दीवाली के शुभ मुहूर्त में करेंगे पूजा तो होगी धन की वर्षा! जानिए सबसे शुभ मुहूर्त व लक्ष्मी को बुलाएं घर

356

18 अक्टूबर, 2017 – दीवाली का पर्व कार्तिक कृष्ण अमावस्या को मनाया जाता है. जो इस बार 19 अक्टूबर 2017 को पड़ रही है.  दीवाली में आप इस शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन करेंगे तो विशेष फलदायी होगा. आईये जानते हैं ये शुभ मुहूर्त.

दीवाली के शुभ मुहूर्त में करेंगे पूजा तो होगी धन की वर्षा! जानिए सबसे शुभ मुहूर्त व लक्ष्मी को बुलाएं घर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त = सायं 7:26 से 8:24 मिनट तक

अवधि = ० घण्टे 58 मिनट्स

वृषभ लग्न (स्थिर ) = सायं 07:26 से 09:24

अमावस्या तिथि प्रारम्भ = 19 अक्टूबर 2017 (को 18/19 की मध्य रात्रि )00:13 बजे

अमावस्या तिथि समाप्त = २०अक्टूबर 2017 को 00:41बजे

दीपावली के शुभ मुहूर्त

लाभ का चौघड़िया : 10.47 से 12.10 तक।

अमृत का चौघड़िया : 12.10 से 1.10 तक।

लाभ का चौघड़िया (सायंकाल) : 7.18 मिनट से 8.57 मिनट तक

सिंह लग्न : रात्रि 12.15 मिनट से 2.31 मिनट तक

माँ लक्ष्मी की आराधना के लिए दीवाली की रात को लगभग 1 घंटे का विशेष मुहूर्त है. इसलिए पूजन से पूर्व सभी आवश्यक सामग्री को एकत्र कर लें. पूजन के लिए प्रयोग की जाने वाली सामग्री में रोली, , कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, गंगाजल, यज्ञोपवीत, श्वेत वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, लक्ष्मी व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, मिष्ठान्न, 11 दीपक होते हैं.

दीवाली के शुभ मुहूर्त में करेंगे पूजा तो होगी धन की वर्षा! जानिए सबसे शुभ मुहूर्त व लक्ष्मी को बुलाएं घर

अच्छे से आसन में बैठकर मन और शरीर को पवित्र करने की भावना से एन मन्त्र का उच्चारण करें –

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा

य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:

 

सबसे पहले गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए. उसके बाद वरुण पूजा यानी कलश पूजन करनी चाहिए. हाथ में थोड़ा सा जल ले लीजिए और आह्वान व पूजन मंत्र बोलिए और पूजा सामग्री चढ़ाइए,  फिर नवग्रहों व नक्षत्रों का स्मरण करते हुए भगवान विष्णु का ध्यान करें. इसके बाद माँ भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन करें-इनके नाम इस प्रकार हैं:-

1.गणेश-गौरी, 2. पद्मा, 3.शची, 4. मेधा, 5. सावित्री, 6.विजया, 7.जया, 8.देवसेना, 9. स्वधा, 10.स्वाहा, 11.मातरः, 12लोकमातरः , 13.धृति, 14.पुष्टि, 15.तुष्टि, 16.आत्मनः कुल देवि.

 

हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प ले लीजिए और इन 16 माताओं को अर्पित कीजिये अब आनंदचित्त और पूर्ण श्रद्धा भाव होकर माँ लक्ष्मी का ध्यान लगाएं.

लक्ष्मी प्राप्ति का करें अचूक उपाय -चमत्कारी है श्री सूक्त

इसी स्थिर लग्न में अब श्रीसूक्त का पाठ करें, जिससे माँ लक्ष्मी की कृपा से आपके वित्तीय कोष में वृद्धि हो और जीवन में संपत्ति और वैभव स्थिर रहे. श्री सूक्त के मन्त्र और उनका अर्थ इस प्रकार है-

ॐ  हिरण्यवर्णां हरिणीम् सुवर्णरजतस्त्रजाम्  । चन्द्रां  हिरण्यमयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥ १

– हे जातवेदा  सर्वज्ञ अग्नि  देव आप सोने के समान रंग वाली किंचित हरितवर्ण से युक्त सोने व चांदी के हार पहनने वाली ,चंद्रमा के समान   प्रसन्न कांति स्वर्णमयी  लक्ष्मी देवी का मेरे लिये आवाहन करे.

मन्त्र में छिपी गूढ़ युक्ति :

इस मन्त्र में युक्ति है -जातवेद अग्नि यानि दैवीय ऊर्जा जो हमारे भीतर-बाहर चारों ओर है- सूर्यादि नक्षत्रों को उत्पन्न करने वाली हिरण्यरूप जातवेद अग्नि से महालक्ष्मी का अवतरण होता है, इस मन्त्र के पाठ मात्र से दारिद्र्य समाप्त हो जाता है.

दीवाली के शुभ मुहूर्त में करेंगे पूजा तो होगी धन की वर्षा! जानिए सबसे शुभ मुहूर्त व लक्ष्मी को बुलाएं घर

ॐ तां  म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां  हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्  || २ ॥

 

– हे अग्ने ! उन लक्ष्मी देवी का जिनका कभी विनाश नहीं होता है तथा जिनके आगमन से मैं सोना, गौ ,घोड़े तथा पुत्रादि को प्राप्त करू, मेरे लिए सुख वैभव के हेतु उन महालक्ष्मी का आवाहन करें.

 

अश्व पूर्वां  रथ मध्यां हस्तिनाद प्रमोदिनीम् । श्रियं देवीमुप ह्वये श्रीर्मा देवी जुषतां  ॥ ३ ॥

– जिन देवी की आगे घोड़े तथा उनके पीछे रथ रहते है तथा जो हस्तिनाद को सुनकर प्रमुदित होते है ,उन्ही श्री देवी का मै  आवाहन करता हूँ , लक्ष्मी देवी मुझे प्राप्त हो.

कां सोस्मितां हिरण्यप्रकारामाद्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्  पद्मेस्थितां  पद्मवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियं ॥ ४ ॥

– जो साक्षात ब्रह्मरूपा, मंद मंद मुस्कराने वाली , सोने के आवरण से आवृत ,  तेजोमयी, पूर्णकामा, कमल के आसन  पर विराजमान तथा पद्मवर्णा है ,उन  लक्ष्मी देवी का मै  यहाँ आवाहन करता हूँ.

चन्द्रां प्रभासां  यशसाज्वलन्तीम् श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् ।

तां पद्मिनीं शरणं प्रपद्य  अलक्ष्मीर्मे  नश्यतां त्वां  वृणोमि  ॥ ५ ॥

– मैं  चन्द्रमा के समान शुभ कान्तिवाली , सुंदर द्युतिशालिनी , यश से दीप्तिमती , स्वर्ग लोक में देवगणों  के द्वारा पूजिता ,  उदार शीला , पद्महस्ता लक्ष्मी देवी की शरण ग्रहण करता हूँ.  मेरा दारिद्र्य दूर हो जाये इस हेतु मै  आपकी  शरण लेता हूँ.

आदित्यवर्णे  तपसोSधि जातो वनस्पतिस्तव  वृक्षोSथ  बिल्वः ।

तस्य फलानि  तपस्यानुदन्तु  या अन्तरायास्च  बाह्या  अलक्ष्मीः ॥ ६ ॥

– हे सूर्य  के समान प्रकाश स्वरूप  तप करने वाले वृक्षों में श्रेष्ठ मंगलमय बिल्व वृक्ष उत्पन्न हुआ, उसके फल  आपके अनुग्रह से हमारे बाहरी और भीतर के दारिद्र्य को दूर करे.

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना  सह ।  प्रादुर्भूतोSस्मि राष्ट्रेSस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ॥ ७ ॥

– हे देवी देव सखा कुबेर और उनके मित्र मणिभद्र तथा दक्ष प्रजापती  की कन्या कीर्ति मुझे प्राप्त हो, अर्थात्  मुझे धन व यश   की प्राप्ति  हो. मै  इस देश में उत्पन्न हुआ हूँ मुझे कीर्ति और ऋद्धि प्रदान करे.

दीवाली के शुभ मुहूर्त में करेंगे पूजा तो होगी धन की वर्षा! जानिए सबसे शुभ मुहूर्त व लक्ष्मी को बुलाएं घर

क्षुत्पिपासामलां  ज्येष्ठामलक्ष्मीं नास्यामहम् ।  अभूतिम् असमृद्धिम्  च  सर्वां निर्णुद मे गृहात् ॥ ८  ॥

– लक्ष्मी की ज्येष्ठ बहन अलक्ष्मी जो भूख और प्यास से मलिन क्षीण काय  रहती  है उसका मैं नाश चाहता हूँ,  देवी मेरा दारिद्र्य दूर हो.

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।  ईश्वरीम्  सर्वभूतानां तामिहोप ह्वये श्रियं ॥ ९ ॥

– सुगन्धित जिनका  प्रवेशद्वार है, जो दुराधर्षां  तथा नित्य पुष्ट हैं और जो गोमय के बीच  निवास करती है  सब भूतो की स्वामिनी उन लक्ष्मी देवी का मै अपने घर में आवाहन्  करता हूँ ।

मनसः  काममाकुतिम् वाचः  सत्यमशीमहि । पशूनां रूपमनस्य  मयि श्री श्रयतां यशः ॥ १० ॥

– मन  की कामनाओ और संकल्प की सिद्धि  एवं वाणी  की सत्यता मुझे प्राप्त हो, गो आदि पशुओ एवं विभिन्न अन्न भोग्य पदार्थों के रूप में, यश के रूप में श्री देवी हमारे यहाँ आगमन करे.

कर्दमेन प्रजाभूता मयि संभव कर्दम  ।  श्रियं वासय  मे कुले  मातरं  पद्ममालिनीम् ॥ ११ ॥

– लक्ष्मी के पुत्र कर्दम की हम संतान है । कर्दम ऋषि आप हमारे  यहाँ उत्पन्न हो तथा पद्म की माला धारण करने वाली  माता लक्ष्मी  देवी  को हमारे कुल में स्थापित करे.

आपः  सृजन्तु स्निग्धानि  चिक्लीत  वस मे गृहे । नि  च देवीं मातरं  श्रियं   वासय  मे कुले  ॥ १२ ॥

– जल स्निग्ध  पदार्थो की  सृष्टि करे । लक्ष्मी पुत्र चिक्लीत  आप भी मेरे घर में वास करे और माता लक्ष्मी  देवी का मेरे कुल में निवास कराये.

आर्द्रां पुष्करणीम् पुष्टिं पिंगलां पद्ममालिनीम् । चन्द्रां हिरण्यमयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥ १३ ॥

-हे अग्ने  आर्द्र  स्वभाव , कमल  हस्ता  , पुष्टिरूपा , पीतवर्णा , पद्म की माला  धारण करने वाली , चन्द्रमा के समान शुभ्र कांति  से युक्त  स्वर्णमयी लक्ष्मी देवी का मेरे यहाँ आवाहन करे.

आर्द्रां यः  करिणीम् यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् । सूर्यां  हिरण्यमयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ।। १४  ॥ 

 -हे अग्ने ! जो दुष्टों  का निग्रह करने वाली होने पर भी कोमल स्वभाव की है, जो मंगल दायिनी , अवलंबन प्रदान करनेवाली यष्टि रूपा, सुन्दर वर्णवाली , सुवर्णमालधारिणी , सूर्य स्वरूपा तथा हिरण्य मयि है, उन लक्ष्मी देवी का मेरे लिए आवाहन् करे ।

तां म आवह  जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं  प्रभूतं गावो दास्योश्वान विन्देयं पुरुषानहम् ॥ १५ ॥ 

– हे अग्ने ! कभी नष्ट न होने वाली  उन लक्ष्मी देवी का मेरे लिये आवाहन्  करे, जिनके आगमन से बहुत सा धन, गो, दास , अश्व और पुत्रादि हमें प्राप्त हो.

यः  शूचीः प्रयतो  भूत्वा जुहुयादाज्या मन्वहम् ।  सूक्तं  पंचदशर्चम्  च श्रीकामः सततं जपेत्  ॥ १६ ॥

– जिसे लक्ष्मी की कामना हो , वह प्रतिदिन  पवित्र और संयमशील होकर अग्नि में घी की आहुतिया दे तथा इन पंद्रह ऋचा वाले श्री सूक्त का निरंतर पाठ करे.

इस मन्त्र में युक्ति है -जातवेद अग्नि यानि दैवीय ऊर्जा जो हमारे भीतर-बाहर चारों ओर है- सूर्यादि नक्षत्रों को उत्पन्न करने वाली हिरण्यरूप जातवेद अग्नि से महालक्ष्मी का अवतरण होता है, इस मन्त्र के पाठ मात्र से दारिद्र्य समाप्त हो जाता है. महालक्ष्मी की प्राप्ति के लिए ये मन्त्र बहुत ही अचूक और चमत्कारी है. कोई भी साधक इसका 108 बार पाठ करता है तो उसकी धन सम्बन्धी समस्या समाप्त होकर उसकी श्री वृद्धि होती है. यदि ऋग्वेद के इन मन्त्रों के साथ हवन में घी, चन्दन व गुगुल की आहुतियाँ दी जाए तो साधक को मनोवांछित धन की प्राप्ति अवश्य होती है. इस दिवाली को शुभ मुहूर्त इसका विशेष लाभ उठाएं.

आचार्य मदन सिंह,
ज्योतिष व वास्तुविद
9911438929

 

loading...