर गई थी. विधायकों से जनता की नाराजगी ने रही-सही कसर पूरी कर दी. टिकट बंटवारे में ‘वसुंधरा राजे’ के दखल ने भी भाजपा का खेल बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभाई.

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बागियों के कारण हारी भाजपा 

आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव में इस बार कुछ बड़े नेता वसुंधरा सरकार से नाराज होकर बागी हो गए. भाजपा विधायक ‘घनश्याम तिवाड़ी’ ने अलग पार्टी ‘भारत वाहिनी’ बनाकर चुनावी मैदान में आए. हीरक कर देने वाली बात यह है कि तिवाड़ी ने खुलेआम वसुंधरा राजे का विरोध किया था. वह सांगानेर से 5 बार विधायक रह चुके हैं और 2013 में करीब 60 हजार वोटों से जीते थे. दूसरी तरफ एक और बड़े नेता निर्दलीय विधायक ‘हनुमान बेनीवाल’ भी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में उतरे. नागौर से खींवसर से विधायक बेनीवाल ने 57 सीटों पर उम्मीदवार उतारे. इसके अलावा कई दूसरे बागियों ने भी भाजपा का खेल बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाई.

महिला वोटर ने निभाई मुख्य भूमिका

सूत्रों की माने तो इस बार राजस्थान चुनाव में महिला वोटरों ने सरकार बनाने में मुख्य भूमिका निभाई. मतदान प्रतिशत के आधार पर महिला मतदाता, पुरुष मतदाताओं से आगे रहीं. इस बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत 74.66% और पुरुषों का मतदान प्रतिशत 73.81% रहा.

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आपको याद दिला दें कि 2013 के चुनाव में भी महिलाएं आगे रही थीं और मतदान का प्रतिशत 75.57% और 74.92% रहा था. महिलाओं के बढ़े हुए मतदान प्रतिशत ने ही ‘वसुंधरा राजे’ की सत्ता गिराने में बड़ा रोल निभाया। महिलाओं के लिए चलाई गईं योजनाएं भी काम नहीं आई.

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