भगवान शिव की अराधना के बाद श्रीकृष्ण की करें भक्ति! पूरी होगी हर मनोकामना

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RNTimes : बीते रविवार 26 अगस्त को ‘रक्षाबंधन’ के साथ-साथ सावन का महीना भी समाप्त हो गया है. पंचांग के अनुसार सावन के बाद भादो आता है, जिसको भाद्रपद’ महीना भी कहा जाता है शुरू हो रहा है. भाद्रपद चातुर्मास में आने वाला दूसरा महीना होता है. भादो महीना ‘भगवान श्रीकृष्ण’ के जन्म लेने से संबंधित है. भगवान श्रीकृष्ण ने भादों के महीने में रोहिणी नक्षत्र के वृष लग्न में जन्म लिया था. भादों के महीने को भी ‘सावन’ की तरह ही पवित्र माना जाता है. इस माह में कुछ पर्व आते हैं. जिनका अपना अलग महत्त्व होता है.

भगवान शिव की अराधना के बाद श्रीकृष्ण की करें भक्ति! पूरी होगी हर मनोकामना
भगवान श्रीकृष्ण

भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना 

जिस प्रकार सावन के महीने में भगवान शिव की उपासना के लिए महत्व रखता है, तजी उसी प्रकार ‘भादो’ का महीना भगवान ‘श्री कृष्ण’ की आराधना के लिए महत्व है. भगवान कृष्ण का जन्म ‘भाद्रपद मास’ के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में हुआ था. आपको बता दें कि इस बार अष्टमी 2 सितम्बर की रात 08:47 पर लगेगी और 3 तारीख की शाम 07:20 तक रहेगी. 

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कजरी तीज

भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की तृतीया को ‘कजरी तीज’ भी कहते हैं. इस बार यह 29 अगस्त आएगी. यह त्यौहार को उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में विशेष रूप से मनाया जाता है. इस तीज पर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं.

Bhadrapad month celebrates Lord Krishna's worship

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 

इस महीने में श्रीकृष्ण अष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के रूप में पर्व मनाया जाता है. यह त्यौहार 2 और 3 अगस्त दोनों दिन मनाया जाएगा क्योंकि इस बार अष्टमी 2 सितम्बर की रात 08:47 पर लगेगी और 3 तारीख की शाम 07:20 पर खत्म हो जायेगी. लिहाजा अष्टमी की रात 2 सितम्बर को ही होगी. पूरे भारत में ‘जन्माष्टमी’ बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है. आधी रात को कृष्ण का जन्म होता है.

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गणेश चतुर्थी

जैसे ही जन्माष्टमी समाप्त होती है तो उसके बाद ‘गणेश चतुर्थी’ का त्योहार मनाया जाता है. यह13 अगस्त को मनाया जाएगा. यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है. इस दिन भगवान श्री गणेश की पूजा, उपवास आदि किया जाता है. गणेश चतुर्थी को चन्द्र दर्शन नहीं करने चाहिए.

Bhadrapad month celebrates Lord Krishna's worship
गणेश चतुर्थी

परिवर्तनी एकादशी

भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, एकादशी तिथि, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में ‘देवझूलनी एकादशी’ का पर्व मनाया जाता है. देवझूलनी एकादशी में ‘भगवान विष्णु’ की पूजा, व्रत, उपासना करने का विधान है. देवझूलनी एकादशी को ‘पदमा एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है.

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