गायत्री मंत्र का जप करते समय भूलकर भी न करें ये गलती! जाने इससे जुड़ी महत्वता…

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Do not forget even when chanting a Gayatri mantra, do not mistake it! Know the importance associated with it (24 जनवरी, 2019) : इस बात को हम भलीभांति जानते हैं कि ‘हिन्दू’ धर्म में ‘गायत्री मंत्र’ को सबसे उत्तम और सर्वश्रेष्ठ माना गया है. यह एक ऐसा मंत्र है जो न सिर्फ हिन्दू धर्म में आस्था रखने वालों की जुबान रहता है बल्कि अन्य धर्म के लोग भी इस मंत्र के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं. कई शोधों के बाद सामने आया कि गायत्री मंत्र के जाप से कई लाभ मिलते हैं.  

गायत्री मंत्र का जप करते समय भूलकर भी न करें ये गलती! जाने इससे जुड़ी महत्वता...
गायत्री माता

आपको इस बात से अवगत करा दें कि वेदों की कुल संख्या चार है और चारों वेदों में गायत्री मंत्र के बारे में बताया गया है. इस मंत्र के ऋषि ‘विश्वामित्र’ हैं और देवता ‘सवितृ’ हैं. मान्यता यह है कि इस मंत्र में इतनी शक्ति है कि नियमित तीन बार जप करने वाले व्यक्ति के आस-पास नकारात्मक शक्तियां, भूत-प्रेत और ऊपरी बाधाएं नहीं फटकती.

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साथ ही गायत्री मंत्र के जप से कई तरह का लाभ मिलता है. यह मंत्र कहता है ‘उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।’ मतलब इस मंत्र के जप से बौद्धिक क्षमता और मेधा शक्ति यानी स्मरण की क्षमता बढ़ती है. इससे व्यक्ति का तेज बढ़ता है साथ ही दुःखों से छूटने का रास्ता मिलता है.

गायत्री मंत्र का जप करते समय भूलकर भी न करें ये गलती! जाने इससे जुड़ी महत्वता...
विश्वमित्र

इस मंत का जप सूर्योदय से दो घंटे पूर्व से लेकर सूर्यास्त से एक घंटे बाद तक किया जा सकता है. मौन मानसिक जप कभी भी कर सकते हैं, ध्यान रहे कि रात्रि में इस मंत्र का जप नहीं करना चाहिए. कहा जाता है कि रात में गायत्री मंत्र का जप लाभकारी नहीं होता है.

गायत्री मंत्र में अक्षरों की संख्य चौबीस होती है. यह चौबीस अक्षर चौबीस शक्तियों-सिद्धियों के प्रतीक हैं. यही कारण है कि ऋषियों ने गायत्री मंत्र को भौतिक जगत में सभी प्रकार की मनोकामना को पूर्ण करने वाला मंत्र बताया है.

इसके अलावा गायत्री मंत्र से आर्थिक मामलों में मुश्किलें आने पर श्रीं का संपुट लगाकर जप करने से आर्थिक बाधा दूर होती है.

 

गायत्री मंत्र का जप करते समय भूलकर भी न करें ये गलती! जाने इससे जुड़ी महत्वता...

गायत्री मंत्र छात्रों के लिए बहुत ही लाभदायक होता है. ‘स्वामी विवेकानंद’ ने कहा है कि गायत्री सद्बुद्धि का मंत्र है, इसलिए उसे मंत्रो का मुकुटमणि कहा गया है. नियमित रूप से 108 बार गायत्री मंत्र का जप करने से बुद्धि प्रखर और किसी भी विषय को लंबे समय तक याद रखने की क्षमता बढ़ जाती है. यह मंत्र व्यक्ति की बुद्धि और विवेक को निखारने का भी काम करता है.

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