गणेश चतुर्थी : भगवान गणेश को क्यों भाता है मोदक! ये 5 कारण…

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Ganesh Chaturthi: Why is Lord Ganesha delighted Modak! These 5 reasons (RN Times) : आज हम आपको ‘भगवान श्रीगणेश’ को प्रसन्न करने के लिए कुछ आवश्यक भोग के बारे में बताने जा रहे हैं. शास्त्रों में ‘भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाकर प्रसन्न करने का सबसे आसान उपाय दर्शाया गया है. चाहे तो आप गणपति बप्पा को खुश करने के लिए पूजा करते समय भले ही रसगुल्ला, मालपुआ, रसमलाई का प्रसाद चढ़ाएं, परंतु अगर आपने गणेशजी को मोदक का भोग नहीं लगाया तो समझ लीजिए गणेश जी को आपके छप्पन भोग भी पसंद नहीं आएंगे. शास्त्रों के अनुसार गणेश जी को मिष्ठानों में सबसे प्रिय है मोदक.

Ganesh Chaturthi: Why is Lord Ganesha delighted Modak! These 5 reasons
भगवान गणेश

भगवान श्रीगणेश जी का मोदक प्रिय होना भी उनकी बुद्धिमानी का परिचय देता है. आइए जानते हैं वो पांच कारण जिनकी वजह से गणेश जी को मोदक इतना पसंद है.  

गणेश चतुर्थी 2018

शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश जी का एक दांत ‘परशुराम जी’ से हुए युद्ध के दौरान टूट गया था. जिसके कारण गणेश जी को तकलीफ होती है, क्योंकि उन्हें चबाना पड़ता है. मोदक बहुत ही मुलायम होता है, इसको चबाना भी नहीं पड़ता है. मोदक मुँह में जाते ही घुल जाता है और इसका मीठा स्वाद मन को आनंदित कर देता है.

मोदक भगवान गणेश को पसंद आने का एक और कारण है, ‘मोदक’ प्रसन्नता प्रदान करने वाला मिष्टान है. मोदक के शब्दों पर गौर करें तो ‘मोद’ का अर्थ हर्ष मतलब खुशी. भगवान गणेश को शास्त्रों में मंगलकारी एवं सदैव प्रसन्न रहने वाला देवता भी बताया गया है. वह कभी किसी चिंता में नहीं पड़ते.

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गणेशजी का परशुराम जी से युद्ध

गणेशजी के हमेशा प्रसन्न रहने का कारण संभवतः मोदक ही है. मोदक के इसी गुण की वजह से गणेशजी सभी मिष्टानों में मोदक को अधिक पसंद करते हैं.

पद्म पुराण के सृष्टि खंड में गणेश जी को मोदक प्रिय होने की जो कथा मिलती है उसके अनुसार मोदक का निर्माण अमृत से हुआ है. देवताओं ने एक दिव्य मोदक ‘माता पार्वती’ को दिया. गणेश जी ने मोदक के गुणों का वर्णन माता पार्वती से सुनने के बाद गणेशजी की मोदक खाने की इच्छा बढ़ गयी.

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शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश ने अपनी चतुराई के कारण ‘माता पार्वती’ से मोदक प्राप्त कर लिया. गणेश जी को मोदक इतना पसंद आया कि उस दिन से भगवान गणेश मोदक प्रिय बन गये. गणपत्यथर्वशीर्ष में लिखा है, “यो मोदकसहस्त्रेण यजति स वांछितफलमवाप्नोति.” जिसका अर्थ है जो व्यक्ति गणेश जी को मोदक अर्पित करके प्रसन्न करता है उसे गणपति मनोवांछित फल प्रदान करते हैं.

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माता पार्वती

यजुर्वेद के अनुसार भगवान गणेश जी ‘परब्रह्म’ स्वरूप हैं. लड्डू को गौर से देखेंगे तो उसका आकार ब्रह्माण्ड के समान नजर आता है. गणेश जी के हाथों में लड्डू का होना यह भी दर्शाता है कि गणेश जी ने ‘ब्रह्माण्ड’ को धारण कर रखा है. सृष्टि के समय गणेश जी ब्रह्मण्ड को प्रलय रूपी मुख में रखा और सृष्टि के आरंभ में इसकी रचना करते हैं.

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