स्वर्ग या नरक कैसा जीवन जीना चाहते हैं आप

132

आपका मन ही आपके भीतर ‘स्वर्ग’ या ‘नरक’ रचता है। यह सब इस पर निर्भर करता है कि आप अपने दिमाग का उपयोग कैसे करते हैं। आपको अपने भीतर करुणा की जगह बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए तब हम ज्यादा बेहतर जीवन जी पाएंगे।

स्वर्ग या नरक कैसा जीवन जीना चाहते हैं आप

हमारे जीवन का उद्देश्य सिर्फ दिन काटना नहीं, बल्कि आत्मशांति की खोज है। जब आपके जीवन में संतोष होगा तो आप असफलताओं से आहत नहीं होंगे।

जब आप दूसरों के साथ तुलना करते हैं तो आपको अपना कद हमेशा छोटा ही नजर आता है क्योंकि कोई न कोई ऐसा व्यक्ति मिल ही जाता है जो आपसे दौड़ में आगे खड़ा होता है।

खेल की दुनिया में भी जो रिकॉड्रस बने हैं, वे एक न एक दिन टूटेंगे ही। इसलिए तुलना ऐसी चीज है जो आपको असफलता के रास्ते पर ले जाती है लेकिन तरक्की की तरफ बढऩे का रास्ता भी यही है।

जब किसी स्थिति में हमारे मन में यह भाव रहता है कि हम असफल हो गए तो समझिए कि आप असफल हुए, वरना आप जहां भी हैं वही आपकी सफलता है। असल में मन बंधन या आजादी को जन्म नहीं देता है बल्कि वह तो एक बर्तन है जिसमें आप जो भी डालेंगे वह उसी तरह से उस पर काम करना शुरू कर देगा।

सोचिए अगर आपका सामना, अगले पेज पर जारी है….->

Loading...